बहुत ज्यादा गर्मी डायबिटीज के मरीजों के लिए काफी खतरनाक साबित हो सकती है. ऐसा इसलिए है क्योंकि डायबिटीज वाले लोगों में डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) ज्यादा तेजी से होता है, ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने पर किडनी को ज्यादा ग्लूकोज बाहर निकालना पड़ता है, जिससे बार-बार पेशाब आता है और शरीर में पानी का लेवल तेजी से कम हो जाता है. कुछ आम दवाएं, जैसे कि ड्यूरेटिक्स (‘वॉटर पिल्स’ जो हाई ब्लड प्रेशर के लिए दी जाती हैं) भी इन लोगों में डिहाइड्रेशन की वजह बन सकती हैं.
इसके अलावा, CDC का कहना है कि डायबिटीज उन नसों को नुकसान पहुंचा सकती है जो पसीने की ग्रंथियों को कंट्रोल करती हैं. नतीजतन, शरीर शायद जरूरत के हिसाब से पसीना न बना पाए या अपने अंदरूनी तापमान को ठीक से कंट्रोल न कर पाए. इस स्थिति को ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी कहते हैं. पसीना न आने से शरीर का नेचुरल कूलिंग सिस्टम (भाप बनना) बिगड़ जाता है, जिससे हीटस्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है. इसके उलट, कुछ मरीजों को ठीक विपरित समस्या होती है, जैसे कि खाना खाते समय चेहरे या गर्दन पर बहुत ज्यादा पसीना आना. डायबिटीज से ग्रस्त कुछ मरीजों में लंबे समय तक ब्लड शुगर का स्तर ऊंचा रहने के कारण नसों को नुकसान पहुंचता है, जिससे यह समस्या, जिसे डायबिटिक गस्टेटरी स्वेटिंग कहते हैं, उत्पन्न हो सकती है.
आम हालात में, जब आस-पास का तापमान बढ़ता है, तो त्वचा के नीचे मौजूद खून की नसें फैल जाती हैं. इससे त्वचा की सतह के पास खून का बहाव बढ़ जाता है, जिससे शरीर की गर्मी पसीने और भाप के जरिए बाहर निकल पाती है. लेकिन, जब हवा में गर्मी या नमी का लेवल बहुत ज्यादा होता है, तो हवा पसीने को सोख नहीं पाती. नतीजतन, शरीर का तापमान कम नहीं हो पाता और गर्मी शरीर के अंदर ही फंसी रह जाती है. इसके चलते, दिल को खून पंप करने और शरीर का तापमान ठंडा बनाए रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, इससे कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) का लेवल बढ़ जाता है, जो सीधे तौर पर ब्लड शुगर का लेवल बढ़ने की वजह बनता है.
बहुत ज्यादा गर्मी के मौसम में, एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि आप अपना ब्लड शुगर अधिक-से अधिक बार चेक करें, ताकि इस मौसम में भी यह आपकी टारगेट रेंज में रहे. इस मौसम में आपके ब्लड शगुर को कंट्रोल में रखने के लिए इन टिप्स को जरूर फॉलो करें…
- भले ही आपको प्यास न लगी हो, फिर भी डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खूब पानी पिएं
- शराब और कैफीन वाले ड्रिंक्स से बचें, जैसे कॉफी, सोडा, और एनर्जी या स्पोर्ट्स ड्रिंक्स. इनसे शरीर में पानी की कमी हो सकती है और आपके ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है.
- जब आप कोई एक्टिविटी कर रहे हों, तो उससे पहले, उसके दौरान और बाद में अपना ब्लड शुगर चेक करें, आपको अपने इंसुलिन डोज को एडजस्ट करने की जरूरत पड़ सकती है.
- ढीले-ढाले, हल्के और हल्के रंग के कपड़े पहनें.
- जब आप बाहर हों तो सनस्क्रीन और टोपी पहनें. सनबर्न से आपके ब्लड शुगर का लेवल बढ़ सकता है.
- चाहे आप बीच पर हों या पूल के पास, नंगे पैर न चलें.
- ठंडा रहने के लिए, अपना एयर कंडीशनर इस्तेमाल करें या किसी एयर-कंडीशन्ड बिल्डिंग या मॉल में जाएं. बहुत ज्यादा गर्मी में, कमरे का पंखा आपको पूरी तरह ठंडा नहीं कर पाएगा.
क्या आप जानते हैं कि गर्मी का असर और किस चीजों पर पड़ता है?
गर्मी डायबिटीज की दवाओं, सप्लाई और इक्विपमेंट पर भी असर डालती है. इंसुलिन या ओरल डायबिटीज की दवाओं को सीधी धूप में या गर्म कार के अंदर न रखें. पैकेजिंग पर दी गई जानकारी देखें ताकि आप समझ सकें कि ज्यादा तापमान इंसुलिन और दूसरी दवाओं पर कैसे असर डाल सकता है. अगर आप ट्रैवल कर रहे हैं, तो अपनी इंसुलिन और दूसरी दवाएं कूलर में रखें. इंसुलिन को सीधे बर्फ या जेल पैक पर न रखें.
गर्मियों में डायबिटीज में किन लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए?
(हाइपरग्लाइसीमिया) हाई ब्लड शुगर वाले लोगों को गर्मियों में डिहाइड्रेशन का खतरा ज्यादा होता है. टाइप 2 डायबिटीज में डिहाइड्रेशन के लक्षणों में शामिल हैं…
- थकान
- पेशाब कम आना
- प्यास ज्यादा लगना
- सिर चकराना
- मुंह और आंखें सूखना
- डिहाइड्रेशन से ब्लड शुगर लेवल बढ़ने पर पेशाब ज्यादा भी आ सकता है, जिससे डिहाइड्रेशन की समस्या और बढ़ जाती है.
- लगातार थकान होना
हीट एग्जॉशन के इन लक्षणों पर नजर रखें
- लो ब्लड प्रेशर
- बेहोशी महसूस होना
- बहुत ज्यादा पसीना आना
- चक्कर आना
- मतली आना
- हीट एग्जॉशन को हीट स्ट्रोक में बदलने से रोकने के लिए तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है. हीट स्ट्रोक जानलेवा हो सकता है.
हाइपोग्लाइसीमिया
गर्मियों में शरीर का मेटाबॉलिज्म ज्यादा एक्टिव होता है, जिससे इंसुलिन ज्यादा एब्जॉर्प्शन हो सकता है. डायबिटीज वाले व्यक्ति में, इससे शुगर लेवल असामान्य रूप से कम हो सकता है. 70 mg/dL से कम शुगर लेवल को हाइपोग्लाइसीमिया माना जाता है और इससे ये लक्षण हो सकते हैं:
- कन्फ्यूजन
- धुंधली नजर
- चिंता
- दिल की धड़कन बढ़ना
- कंपकंपी
- गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया में, व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है. इसलिए, लो ब्लड शुगर के लक्षणों को पहचानना और बैलेंस ठीक करने के लिए तुरंत एक्शन लेना सबसे जरूरी है.


