Saturday, May 30, 2026

धनबाद में मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यसभा चुनाव, भाषा नियमावली और प्रदेश कांग्रेस में अंदरूनी कलह पर बयान दिया है.

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धनबाद: कोयलांचल दौरे पर पहुंचे झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने राज्यसभा चुनाव, कांग्रेस संगठन और भाषा नियमावली से जुड़े मुद्दों पर बयान दिया है. धनबाद सर्किट हाउस में मीडिया से बातचीत करते हुए मंत्री ने भाजपा पर राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक खरीद-फरोख्त की कोशिश करने का आरोप लगाया. साथ ही उन्होंने प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के साथ किसी भी व्यक्तिगत मतभेद से इनकार किया और कहा कि उनके विचारों का अंतर केवल नीतिगत मुद्दों तक सीमित है.

भाजपा करना चाहती है जोड़-तोड़ की राजनीतिः वित्त मंत्री

राज्यसभा चुनाव की चर्चा करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि भाजपा के पास जीत के लिए आवश्यक संख्या बल नहीं है. इसके बावजूद उम्मीदवार उतारने की तैयारी यह संकेत देती है कि पार्टी चुनाव को प्रभावित करने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति का सहारा लेना चाहती है. उन्होंने कहा कि महागठबंधन पूरी तरह मजबूत स्थिति में है और उसके पास पर्याप्त विधायकों का समर्थन मौजूद है.

झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने बताया कि झामुमो, कांग्रेस, राजद और वाम दलों सहित महागठबंधन के पास कुल 56 विधायकों का समर्थन है. राज्यसभा की एक सीट के लिए 28 मतों की आवश्यकता होती है, ऐसे में गठबंधन की स्थिति मजबूत है. उन्होंने यह भी कहा कि कांग्रेस राज्यसभा चुनाव में अपना प्रत्याशी उतारेगी. हालांकि अंतिम फैसला पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व करेगा.

कांग्रेस में अंदरुनी कलह पर दिया ये बयान

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के साथ कथित खींचतान के सवाल पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से कोई विवाद नहीं है. उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में नीतिगत मतभेद स्वाभाविक हैं और उनका विरोध केवल पार्टी की कुछ नीतियों को लेकर रहा है.

“भाषा नियमावली में त्रुटियों को दूर करने की जरूरत”

भाषा नियमावली को लेकर जारी बहस पर वित्त मंत्री ने कहा कि इसे विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए. उनके अनुसार नियमावली में कुछ त्रुटियां रह गई हैं, जिन्हें दूर करने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्चस्तरीय समिति गठित की है. समिति की बैठक तीन जून को प्रस्तावित है, जिसमें विभिन्न पहलुओं पर विचार किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि झारखंड के बिहार से सटे कई इलाकों में भोजपुरी, मैथिली और अंगिका जैसी भाषाएं व्यापक रूप से बोली जाती हैं. ऐसे में इन भाषाओं को भी उचित सम्मान और स्थान मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि जनजातीय भाषाओं के संरक्षण और सम्मान पर सभी सहमत हैं, लेकिन जिन क्षेत्रों में किसी विशेष भाषा का प्रचलन नहीं है, वहां उसे अनिवार्य बनाना व्यावहारिक नहीं माना जा सकता. इस संबंध में नियमावली में आवश्यक संशोधन पर विचार किया जाना चाहिए.

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