रांची: गरीबों को 5 रुपए में भरपेट भोजन उपलब्ध कराने वाली झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री दाल-भात योजना इन दिनों गैस संकट की मार झेल रही है. ईटीवी भारत की पड़ताल में सामने आया है कि कई केंद्रों पर एलपीजी गैस की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण भोजन लकड़ी और कोयले के सहारे पकाया जा रहा है.
झारखंड में अगस्त 2011 में शुरू हुई इस योजना का उद्देश्य राज्य के गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को कम दर पर पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराना है. वर्षों से यह योजना हजारों लोगों के लिए राहत का माध्यम बनी हुई है, लेकिन वर्तमान में गैस आपूर्ति में आ रही दिक्कतों ने इसके संचालन पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
रसोई संचालन प्रभावित
जमीनी हकीकत यह है कि कई केंद्रों पर संचालकों को गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिल पा रहा है. गैस की बुकिंग के बावजूद आपूर्ति में देरी हो रही है, जिससे रसोई संचालन प्रभावित हो रहा है. ऐसे में योजना को बंद न करना पड़े, इसके लिए संचालकों ने वैकल्पिक व्यवस्था अपनाई है. कई केंद्रों पर बड़े-बड़े चूल्हे बनाकर लकड़ी और कोयले से भोजन तैयार किया जा रहा है, जबकि कुछ जगहों पर इंडक्शन चूल्हों का भी सहारा लिया जा रहा है.

गैस की अनुपलब्धता से बढ़ी परेशानी
संचालकों का कहना है कि गैस की अनुपलब्धता और कीमतों में बढ़ोतरी ने उनकी परेशानी बढ़ा दी है. इसके साथ ही अब कोयले की कीमत में भी भारी इजाफा हुआ है. एक केंद्र की संचालिका श्रुति देवी बताती हैं कि पहले कोयला 300 रुपए प्रति बोरी मिलता था, जो अब बढ़कर 600 रुपए हो गया है. इससे संचालन की लागत दोगुनी हो गई है और परेशानी और बढ़ गई है. इसके बावजूद वे हर हाल में योजना को जारी रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं, ताकि गरीबों को भोजन मिलने में कोई बाधा न आए. रोजाना सैकड़ों लोग इन केंद्रों पर भोजन करते हैं, ऐसे में व्यवस्था बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है.
देशभर में एलपीजी गैस की कीमतों और आपूर्ति को लेकर बनी स्थिति का असर अब सरकारी योजनाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. झारखंड में इसका सीधा असर ‘मुख्यमंत्री दाल-भात योजना’ पर पड़ा है, जो गरीबों के लिए जीवनरेखा मानी जाती है.

संचालक लोगों को खाना खिलाने के लिए कर रहे हर संभव कोशिश
फिलहाल संचालक अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर योजना को सुचारू रूप से चला रहे हैं, लेकिन यह स्थिति लंबे समय तक बनी रही तो योजना की गुणवत्ता और संचालन दोनों प्रभावित हो सकते हैं. ऐसे में जरूरत है कि सरकार इस दिशा में ठोस कदम उठाए, ताकि इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ जरूरतमंदों तक बिना किसी बाधा के पहुंचता रहे.


