Thursday, June 18, 2026

चीन की एक टीम ने एक मरीज में सुअर की किडनी और लिवर ट्रांसप्लांट किया है, जिसकी ब्रेन डेथ हो गई थी. यह दुनिया में…

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ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन रिसर्च में एक बड़ी कामयाबी में मिली है. चीनी वैज्ञानिकों ने एक ब्रेन-डेड इंसानी मरीज में सुअर का लिवर और दोनों किडनी सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट कर दी हैं, जो दुनिया का पहला मल्टी-ऑर्गन सुअर से इंसान में ट्रांसप्लांट है, द साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने यह जानकारी दी है.

रिपोर्ट के मुताबिक, यह एक्सपेरिमेंटल प्रोसीजर एक 53 साल के आदमी पर किया गया था, जिसे ब्रेन-डेड घोषित कर दिया गया था. सर्जरी के दौरान, डॉक्टरों ने मरीज का ओरिजिनल लिवर और किडनी निकालकर उसकी जगह सुअर से लिए गए जेनेटिकली मॉडिफाइड ऑर्गन लगाए. ट्रांसप्लांट किए गए ऑर्गन को उनकी नेचुरल एनाटॉमिकल जगहों पर लगाया गया, इस प्रोसेस को ऑर्थोटोपिक ट्रांसप्लांटेशन कहते हैं.

कुछ घंटों बाद ही अंग काम करने लगे
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि ऑपरेशन के कुछ ही समय बाद मरीज के शरीर में सुअर के अंग काम करने लगे. लिवर और किडनी लगभग पांच दिनों तक काम करते रहे, जिसके बाद मरीज के परिवार की इच्छा के अनुसार इस स्टडी को स्वेच्छा से समाप्त कर दिया गया. चीन की गुआंग्शी मेडिकल यूनिवर्सिटी के दूसरे एफिलिएटेड हॉस्पिटल के वैज्ञानिकों की अगुवाई वाली रिसर्च टीम ने इस प्रक्रिया को डोनर अंगों की वैश्विक कमी को दूर करने की दिशा में एक अहम कदम बताया है. उनकी रिसर्च के नतीजे 29 मई को पीयर-रिव्यू वाले मेडिकल जर्नल ‘Med’ में प्रकाशित हुए थे.

क्या कहता है रिसर्च?
इंसानी शरीर के साथ बेहतर तालमेल बिठाने के लिए, ट्रांसप्लांट से पहले डोनर सुअर में जेनेटिक बदलाव किए गए. रिसर्चर्स ने सुअर के उन तीन जीन्स को हटा दिया जो इम्यून रिजेक्शन (शरीर द्वारा अंग को अस्वीकार करने) से जुड़े थे और और उनकी जगह इंसानों के तीन ऐसे जीन्स डाले जो खून का थक्का जमने से रोकते हैं और शरीर द्वारा ऑर्गन को स्वीकार किए जाने की संभावना बढ़ाते हैं.

जीनोट्रांसप्लांटेशन (जानवरों से इंसानों में अंगों या टिश्यू का ट्रांसप्लांट) एक उम्मीद जगाने वाला फील्ड बनकर उभरा है क्योंकि दुनिया भर में डोनर ऑर्गन की मांग उनकी सप्लाई से अधिक होती जा रही है. हर साल हजारों मरीज सही ऑर्गन डोनर का इंतजार करते हुए अपनी जान गंवा देते हैं.

एक्सपेरिमेंट के लिए सूअर सबसे पसंदीदा जानवर क्यों?
ऐसे प्रयोगों के लिए सुअर एक पसंदीदा जानवर बन गया है. ऐसा इसलिए है क्योंकि उनके अंगों का आकार और काम करने का तरीका इंसानी अंगों से बहुत मिलता-जुलता है. सुअर के अंदरूनी अंग (जैसे दिल, किडनी और लिवर) आकार, वजन और काम करने के तरीके में इंसानी अंगों के बहुत करीब होते हैं. खासकर, सुअर के दिल की बनावट और उसके ब्लड-पंपिंग सिस्टम इंसानी दिल से बहुत मिलते-जुलते हैं.

हालांकि, जेनोट्रांसप्लांटेशन (जानवरों के अंगों को इंसानों में ट्रांसप्लांट करना) पर पहले हुई ज्यादातर अध्ययनों में एक समय में एक ही अंग के ट्रांसप्लांट पर ध्यान दिया गया है, लेकिन मल्टी-ऑर्गन जेनोट्रांसप्लांटेशन मेडिकल साइंस के लिए एक बहुत ही मुश्किल चुनौती पेश करता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि इससे इम्यून रिजेक्शन का खतरा बढ़ जाता है और प्रत्यारोपित अंगों के बीच जटिल शारीरिक प्रतिक्रियाएं होती हैं.

अभी भी कई चुनौतियां हैं?
रिसर्च करने वालों का कहना है कि इस एक्सपेरिमेंट से शुरुआती सबूत मिलते हैं कि भविष्य में कई जरूरी अंगों के फेल होने से जूझ रहे मरीजों के लिए सुअर से इंसान में कई अंगों का ट्रांसप्लांट एक कारगर विकल्प बन सकता है. हालांकि, जीवित मरीजों पर ऐसी प्रक्रियाएं करने से जुड़ी कई बड़ी चुनौतियां अभी भी हैं, जैसे कि अंग के लंबे समय तक काम करते रहने को सुनिश्चित करना, इम्यून सिस्टम की अनुकूलता और सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं.

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