भारत और कनाडा के बीच लंबे समय से ठंडे बस्ते में पड़े मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर एक बेहद सकारात्मक यू-टर्न सामने आया है. दोनों देशों ने आपसी रणनीतिक संबंधों को तेजी से रीसेट करते हुए घोषणा की है कि वे इस साल के अंत तक ‘व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते’ (CEPA) को अंतिम रूप दे देंगे. इस एतिहासिक फैसले से न केवल दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी, बल्कि वैश्विक कूटनीति के समीकरण भी बदलेंगे.
कनाडा के नवनियुक्त प्रधानमंत्री मार्क कार्नी और भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के बीच ओटावा में हुई उच्च स्तरीय बैठक के बाद इस बात की आधिकारिक पुष्टि की गई. प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने सोशल मीडिया पर इस वार्ता को बेहद सफल बताते हुए लिखा, “भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर चल रही बातचीत कनाडाई श्रमिकों और व्यवसायों के लिए एक ‘गेम चेंजर’ साबित होगी. इससे हमारे लिए एक बहुत बड़ा नया बाजार खुलेगा.”
द्विपक्षीय सहयोग के नए स्तंभ
कनाडाई पीएम कार्नी के अनुसार, दोनों देशों ने अब तक हुई वार्ताओं की प्रगति की समीक्षा की है और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई है. इस समझौते के तहत मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है:
ऊर्जा और नागरिक परमाणु सहयोग: भारत के बढ़ते ऊर्जा बाजार को देखते हुए स्वच्छ ऊर्जा और कनाडाई यूरेनियम की आपूर्ति इस साझेदारी का मुख्य केंद्र है.
कृषि, खाद्य सुरक्षा और एग्री-टेक: दोनों देश खाद्य सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कृषि तकनीकों का आदान-प्रदान करेंगे.
प्रौद्योगिकी और शिक्षा: उच्च शिक्षा के क्षेत्रों में छात्र गतिशीलता और नई तकनीकों (जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पर मिलकर काम किया जाएगा.
ऐतिहासिक व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल
इस ऐतिहासिक रीसेट को जमीन पर उतारने के लिए भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल एक विशाल व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ ओटावा पहुंचे हैं. कनाडाई अधिकारियों के अनुसार, यह कनाडा का दौरा करने वाला अब तक का सबसे बड़ा भारतीय व्यावसायिक प्रतिनिधिमंडल है. पीयूष गोयल ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कनाडाई पीएम ने दोनों देशों के वार्ताकारों को इस साल के अंत तक या उससे पहले एक व्यापक दृष्टिकोण के साथ इस मुक्त व्यापार समझौते को पूरा करने का काम सौंपा है.” उन्होंने आगे कहा कि हमारा लक्ष्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार में भारी बढ़ोतरी दर्ज करना है.
अमेरिका पर निर्भरता कम करने की रणनीति
कनाडा के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने संयुक्त प्रेस वार्ता में कहा कि कनाडा अपनी अर्थव्यवस्था को विविधता देना चाहता है और अमेरिका से इतर लगभग 300 अरब डॉलर के अतिरिक्त निर्यात बाजारों को अनलॉक करना चाहता है. भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक है, इसलिए नई दिल्ली के साथ संबंध मजबूत करना कनाडाई लोगों के आर्थिक भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस समझौते के पूरा होने से भारतीय फार्मास्युटिकल्स, टेक्सटाइल और आईटी पेशेवरों के लिए कनाडा के दरवाजे आसान होंगे, वहीं कनाडाई निवेशकों को भारत के बुनियादी ढांचे में निवेश के बड़े अवसर मिलेंगे. दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता के अगले चरण की बैठक जुलाई 2026 में ओटावा में आयोजित की जाएगी.


