नई दिल्ली: भारत में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और सोने-चांदी पर आयात शुल्क बढ़ने से जून 2026 तक खुदरा महंगाई बढ़कर 5 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. हालांकि, अर्थशास्त्रियों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ब्याज दरों को बढ़ाने में जल्दबाजी नहीं करेगा. आरबीआई मौद्रिक नीति में बदलाव करने से पहले कम से कम एक तिमाही तक ईंधन की बढ़ी कीमतों के असर का आकलन करेगा.
- लगातार बढ़े ईंधन के दाम
- 15 मई से शुरू हुए 11 दिनों के भीतर देश में पेट्रोल की कीमतों में ₹7.38 प्रति लीटर और डीजल में ₹7.48 प्रति लीटर की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इस वृद्धि का सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ेगा जहां ईंधन का उपयोग मुख्य इनपुट के रूप में होता है, जैसे- परिवहन, लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और बिजली. इसके अतिरिक्त, सरकार ने गैर-जरूरी आयात को रोकने के लिए 13 मई को सोने और चांदी पर आयात शुल्क बढ़ाकर 15 प्रतिशत कर दिया था, जिससे महंगाई का दबाव और बढ़ गया है.
- अर्थशास्त्रियों का अनुमान
- ईवाई इंडिया (EY India): मुख्य नीति सलाहकार डी.के. श्रीवास्तव के अनुसार, ईंधन कीमतों में औसतन ₹7.5 प्रति लीटर की वृद्धि से खुदरा महंगाई में 0.75% (75 बेसिस पॉइंट) का इजाफा होगा. मई में महंगाई दर 4 से 4.5% और जून में 4.5 से 5% के दायरे में रह सकती है. मई महीने के महंगाई आंकड़े 12 जून को जारी होंगे.
- बार्कलेज इंडिया (Barclays India): मुख्य अर्थशास्त्री आस्था गुडवानी का कहना है कि वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत $85 से बढ़कर $95 प्रति बैरल हो गई है. इसके चलते आरबीआई वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने महंगाई अनुमान को 4.6% से बढ़ाकर 5% कर सकता है, जबकि विकास दर का अनुमान 6.9% से घटाकर 6.7% किया जा सकता है.
- इक्रा (ICRA) और क्रिसिल (CRISIL): इक्रा की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर और क्रिसिल की दीप्ति देशपांडे ने भी चालू वित्त वर्ष के लिए बेसलाइन खुदरा महंगाई 5% से 5.1% रहने का अनुमान जताया है.
- RBI की नीति पर क्या होगा असर?
- अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, आगामी 5 जून को होने वाली मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में आरबीआई ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं करेगा और ‘न्यूट्रल पॉज’ की स्थिति बनाए रखेगा. चूंकि यह महंगाई मुख्य रूप से आपूर्ति पक्ष की दिक्कतों और इनपुट कॉस्ट बढ़ने के कारण है, इसलिए रीपो रेट में तुरंत बढ़ोतरी करने से इसे रोकना मुश्किल होगा.
आरबीआई को महंगाई दर 4% (2% ऊपर या नीचे के दायरे के साथ) रखने का जनादेश है. जून में महंगाई 5% तक पहुंचने के बावजूद यह आरबीआई के अधिकतम 6% के दायरे के भीतर ही रहेगी. हालांकि, अगर त्योहारों के सीजन (H2 FY27) में परिवहन और माल ढुलाई महंगी होने से दूसरी चीजों के दाम भी अनियंत्रित होते हैं, तो आरबीआई साल के उत्तरार्ध (दिसंबर के आसपास) में ब्याज दरें बढ़ाने पर मजबूर हो सकता है.


