Monday, May 25, 2026

कच्चे तेल के $100 से नीचे गिरने पर सेंसेक्स और निफ्टी में 1% से अधिक का जोरदार उछाल दर्ज किया गया.

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मुंबई: सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में शुरुआती कारोबार के दौरान जबरदस्त तेजी देखी गई. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी गिरावट के बाद घरेलू बेंचमार्क सूचकांक बीएसई सेंसेक्स और एनएसई निफ्टी 50 1% से अधिक उछल गए. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत दो सप्ताह से अधिक समय में पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गई है. इस खबर से निवेशकों की धारणा को बड़ा बल मिला, जिससे बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली.

शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 874 अंक (1.15%) की बढ़त के साथ 76,289 के इंट्राडे हाई पर पहुंच गया. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 264 अंक (1.11%) मजबूत होकर 23,983 के स्तर को छू गया.

कच्चे तेल में गिरावट की मुख्य वजह
ऊर्जा बाजार में इस बड़ी गिरावट का मुख्य कारण अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को कूटनीतिक तरीके से सुलझाने की बढ़ती उम्मीदें हैं. बाजार विश्लेषकों के अनुसार, दोनों देशों के बीच एक संभावित समझौते की खबरों से यह उम्मीद जगी है कि दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्ग, यानी हॉर्मुज जलडमरूमध्य जल्द ही पूरी तरह से खुल जाएगा. इसी सकारात्मक रुख के चलते वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 5% से अधिक टूटकर 97–98 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड वायदा 91 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था.

भारत के लिए राहत और सेक्टर्स का हाल
भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक कच्चा तेल आयात करता है. तेल की कीमतों में कमी आने से देश में मुद्रास्फीति का दबाव कम होता है, कॉर्पोरेट मार्जिन में सुधार होता है और भारतीय रुपये को मजबूती मिलती है.

ऑटो और बैंकिंग चमके
ईंधन और कच्चे माल की लागत घटने की उम्मीद में निफ्टी ऑटो इंडेक्स 2% से अधिक बढ़ गया. बैंकिंग सेक्टर में भी जोरदार लिवाली रही, जिससे निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी प्राइवेट बैंक 1% तक चढ़ गए. इसके अलावा रियल्टी, सीमेंट और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में भी अच्छी बढ़त रही.

इन शेयरों को हुआ नुकसान
तेल की कीमतें घटने से अपस्ट्रीम तेल उत्पादक कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ता है. यही वजह रही कि ओएनजीसी (ONGC) और कमोडिटी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी हिंडाल्को इंडस्ट्रीज के शेयरों में करीब 2% की गिरावट दर्ज की गई.

आगे के लिए मुख्य संकेत
हालांकि बाजार ने शुरुआती सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है, लेकिन निवेशकों को अमेरिकी प्रशासन के अगले कदमों पर नजर रखनी होगी. जब तक औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर नहीं हो जाते, तब तक हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर आंशिक प्रतिबंध जारी रहने की आशंका है. इसके साथ ही, कच्चे तेल में यह गिरावट विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली को रोककर उन्हें भारतीय बाजार में वापस ला सकती है, जिससे बाजार की यह तेजी आगे भी बनी रह सकती है.

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