Friday, May 15, 2026

एक्सपर्ट्स ने लोगों को सलाह दी कि केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च करें, जहां संभव हो बचत को प्राथमिकता दें.

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नई दिल्लीः महंगाई के आंकड़े एक बार फिर तेजी से बढ़ने के संकेत दे रहे हैं. थोक महंगाई (Wholesale inflation) बड़ी तेजी से दहाई के आंकड़े की ओर बढ़ रही है, जबकि खुदरा महंगाई (Retail inflation) भारतीय रिजर्व बैंक की तय सुरक्षित सीमा के बेहद करीब पहुंच रही है.

विशेषज्ञों के अनुसार, पश्चिम एशिया में चल रहे संकट का असर अब आर्थिक आंकड़ों में साफ दिखाई देने लगा है. कई जानकारों ने चेतावनी दी है कि सबसे बुरा दौर आना अभी बाकी है. उनका मानना है कि आने वाले महीने उपभोक्ताओं और कारोबारियों दोनों के लिए और भी चिंताजनक तस्वीर पेश कर सकते हैं.

विश्लेषकों का यह भी कहना है कि इसका असली असर दिवाली के आसपास दिखाई दे सकता है, जब इस साल की रबी फसल और आने वाले खरीफ सीजन की स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी. खाद्य आपूर्ति, ईंधन (फ्यूल) की कीमतों या आयात में कोई भी रुकावट विभिन्न क्षेत्रों में महंगाई के दबाव को और बढ़ा सकती है.

यह चिंता भी जताई जा रही है कि यदि महंगाई इसी तरह बढ़ती रही, तो भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में फिर से बढ़ोतरी करने के लिए मजबूर हो सकता है. इससे लोन महंगे हो जाएंगे और होम, व्हीकल और पर्सनल लोन की ईएमआई (EMI) बढ़ सकती है.

Wholesale Retail Inflation Rate

वैश्विक संकट का असर

ईटीवी भारत से बात करते हुए बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण कीमतों में जो बढ़ोतरी हो चुकी है, वह आने वाले महीनों में महंगाई के आंकड़ों में और तेजी से दिखाई देने लगेगी. यदि यहां से कीमतें आगे नहीं भी बढ़ती हैं, जिसकी संभावना वैसे बेहद कम है, तो भी मौजूदा कीमतों के दबाव के कारण इस वित्तीय वर्ष में महंगाई पिछले साल की तुलना में अधिक रहने की उम्मीद है.

उनके अनुसार, पहले यह उम्मीद जताई जा रही थी कि थोक महंगाई (WPI- Wholesale Price Index) 5.5 प्रतिशत के आसपास रहेगी, लेकिन अब संभावना है कि साल के दौरान यह और भी ऊपर जा सकती है. थोक महंगाई में यह बढ़ोतरी आगे चलकर खुदरा महंगाई (CPI- Consumer Price Index) में भी बदल सकती है.

इसका असर भले ही तुरंत न दिखे, लेकिन खाद की बढ़ती लागत से खाद्य पदार्थों की कीमतें बढ़ने की आशंका है. इसके साथ ही, कच्चे माल और मैन्युफैक्चरिंग की बढ़ती लागत के कारण घरेलू सामान भी महंगे हो सकते हैं.

एक दर्जन से अधिक राज्यों में महंगाई राष्ट्रीय औसत से ऊपर

राज्य / केंद्र शासित प्रदेश (State/UT)महंगाई दर (% में) (Inflation % )
तेलंगाना (Telangana)5.81
पुडुचेरी (Puducherry)4.41
आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh)4.20
तमिलनाडु (Tamil Nadu)4.18
सिक्किम (Sikkim)4.16
कर्नाटक (Karnataka)4.0
केरल (Kerala)3.77
राजस्थान (Rajasthan)3.77
हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh)3.67
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)3.67
उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)3.59
चंडीगढ़ (Chandigarh)3.52
उत्तराखंड (Uttarakhand)3.50

आने वाले दिनों में बढ़ सकती है महंगाई

मदन सबनवीस का यह भी मानना है कि इसका असर अगले तीन से चार महीनों में और अधिक दिखाई दे सकता है, जिससे खुदरा महंगाई में और बढ़ोतरी होगी. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस बात की उम्मीदें लगातार बढ़ रही हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक इस साल के अंत में ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी कर सकता है.

उन्होंने आगे कहा कि हालांकि ऐसा कदम जून या अगस्त की नीतिगत समीक्षा बैठकों में नहीं उठाया जाएगा, लेकिन मुझे लगता है कि यह संभावना दिवाली के आसपास, यानी अक्टूबर या दिसंबर की मौद्रिक नीति समीक्षा (Monetary policy review) के दौरान बन सकती है. तब तक पश्चिम एशिया के संघर्ष, कच्चे तेल (Crude oil) की कीमतों और खरीफ फसल के उत्पादन को लेकर स्थिति काफी हद तक साफ हो जाएगी.

उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा कि यदि पश्चिम एशिया का संकट जारी रहता है, कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है और फसलों का उत्पादन कमजोर होता है, तो महंगाई का दबाव और भी गंभीर हो सकता है. सबसे बुरा दौर शायद अभी शुरू ही हुआ है, और स्थिति को पूरी तरह स्थिर होने में काफी समय लग सकता है.

