Tuesday, May 5, 2026

भारतीय रेलवे ने 55,000 किलोमीटर ट्रैक बदलकर सुरक्षा बढ़ाई है, मशीनीकृत रखरखाव और मजबूत पटरियों से अब 80% नेटवर्क पर ट्रेनें 110 किमी/घंटा दौड़ेंगी.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय रेलवे अपने नेटवर्क को आधुनिक बनाने की दिशा में एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रही है. पिछले एक दशक में रेलवे ने सुरक्षा और गति को प्राथमिकता देते हुए लगभग 55,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक का नवीनीकरण किया है. इस बुनियादी ढांचे के सुधार ने न केवल ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाई है, बल्कि रेल दुर्घटनाओं की संभावना को भी न्यूनतम कर दिया है.

सुरक्षा में बड़ी उपलब्धि और तकनीक का संगम
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के एक लेख का हवाला देते हुए PMO ने बताया कि 2014 के बाद से ट्रैक के आधुनिकीकरण पर विशेष जोर दिया गया है. उन्नत परीक्षण और मशीनीकृत रखरखाव के कारण आज भारतीय रेल की ‘राइड क्वालिटी’ पहले से कहीं बेहतर हुई है. रेल मंत्री के अनुसार, ट्रैक और वेल्डिंग के फेल होने की घटनाओं में 90 प्रतिशत तक की कमी आई है, जो यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी जीत है.

आधुनिक ट्रैक की विशेषताएं
रेलवे ने अब तक लगभग 44,000 किलोमीटर लंबे रेल पैनल बिछाए हैं. लंबे रेल पैनल का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इनमें पटरियों के बीच जोड़ (Joints) कम होते हैं, जिससे ट्रेनें बिना झटके के स्मूथ चलती हैं. इसके साथ ही, देश में 80,000 किलोमीटर से अधिक ट्रैक पर अब 60-किलोग्राम वाले भारी और मजबूत रेल का उपयोग किया जा रहा है. ये पटरियां भारी मालगाड़ियों और हाई-स्पीड ट्रेनों का वजन सहने में सक्षम हैं.

बढ़ी ट्रेनों की रफ्तार और क्षमता
आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में भारतीय रेलवे का लगभग 80 प्रतिशत नेटवर्क 110 किमी प्रति घंटे या उससे अधिक की गति को संभालने के लिए तैयार है. ट्रैक की इस मजबूती के कारण अब ‘वंदे भारत’ जैसी आधुनिक ट्रेनें अपनी पूरी क्षमता से दौड़ पा रही हैं.

मशीनों से बढ़ी कार्यक्षमता
रेलवे ने मैन्युअल काम की जगह मशीनों पर भरोसा बढ़ाया है. 2014 में ट्रैक रखरखाव के लिए जहां केवल 748 मशीनें थीं, वहीं 2026 तक इनकी संख्या बढ़कर 1,785 हो गई है. ये मशीनें पटरियों की सफाई और घिसाई का काम इंसानों के मुकाबले कहीं अधिक सटीकता और तेजी से करती हैं.

भारतीय रेल की 1,37,000 किलोमीटर लंबी पटरियां देश की जीवनरेखा हैं, जिन पर रोजाना 2.5 करोड़ से ज्यादा लोग सफर करते हैं. PMO के अनुसार, पटरियों का यह रिन्यूअल केवल तकनीकी सुधार नहीं है, बल्कि बढ़ती पैसेंजर डिमांड और माल ढुलाई (Freight) की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है.

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