शेयर बाजार में कदम रखने की तैयारी कर रहे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म ‘ज़ेप्टो’ ने नियामक संस्था सेबी (SEBI) के पास अपने अपडेटेड ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोस्पेक्टस (UDRHP) में एक बड़ा खुलासा किया है. कंपनी के आईपीओ दस्तावेजों के अनुसार, प्रवर्तन निदेशालय ने फॉरेन एक्सचेंज मैनेजमेंट एक्ट (FEMA), 1999 के तहत ज़ेप्टो के संस्थापकों—आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा को समन जारी किया है.
यह खुलासा कंपनी के आगामी सार्वजनिक निर्गम से ठीक पहले ‘जोखिम कारकों’ की सूची में शामिल किया गया है.
वित्तीय रिकॉर्ड और बिजनेस मॉडल की जांच
अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर्स के मुताबिक, केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने 8 अप्रैल 2026 को दोनों संस्थापकों को समन भेजकर व्यक्तिगत रूप से पेश होने और कंपनी के कामकाज व उनकी निजी हिस्सेदारी से जुड़ी जानकारियां सौंपने का निर्देश दिया था.
जांच एजेंसी ने कंपनी के शुरुआती दौर यानी वित्त वर्ष 2020-21 (FY21) से लेकर अब तक के ऑडिटेड वित्तीय विवरण, विदेशी निवेश, शेयरहोल्डिंग पैटर्न, अचल संपत्तियों के विवरण, दिए गए लोन और गारंटी, इनकम टैक्स रिटर्न, बैंक खातों की जानकारी और ज़ेप्टो के पूरे बिजनेस मॉडल पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी.
संस्थापकों ने दर्ज कराए बयान
नियामक फाइलिंग में स्पष्ट किया गया है कि दोनों सह-संस्थापक जांच में पूरी तरह सहयोग कर रहे हैं. सह-संस्थापक कैवल्य वोहरा 17 और 22 अप्रैल को ईडी के समक्ष पेश हुए, जबकि मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) आदित पालिचा ने 20 अप्रैल और 15 मई को एजेंसी के सामने हाजिर होकर अपने बयान दर्ज कराए.
कंपनी ने बताया कि उन्होंने ईडी को कंपनी की होल्डिंग संरचना, व्यापारिक समझौतों और इनवॉइस सहित सभी आवश्यक सहायक दस्तावेज सौंप दिए हैं. ज़ेप्टो के अनुसार, “दस्तावेज जमा करने के बाद से कंपनी को ईडी की तरफ से कोई अन्य नया नोटिस या संचार प्राप्त नहीं हुआ है.”
निवेशकों को आगाह, IPO योजनाएं बरकरार
हालांकि, ज़ेप्टो ने निवेशकों को सतर्क करते हुए कहा है कि वह भविष्य में इस मामले के आगे बढ़ने, कानूनी कार्रवाई या किसी भी प्रकार के जुर्माने की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं कर सकती है.
इस कानूनी अड़चन के बावजूद ज़ेप्टो के आईपीओ पर कोई ब्रेक नहीं लगा है. सेबी ने मई में ही कंपनी के आईपीओ प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी. कंपनी इस सार्वजनिक निर्गम के जरिए करीब ₹8,000 करोड़ के नए इक्विटी शेयर जारी करने की योजना पर काम कर रही है. इस राशि का उपयोग देश भर में डार्क स्टोर्स नेटवर्क का विस्तार करने, क्लाउड इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और मार्केटिंग गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा.


