रांची: बिरसा कृषि विश्वविद्यालय के प्रांगण में 14 मार्च से शुरू हुए तीन दिवसीय एग्रोटेक किसान मेला-2026 आज सोमवार को समाप्त हो गया.
इसके समापन समारोह में राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए और मेला परिसर का भ्रमण भी किया. कई स्टॉल पर जाकर राज्यपाल खेतीबाड़ी से जुड़ी कई जिज्ञासा शांत करते गवर्नर दिखे.
राज्यपाल ने कहा कि किसानों का जोखिम कम करने तथा टिकाऊ उत्पादन एवं आय के लिए कृषि पद्धति में पशुपालन, बागवानी, मुर्गीपालन, मत्स्यपालन, मधुमक्खीपालन और मशरूम उत्पादन को जोड़ते हुए कृषि का विविधीकरण बेहद जरूरी है. खाद्य एवं पोषण सुरक्षा के मामले में झारखण्ड आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ बागवानी फसलों का निर्यातक भी बने. इसके लिए कृषि वैज्ञानिकों को तकनीकी ज्ञान के प्रसार के लिए और ज्यादा लगन और निष्ठा से काम करना होगा.

उन्होंने कहा कि वैज्ञानिकों और छात्रों को प्रयोगशाला से निकलकर समय-समय पर किसानों के बीच, उनके खेत में भी जाना होगा तभी धरातल पर अपेक्षित परिणाम मिल सकेगा. राज्यपाल ने समुचित पोषण के लिए मड़ुआ, ज्वार, बाजरा जैसे मिलेट्स तथा सहजन के फल और पत्ते को नियमित आहार में शामिल करने की जरुरत पर भी जोर दिया. राज्य सरकार को इस तरह का एग्रोटेक किसान मेला जिला एवं प्रखंड स्तर पर भी आयोजित करना चाहिए ताकि दूर-दराज के क्षेत्रों तक भी नयी प्रौद्योगिकी की रोशनी पहुंच सके.
भारतीय कृषि जैव प्रौद्योगिकी संस्थान रांची के निदेशक डॉ. सुजय रक्षित ने विशिष्ट अतिथि के रूप में कहा कि किसानों की उत्पादकता एवं आय बढ़ाने के लिए झारखंड में स्थित आधा दर्जन आइसीएआर संस्थानों द्वारा किये जा रहे प्रयासों पर प्रयास डाला. बीएयू के कुलपति डॉ. एससी दुबे ने राज्यपाल और कुलाधिपति के स्वागत करते हुए बिरसा कृषि विश्वविद्यालय की उपलब्धियों तथा मेला के उद्देश्यों पर प्रकाश डाला.

राज्यपाल ने नवोन्मेषी कृषि में विशिष्ट योगदान के लिए छह प्रगतिशील किसानों- रविन्द्र महतो एवं उमेश कुमार महतो (धनबाद), कल्याण कुमार एवं सतीश देवगम (सराइकेला-खरसावां), सजल सहाय (रांची) तथा दिलीप बड़ाइक (जारी, गुमला) को सम्मानित किया. उन्होंने ‘टिकाऊ कृषि हेतु जलवायु अनुकूल तकनीकी नवाचार’ विषय पर प्रकाशित स्मारिका का लोकार्पण भी किया. उद्यान प्रदर्शनी में आइआइएलएम कांके को सर्वाधिक 18 पुरस्कार हासिल हुए.

तीन दिवसीय उद्यान प्रदर्शनी में भारतीय विधिक माप विज्ञान संस्थान (आइआइएलएम), कांके को सात प्रथम पुरस्कार सहित सर्वाधिक कुल 18 पुरस्कार प्राप्त हुए. धनबाद के नरेश कुमार महतो ने पांच प्रथम पुरस्कार सहित कुल 12 पुरस्कार प्राप्त कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया. होचर, कांके के राम कुमार साहू 8 पुरस्कार के साथ तृतीय स्थान पर रहे. फल, फूल, सब्जी, मसालों, सजावटी, औषधीय एवं सगंधीय पौधों तथा बागवानी फसलों के प्रसंस्कृत पदार्थों से संबंधित इस प्रदर्शनी में 236 किसानों से कुल 1115 प्रविष्टियां प्राप्त हुईं थी.
थीम स्टाल में पशु उत्पादन एवं प्रबंधन प्रथम
इसी प्रकार गुणवत्ता के आधार पर थीम पंडाल में पशु उत्पादन एवं प्रबंधन को प्रथम, फसल सुधार को द्वितीय तथा कृषि यंत्रीकरण, मूल्य संवर्धन एवं उर्जा प्रबंधन को तृतीय पुरस्कार प्राप्त हुआ. सरकारी संस्थाओं में इफको को प्रथम, राज्य मत्स्य निदेशालय को द्वितीय तथा राष्ट्रीय बीज निगम को तृतीय घोषित किया गया.
कृषि विज्ञान केंद्रों में दिव्यायन रांची, बोकारो एवं खूंटी शीर्ष तीन स्थानों पर रहे. आइसीएआर संस्थानों में अनुसंधान केंद्र पलांडू को प्रथम, राष्ट्रीय कृषि उच्चतर प्रसंस्करण संस्थान, नामकुम को द्वितीय तथा केंद्रीय उपराऊ भूमि चावल अनुसंधान संस्थान, हजारीबाग को तृतीय घोषित किया गया. क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र, चियांकी पलामू के स्टॉल को भी पुरस्कृत किया गया.
कृषि विज्ञान, क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्रों, जिला स्तर पर कार्यरत कृषि प्रौद्योगिकी प्रबंधन अभिकरणों (आत्मा), किसान उत्पादक संगठनों, स्वयंसेवी संगठनों तथा राज्य सरकार के सम्बंधित विभागों के सहयोग से मेला में राज्य के लगभग सभी जिलों के किसानों की अच्छी सहभागिता रही.


