कटिहार-बारसोई रेलखंड के डबलिंग प्रोजेक्ट का फर्स्ट फेज पूरा हो गया है. कटिहार-सोनैली और कटिहार-कुरेठा के बीच करीब 30 किलोमीटर नई डबल रेल लाइन तैयार की गई है. 126 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हाईस्पीड ट्रायल सफल होने के बाद नियमित ट्रेनों के संचालन को मंजूरी मिल गई है.
बिहार के कटिहार रेल मंडल के यात्रियों का लंबा इंतजार अब खत्म हो गया है. कटिहार-बारसोई रेल लाइन डबलिंग प्रोजेक्ट के पहले फेज का पूरा कर लिया गया है. इसके तहत कटिहार-सोनैली और कटिहार-कुरेठा के बीच करीब 30 किलोमीटर लंबी नई डबल रेल लाइन बनकर पूरी तरह तैयार है.
रेलवे सुरक्षा आयुक्त (CRS) सुमित सिंघल की देखरेख में इस नए ट्रैक पर 126 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हाईस्पीड ट्रेन दौड़ाकर ट्रायल किया गया, जो पूरी तरह सफल रहा. इस सफल ट्रायल के बाद अब इस रूट पर नियमित ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो गया है.
950 करोड़ का प्रोजेक्ट, 120 की स्पीड से दौड़ेंगी ट्रेनें
इस पूरे बड़े प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 950 करोड़ रुपये है. इसके तहत कुल 64 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को डबल किया जाना है. पहले फेज का काम पूरा होने से इस मुख्य रूट पर ट्रेनों का आना-जाना बेहद आसान हो जाएगा. अब इस ट्रैक पर ट्रेनें लगभग 120 किलोमीटर प्रति घंटे की टॉप स्पीड से दौड़ सकेंगी. इससे यात्रियों के समय की बचत होगी और पहले के मुकाबले ज्यादा ट्रेनों का संचालन किया जा सकेगा.
रद्द हुई ट्रेनें फिर से पटरी पर लौटेंगी
इस डबलिंग के काम की वजह से पिछले दिनों इस रूट की ट्रेनों पर काफी असर पड़ा था. काम को पूरा करने के लिए 10 जून से एक दर्जन से भी ज्यादा ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था, जबकि कई ट्रेनों के रूट बदल दिए गए थे. अब नया ट्रैक चालू हो जाने से रद्द की गई इन सभी ट्रेनों को धीरे-धीरे फिर से शुरू कर दिया जाएगा. इससे सीमांचल के यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी. कटिहार मंडल के डीआरएम (DRM) कीरेन्द्र नाराह ने बताया कि हरी झंडी मिलने के बाद नए ट्रैक पर ट्रेनों की आवाजाही शुरू करा दी गई है.
दिसंबर 2026 तक पूरा होगा दूसरा फेज
डीआरएम ने आगे बताया कि यह पूरा प्रोजेक्ट दो हिस्सों में बांटा गया है. पहले फेज का काम पूरा होने के बाद अब दूसरे फेज के तहत बची हुई 34 किलोमीटर लंबी रेल लाइन को डबल करने का काम तेजी से किया जा रहा है. रेलवे अधिकारियों ने इस दूसरे चरण के काम को दिसंबर 2026 तक पूरा करने का टारगेट रखा है. जब यह पूरा प्रोजेक्ट कंप्लीट हो जाएगा, तब उत्तर-पूर्व बिहार और सीमांचल के लाखों लोगों को इसका सीधा फायदा मिलेगा. इससे न सिर्फ यात्री ट्रेनों का समय सुधरेगा बल्कि मालगाड़ियों की रफ्तार भी बढ़ेगी.


