मुंबई: भारतीय इक्विटी बाजारों में शुक्रवार को शुरुआती सत्र के दौरान भारी गिरावट दर्ज की गई. वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और चालू वित्त वर्ष की चौथी तिमाही (Q4) के नतीजों के बीच निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते दिखे.
बाजार की वर्तमान स्थिति
शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स लगभग 400 अंक या 0.51 प्रतिशत की गिरावट के साथ 77,263 के स्तर पर कारोबार कर रहा था. इसी प्रकार, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 50 भी 100 अंक या 0.41 प्रतिशत फिसलकर 24,118 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में इस ‘पैनिक सेलिंग’ का मुख्य कारण आईटी, वित्तीय और फार्मा शेयरों में आई कमजोरी को माना जा रहा है.
सेक्टोरल प्रदर्शन और प्रमुख स्टॉक्स
आज के सत्र में सबसे अधिक दबाव निफ्टी आईटी इंडेक्स पर देखा गया, जिसमें 1.57 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. दिग्गज आईटी कंपनियां जैसे TCS और इंफोसिस (Infosys) शुरुआती कारोबार में शीर्ष लैकर्स (गिरावट वाले शेयर) में शामिल रहीं. इसके अतिरिक्त:
फार्मा सेक्टर: निफ्टी फार्मा इंडेक्स 0.27 प्रतिशत नीचे रहा, जिसमें सिप्ला, सन फार्मा और डॉ. रेड्डीज जैसे शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया.
बैंकिंग क्षेत्र: निफ्टी प्राइवेट बैंक इंडेक्स में 0.31 प्रतिशत की गिरावट आई, जिसमें ICICI बैंक प्रमुख रूप से नीचे रहा.
सकारात्मक रुझान: बाजार की इस गिरावट के बावजूद FMCG और केमिकल शेयरों में खरीदारी की कुछ उम्मीदें दिखीं, जिससे बाजार को निचली सतह पर मामूली सहारा मिला.
गिरावट के प्रमुख कारक
कच्चे तेल में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 2 प्रतिशत बढ़कर 107 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं. ऊर्जा की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती पेश कर रही हैं.
विदेशी निवेशकों की निकासी: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की ओर से बिकवाली का सिलसिला जारी है. पिछले सत्र में FIIs ने लगभग 3,254 करोड़ रुपये के शेयर बेचे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने केवल 941 करोड़ रुपये की खरीदारी की.
वैश्विक प्रभाव: एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख रहा, लेकिन वैश्विक अनिश्चितता ने घरेलू निवेशकों के विश्वास को डगमगा दिया है.
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक निफ्टी 24,500 के स्तर को मजबूती से पार नहीं कर लेता, तब तक बाजार में स्थिरता आने की संभावना कम है. वर्तमान में निवेशकों को ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाने और केवल बुनियादी रूप से मजबूत शेयरों में ही निवेश करने की सलाह दी गई है


