Saturday, May 2, 2026

 केंद्रीय खाद्य सचिव निधि खरे ने कहा कि देश में प्रतिवर्ष 250 से 300 लाख टन दलहन का उत्पादन होता है।

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केंद्रीय खाद्य सचिव निधि खरे ने पटना में उपभोक्ता संरक्षण कार्यशाला में कहा कि देश को दालों के आयात पर निर्भरता कम करने के लिए दलहन उत्पादन बढ़ाना होगा। उन्होंने बिहार सरकार से किसानों को दलहन उत्पादन के लिए प्रोत्साहित करने और एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने का आग्रह किया। खरे ने उपभोक्ता शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए तकनीकी उपयोग पर भी जोर दिया, जिससे अब 21 दिनों में समस्या हल होती है।

पटना। केंद्रीय खाद्य सचिव निधि खरे ने कहा कि देश में प्रतिवर्ष 250 से 300 लाख टन दलहन का उत्पादन होता है।

बावजूद, उपभोक्ताओं की मांग की पूर्ति के लिए हर साल 31 लाख टन दलहन आयात करना पड़ता है। देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए राज्यों की सरकारों को काम करना चाहिए।

बिहार में भी दलहन का उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु किसानों को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। साथ ही, बिहार
सरकार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर दलहन की अधिप्राप्ति सुनिश्चित करनी चाहिए।

मंगलवार को उन्होंने पूर्वी राज्यों में उपभोक्ता संरक्षण पर पटना के होटल ताज में आयोजित कार्यशाला को संबोधित करते हुए यह बात कही।

कार्यशाला में बिहार के अलावा ओडिशा और झारखंड के संबंधित विभागों के पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और बिहार सरकार के खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग की ओर से कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इससे पहले केंद्रीय उपभोक्ता मामले मंत्रालय की सचिव निधि खरे और बिहार सरकार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कार्यशाला का उद्घाटन दीप जलाकर किया।

निधि खरे ने कहा कि आस्ट्रेलिया से चना, म्यांमार से अरहर, उड़द, मसूर, रूस से पीली मटर के अलावा ब्राजील से भी दलहन आयात करता है। प्रतिवर्ष 18 लाख टन चना, आठ लाख टन अरहर और चार लाख से पांच लाख टन उड़द आयात होता है।

वहीं अपने देश में 121 लाख टन चला और 36 लाख से 40 लाख टन अरहर का उत्पादन होता है। बिहार में दलहन का उत्पादन बड़े पैमाने पर करने की जरूरत है। 

उन्होंने कहा कि हमारा देश तेज रफ्तार से आर्थिक प्रगति कर रहा है, हमारी जीडीपी बढ़ रही है। ऐसे में हमारा दायित्व है कि हम अपने नागरिकों और उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करें और उन्हें बेहतर सुविधाएं दें।

उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा अब आधुनिक तकनीक से भी हो रही है। हम उपभोक्ताओं की समस्याओं के तुरंत निदान की दिशा में काम कर रहे हैं।

नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन नंबर 1915 जारी किया गया है। इसकी मदद से पिछले वर्ष आठ महीने में करीब 45 करोड़ के रिफंड का भुगतान उपभोक्ताओं को करवाया।

उन्होंने कहा कि पहले उपभोक्ताओं की समस्या के समाधान में 67 दिन लगते थे लेकिन अब यह समय घट कर 21 दिन हो गया।

ई-जागृति पोर्टल के माध्यम से हमने कंज्यूमर कमीशन में भी तकनीक का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया। इसका उपयोग भविष्य में बहुत बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।

उपभोक्ताओं के हितों का ध्‍याना प्राथमिकता : प्रत्यय अमृत

राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए कहा कि हमें आम आदमी या उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर काम करने की प्राथमिकता देना होगा।

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