Thursday, February 26, 2026

केंद्र सरकार ने सरायकेला-खरसावां जिले में गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी.

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केंद्र सरकार ने सरायकेला-खरसावां जिले में गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दी. 1168 करोड़ रुपये की लागत से 26 किलोमीटर रूट पर 68 किलोमीटर ट्रैक बिछाई जाएगी. परियोजना से माल ढुलाई क्षमता बढ़ेगी, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, रोजगार सृजित होंगे और पर्यावरणीय लाभ के साथ लॉजिस्टिक लागत में कमी आएगी. इससे संबंधित पूरी खबर नीचे पढ़ें.

 केंद्र सरकार ने झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले को बड़ी सौगात दी है. मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति ने गम्हरिया-चांडिल के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को मंजूरी दे दी. इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 1168 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे.

26 किलोमीटर रूट पर 68 किलोमीटर नई ट्रैक

यह परियोजना करीब 26 किलोमीटर लंबे रूट पर विकसित की जाएगी, जिसके तहत कुल 68 किलोमीटर नई ट्रैक लाइन बिछाई जाएगी. मल्टी-ट्रैकिंग परियोजना का उद्देश्य इस व्यस्त रेलखंड पर ट्रेनों की आवाजाही को सुगम बनाना और क्षमता में बड़ा इजाफा करना है. परियोजना के तहत 13 बड़े पुल, 59 छोटे पुल, 2 आरओआर, 13 आरयूबी, 2 आरओबी और 4 लेवल क्रॉसिंग का निर्माण किया जाएगा. इससे सुरक्षा और परिचालन दक्षता दोनों में सुधार होगा.

माल ढुलाई में इजाफा

गम्हरिया-चांडिल रेलखंड औद्योगिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है. रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से कोयला, लौह अयस्क और स्टील संयंत्रों के लिए माल ढुलाई तेज होगी. अनुमान है कि इस परियोजना से प्रतिवर्ष लगभग 26.8 मिलियन टन अतिरिक्त माल परिवहन संभव हो सकेगा. इससे न केवल औद्योगिक इकाइयों को लाभ मिलेगा, बल्कि लॉजिस्टिक लागत में भी कमी आएगी. सरकार के अनुसार, करीब 139 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष की बचत होने का अनुमान है.

पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा

यह परियोजना पर्यटन के लिहाज से भी अहम मानी जा रही है. गम्हरिया-चांडिल खंड बेहतर होने से चांडिल डैम और दलमा वन्यजीव अभयारण्य सहित आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी और सुदृढ़ होगी. इससे पर्यटकों की संख्या में वृद्धि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है.

कार्बन उत्सर्जन में आएगी कमी

सरकार का दावा है कि इस परियोजना से पर्यावरण को भी लाभ होगा. अनुमानित तौर पर हर वर्ष करीब 6 करोड़ किलोग्राम कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी. यह कमी लगभग 25 लाख पेड़ लगाने के बराबर बताई गई है. रेल परिवहन के विस्तार से सड़क मार्ग पर निर्भरता घटेगी, जिससे प्रदूषण कम होगा.

रोजगार और आर्थिक विकास को बढ़ावा

परियोजना के निर्माण चरण में करीब 18 लाख मानव-दिवस का रोजगार सृजित होने का अनुमान है. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी. सरकार का कहना है कि यह योजना झारखंड को औद्योगिक, पर्यटन और आर्थिक दृष्टि से नई ऊंचाइयों तक ले जाएगी. साथ ही यह आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को भी मजबूत करेगी. गम्हरिया-चांडिल तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना को राज्य के विकास में मील का पत्थर माना जा रहा है.

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