Wholesale Retail Inflation Rate

थोक महंगाई दर: मार्च बनाम अप्रैल 2026 (सालाना आधार पर % में)

मुख्य श्रेणियां (Major Groups)मार्च-26 (P)अप्रैल-26 (P)
सभी वस्तुएं (All Commodities)3.888.30
प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles)6.369.17
ईंधन और बिजली (Fuel & Power)1.0524.71
निर्मित उत्पाद (Manufactured Products)3.394.62
खाद्य सूचकांक (Food Index)1.852.31

थोक महंगाई

थोक मूल्य सूचकांक (WPI) पर आधारित महंगाई दर मार्च के 3.88 प्रतिशत से तेजी से बढ़कर अप्रैल में 8.30 प्रतिशत पर पहुंच गई है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से ईंधन, बिजली और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण हुई है. ईंधन और बिजली क्षेत्र में महंगाई उछलकर 24.71 प्रतिशत हो गई, जबकि कच्चे तेल की महंगाई दर छलांग लगाकर 88.06 प्रतिशत पर पहुंच गई.

खाद्य पदार्थों की महंगाई में 1.98 प्रतिशत की मामूली बढ़ोतरी देखी गई, जबकि गैर-खाद्य उत्पाद बढ़कर 12.18 प्रतिशत हो गए. मंत्रालय ने कहा कि इस उछाल की बड़ी वजह मिनरल ऑयल, कच्चे तेल, गैस और बेस मेटल्स की बढ़ी हुई कीमतें थीं.

खुदरा महंगाई

पिछले साल अप्रैल 2025 की तुलना में, अप्रैल 2026 में अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) पर आधारित सालाना महंगाई दर 3.48 प्रतिशत रही. आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में महंगाई दर 3.74 प्रतिशत के साथ अधिक थी, जबकि शहरी क्षेत्रों में महंगाई अपेक्षाकृत कम यानी 3.16 प्रतिशत रही.

वहीं, उपभोक्ता खाद्य मूल्य सूचकांक (CFPI) द्वारा मापी गई खाद्य महंगाई इस महीने के दौरान 4.20 प्रतिशत दर्ज की गई. इसमें से ग्रामीण खाद्य महंगाई 4.26 प्रतिशत रही, जो शहरी क्षेत्रों के 4.10 प्रतिशत के आंकड़े से थोड़ी अधिक है. इसके अलावा, एक दर्जन से भी अधिक राज्यों में महंगाई का स्तर देश के औसत 3.48 प्रतिशत से ऊपर दर्ज किया गया.

प्रमुख श्रेणियों, उप-श्रेणियों और वस्तुओं के अनुसार कीमतों का रुझान (सालाना आधार पर % में)

प्रमुख वस्तुएं (Key Items)मार्च-26अप्रैल-26
गेहूं (Wheat)-4.600.38
आलू (Potato)-27.9430.04
प्याज (Onion)-42.11-26.45
खनिज (Minerals)3.2212.15
कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस (Crude Petroleum & Natural gas)35.9867.18
एलपीजी (LPG / रसोई गैस)-1.5410.92
पेट्रोल (Petrol)2.5032.40
हाई स्पीड डीजल (HSD / डीजल)3.2625.19
वनस्पति और पशु तेल, वसा (Vegetable & Animal Oils, Fats)1.674.43
कपड़ा / टेक्सटाइल (Textiles)4.917.30
रसायन और रासायनिक उत्पाद (Chemicals and Chemical Products)2.195.09
रबर और प्लास्टिक उत्पाद (Rubber and Plastics Products)1.002.15
सीमेंट, चूना और प्लास्टर (Cement, Lime and Plaster)1.072.38
बुनियादी धातुएं (Basic Metals)4.017.00

अनिश्चितता के लिए बचत करें

आम उपभोक्ताओं को महंगाई के इस बढ़ते दबाव से कैसे निपटना चाहिए, इस बारे में ईटीवी भारत से बात करते हुए उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ बेजोन मिश्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने लोगों को आने वाली चुनौतियों और वित्तीय प्रबंधन के प्रति सचेत करने के लिए बिल्कुल सही समय पर चेतावनी जारी की है.

उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को देखते हुए भारत पर इसका असर पड़ना तय है. उन्होंने कहा-“इस स्तर के वैश्विक घटनाक्रमों से भारत अछूता नहीं रह सकता.” उनके अनुसार, सरकार नागरिकों को अपने संसाधनों का समझदारी से उपयोग करने और स्थिति के अनुसार अपने खर्चों की योजना बनाने के लिए प्रोत्साहित करके उन्हें तैयार करने का प्रयास कर रही है.

बेजोन मिश्रा ने कहा कि महंगाई बढ़ने की आशंका तो है, लेकिन बड़ी चुनौती यह सीखने की है कि इसका जिम्मेदारी से सामना कैसे किया जाए. उन्होंने उपभोक्ताओं को सलाह दी कि वे केवल जरूरी चीजों पर ही खर्च करें और जहां भी संभव हो बचत को प्राथमिकता दें, ताकि परिवार किसी भी भविष्य की अनिश्चितता के लिए आर्थिक रूप से तैयार रहें.

उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह का वित्तीय अनुशासन न केवल परिवारों को व्यक्तिगत स्तर पर मदद करेगा, बल्कि मुश्किल समय में अनावश्यक उपभोग के दबाव को कम करके देश को भी आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाएगा.

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