बिहार में 2019-23 के दौरान औसत जीवन प्रत्याशा में सुधार हुआ है। महिलाएं अब औसतन 69.7 वर्ष और पुरुष 68.9 वर्ष जी रहे हैं। यह वृद्धि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं, स्वच्छता और पोषण का परिणाम है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में जीवनकाल बढ़ा है। हालांकि, राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिए बिहार को अभी भी स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता है
पटना। बिहार में महिलाएं और पुरुष अब पहले से अधिक औसत उम्र तक जी रहे हैं। 2019-23 की अवधि से राज्य में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा में लगातार सुधार दर्ज किया गया है।
इस अवधि में बिहार की महिलाएं औसतन 69.7 वर्ष और पुरुष 68.9 वर्ष तक जीवन जी रहे हैं, जो स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और जीवन परिस्थितियों के बेहतर होने का संकेत है। बिहार सरकार द्वारा विधानसभा में पेश आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 में भी इस बात का जिक्र किया गया है।
सर्वेक्षण के आंकड़ों की माने तो पिछले एक दशक में यह बढ़ोतरी और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। 2009-13 की तुलना में बिहार में पुरुषों की औसत जीवन प्रत्याशा 1.6 वर्ष बढ़ी है, जबकि महिलाओं की औसत उम्र में 1.7 वर्ष की वृद्धि हुई है। यानी महिलाएं और पुरुष दोनों ही पहले की तुलना में ज्यादा साल जी रहे हैं, और महिलाओं की जीवन प्रत्याशा पुरुषों से थोड़ी अधिक बनी हुई है।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में भी औसत जीवनकाल बढ़ा है। 2019-23 के दौरान ग्रामीण बिहार में जीवन प्रत्याशा में 1.6 वर्ष की वृद्धि दर्ज की गई है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह बढ़ोतरी 1.3 वर्ष रही।
इससे यह स्पष्ट होता है कि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, टीकाकरण, पोषण और मातृ-शिशु स्वास्थ्य कार्यक्रमों का जमीनी असर हुआ है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी यही रुझान देखने को मिला है। पूरे भारत में 2019-23 के दौरान पुरुषों की औसत जीवन प्रत्याशा 2.7 वर्ष और महिलाओं की 3.2 वर्ष बढ़ी है। ग्रामीण भारत में यह बढ़ोतरी 2.8 वर्ष और शहरी क्षेत्रों में 1.9 वर्ष रही है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार औसत जीवनकाल में यह सुधार बेहतर चिकित्सा सुविधाओं, बीमारियों की समय पर पहचान, साफ-सफाई, पोषण और सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं का परिणाम है।


