Friday, June 19, 2026

बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज के मामले इतनी तेजी से क्यों बढ़ रहे हैं?

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डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो आजकल सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर रही है. दुनिया भर में लाखों लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं, और मरीजों की संख्या हर साल लगातार बढ़ रही है. ऐसा नहीं है कि सिर्फ युवा और बुजुर्ग ही इससे प्रभावित हैं, बल्कि छोटे बच्चे भी आजकल टाइप 1 और टाइप 2, दोनों तरह की डायबिटीज से पीड़ित हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह रुझान पूरी दुनिया में देखा जा रहा है, और भारत में भी बच्चों में टाइप 2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं.

यह बढ़ता रुझान डॉक्टरों के बीच बढ़ती चिंता का कारण बन रहा है. लेकिन इसके पीछे वजह क्या है? बच्चों में ब्लड शुगर का लेवल क्यों बढ़ रहा है? इस रिपोर्ट में जानिए.

जानिए बच्चों को क्यों हो रहा टाइप 2 डायबिटीज
डॉ. सोहम तरफदार ने बताया कि पहले बच्चों में डायबिटीज का मतलब मुख्य रूप से टाइप 1 डायबिटीज होता था, लेकिन अब टाइप 2 डायबिटीज के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. यह बदलाव पिछले एक या दो दशकों में खास तौर पर साफ तौर पर देखने को मिला है. जो एक चिंता का विषय है.

डॉ. सोहम तरफदार के अनुसार, बच्चों में मुख्य रूप से दो तरह की डायबिटीज पाई जाती है: टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज. टाइप 1 डायबिटीज असल में एक ऑटोइम्यून बीमारी है जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम पैंक्रियास के बीटा सेल्स को खत्म कर देता है. नतीजतन, इंसुलिन बनना बंद हो जाता है. इस स्थिति में, फैमिली हिस्ट्री का असर काफी कम होता है. इसके उलट, टाइप 2 डायबिटीज सीधे तौर पर जेनेटिक वजहों के साथ-साथ लाइफस्टाइल से भी जुड़ी होती है. विशेष रूप से, मोटापा इस बीमारी के प्रमुख कारणों में से एक के रूप में उभर रहा है. डॉ. सोहम तरफदार के अनुसार, बच्चों की वर्तमान पीढ़ी के खान-पान की आदतों और जीवनशैली में बदलाव इस वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.

लाइफस्टाइल और खानपान है बड़ा फैक्टर
डॉ. सोहम तरफदार के अनुसार, फास्ट फूड का चलन, बहुत ज्यादा चीनी और ऑयली खाना और कोल्ड ड्रिंक्स का ज्यादा सेवन बच्चों के शरीर में फैट की मात्रा बढ़ा रहा है. पिज्जा, बर्गर, चॉप्स, स्नैक्स, आइसक्रीम, चॉकलेट जैसी चीजें अब आसानी से मिल जाती हैं और बच्चों की डाइट में इनकी मात्रा बढ़ गई है. इसके साथ ही, आर्टिफिशियल रंग और चीनी वाली ड्रिंक्स भी नुकसानदायक असर डाल रही हैं. सिर्फ खान-पान ही नहीं, बल्कि लाइफस्टाइल के दूसरे पहलू भी इस समस्या में योगदान दे रहे हैं. पढ़ाई के प्रेशर, कॉम्पिटिटिव माहौल और मेंटल स्ट्रेस के कारण बच्चों की फिजिकल एक्टिविटी कम हो रही है. पहले मैदान में खेलना या रेगुलर फिजिकल एक्सरसाइज करना एक आम आदत थी, लेकिन अब यह काफी कम हो गई है. नतीजतन, मोटापा बढ़ रहा है और इसका सीधा असर डायबिटीज के खतरे पर पड़ रहा है.

इस कारण बढ़ रहा टाइप 2 डायबिटीज का खतरा
डॉ. सोहम तरफदार के अनुसार, आजकल बच्चों में मोटापा एक गंभीर और आम समस्या है, जो मुख्य रूप से अनहेल्दी डाइट, अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स और स्क्रीन टाइम के कारण फिजिकल एक्टिविटी की कमी के कारण बढ़ रही है, ऐसे में, शरीर में ज्यादा फैट जमा होने से इंसुलिन के ठीक से काम करने की क्षमता में रुकावट आती है, इस स्थिति को ‘इंसुलिन रेजिस्टेंस’ कहते हैं. इससे टाइप 2 डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है. खास तौर पर, पेट के आसपास और लिवर के अंदर फैट का जमा होना ऐसे संकेत हैं जो भविष्य में सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं. आंकड़ों के अनुसार, 2030 से 2050 के बीच भारत की लगभग 10 प्रतिशत आबादी को डायबिटीज होने की संभावना है. इस संदर्भ में, एक्सपर्ट बच्चों में इस बीमारी के फैलने को खास चिंता का विषय मानते हैं.

सावधानी बेहद जरूरी है
डॉ. सोहम तरफदार के अनुसार, सही समय पर सावधानी बरतकर इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. बच्चों के लिए संतुलित आहार बहुत जरूरी है. चीनी, मिठाई, ठंडे पेय और तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन कम करना चाहिए. चावल, ब्रेड या ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाली चीजें भी कम खानी चाहिए. इसके बजाय, डॉक्टर फल, सब्जियां और प्रोटीन वाली चीजें ज्यादा खाने की सलाह देते हैं. इसके साथ ही, रेगुलर एक्सरसाइज पर जोर दिया जाता है. हर दिन कम से कम 30 मिनट से एक घंटे की फिजिकल एक्टिविटी, जैसे स्पोर्ट्स, स्विमिंग, डांसिंग या दूसरी एक्सरसाइज, बच्चों को हेल्दी रखने में अहम भूमिका निभा सकती है. हफ्ते में कम से कम पांच दिन इस आदत को बनाए रखने की सलाह दी जाती है.

ध्यान देने वाली बात
डॉ. सोहम तरफदार का कहना है कि जिन बच्चों की फैमिली हिस्ट्री में डायबिटीज है या जिनका वजन बढ़ रहा है, उन्हें ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है. कई मामलों में रेगुलर हेल्थ चेकअप और लाइफस्टाइल में बदलाव करके डायबिटीज को रोका जा सकता है। डॉक्टरों का साफ मैसेज है कि डायबिटीज अब भविष्य की प्रॉब्लम नहीं, बल्कि आज की सच्चाई है. इसलिए, कम उम्र में ही अवेयरनेस फैलाना और हेल्दी लाइफस्टाइल की आदतें अपनाना ही इस बढ़ती प्रॉब्लम को रोकने का एकमात्र असरदार तरीका हो सकता है.

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