उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बाल श्रम को अभिशाप बताते हुए बिहार को अगले पांच वर्षों में बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि सरकार गरीब बच्चों को मजदूरी से निकालकर शिक्षा से जोड़ेगी। पटना में आयोजित एक कार्यशाला में विभिन्न विभागों और संगठनों ने बाल श्रम रोकथाम, उन्मूलन और पुनर्वास पर चर्चा की। पुलिस को बाल श्रम कराने वालों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया गया है, ताकि हर बच्चा स्कूल जा सके।
पटना। बिहार के उपमुख्यमंत्री-सह-गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने बाल श्रम को राज्य और देश के लिए सबसे बड़ा अभिशाप बताया। उन्होंने कहा कि यह अभिशाप सबसे ज्यादा गरीब परिवारों के बच्चों को झेलना पड़ता है, लेकिन सरकार इसे खत्म करने के लिए पूरी ताकत से जुटी है।
5 साल का मिशन: मजदूरी से स्कूल तक
उपमुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अगले पांच वर्षों में बिहार को पूरी तरह बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य तय किया है। माता-पिता कितने भी गरीब क्यों न हों, उनके बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा। सरकार का फोकस मजदूरी छुड़ाकर स्कूल पहुंचाने पर है।
मंच पर जुटे अधिकारी, मुद्दा एक—बचपन बचाओ
पटना स्थित दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला में यह बातें कही गईं। कार्यशाला का विषय था—बाल श्रम रोकथाम, उन्मूलन, विमुक्ति और पुनर्वास।
शिक्षा, समाज और सरकार—सब एक मंच पर
कार्यशाला में श्रम संसाधन विभाग, बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग, शिक्षा, पंचायती राज और समाज कल्याण विभाग के अधिकारी शामिल हुए। इसके साथ ही अन्य राज्यों के श्रम विभाग और कई गैर सरकारी संगठन भी कार्यक्रम में मौजूद रहे।
खेल का मैदान चाहिए, मजदूरी नहीं
सम्राट चौधरी ने कहा कि बच्चों की जगह फैक्ट्री या दुकान नहीं, स्कूल और खेल का मैदान है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि छोटी उम्र में बच्चों को कमाई के लिए मजबूर होना पड़ता है। उन्होंने पुलिस को बाल श्रम कराने वालों पर सख्त कार्रवाई का निर्देश दिया।
जब हर बच्चा पढ़ेगा, तभी बिहार बढ़ेगा
बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार बादल ने कहा कि जब तक हर बच्चा स्कूल नहीं जाएगा, खेलेगा नहीं और सपने नहीं देखेगा, तब तक विकसित भारत और उन्नत बिहार का सपना अधूरा रहेगा। इसके लिए पंचायत स्तर तक कार्यबल बनाया गया है।
गरीबी और अशिक्षा बना रही बच्चों को मजदूर
आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार ने कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना अपराध है। इसके बावजूद गरीबी और अशिक्षा के कारण बाल श्रम की समस्या बनी हुई है। इसे खत्म करने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है।
आंकड़े बोले—मिशन शुरू हो चुका है
श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनंद ने बताया कि वर्ष 2024-25 में 1213 बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया। वहीं 2025-26 में अब तक 581 बच्चों को मजदूरी से निकालकर आज़ादी दिलाई जा चुकी है।


