Wednesday, June 17, 2026

सीएजी रिपोर्ट के अनुसार FY25 में यूपी-गुजरात समेत 13 राज्य राजस्व मुनाफे में रहे, जबकि 15 राज्यों को घाटा हुआ.

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 देश के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) के संजय मूर्ति द्वारा जारी ‘राज्य वित्त 2024-25’ की रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2024-25 (FY25) में देश के 13 राज्यों ने बजट में मुनाफा दर्ज किया है. वहीं, दूसरी ओर 15 राज्यों को इस दौरान भारी घाटे का सामना करना पड़ा है.

किस राज्य का कैसा रहा प्रदर्शन?
रिपोर्ट के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड और मणिपुर उन 13 भाग्यशाली राज्यों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी कमाई से कम खर्च कर फायदा कमाया. इस साल कुल 18 राज्यों ने मुनाफे का लक्ष्य रखा था, लेकिन उनमें से केवल 9 राज्य ही इसे पूरा कर पाए.

असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम और तेलंगाना जैसे बड़े राज्य मुनाफे का लक्ष्य रखने के बावजूद घाटे में चले गए.

‘जीरो-घाटा’ लक्ष्य वाले राज्यों का हाल
देश के 7 राज्यों (गोवा, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश) ने तय किया था कि वे न तो घाटे में रहेंगे और न ही मुनाफे में (जीरो-राजस्व घाटा). इनमें से उत्तर प्रदेश, झारखंड, गोवा और त्रिपुरा ने उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और मुनाफे वाले राज्यों की सूची में जगह बना ली. इसके विपरीत, पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु अपना लक्ष्य पूरा नहीं कर सके और घाटे में रहे.

सभी 28 राज्य कर्ज के बोझ तले दबे
सीएजी की रिपोर्ट एक और चिंताजनक बात सामने लाती है. भले ही कुछ राज्यों ने रोजमर्रा के खर्चों में मुनाफा कमाया हो, लेकिन विकास कार्यों और बुनियादी ढांचे पर खर्च के कारण देश के सभी 28 राज्य राजकोषीय घाटे में हैं. 31 मार्च 2025 तक सभी राज्यों पर कुल कर्ज बढ़कर 90.51 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है. 15वें वित्त आयोग ने राज्यों के लिए घाटे की सीमा 3 प्रतिशत तय की थी, लेकिन 18 राज्यों ने इस लक्ष्मण रेखा को पार कर दिया है.

कमाई और खर्च का गणित
इस वित्तीय वर्ष में सभी 28 राज्यों की कुल कमाई 40.52 लाख करोड़ रुपये रही, जबकि उनका कुल खर्च 51.20 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. राज्यों की कुल कमाई में 50 प्रतिशत हिस्सा उनके खुद के टैक्स से आया, जिसमें ‘स्टेट जीएसटी’ (SGST) की हिस्सेदारी 43 प्रतिशत से अधिक रही.

रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्यों की कमाई का 43 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा केवल सरकारी कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और पुराने कर्ज का ब्याज चुकाने में ही चला जाता है. नगालैंड में यह खर्च सबसे ज्यादा (74%) और महाराष्ट्र में सबसे कम (29%) देखा गया.

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