बिहार के सभी जिलों में आदर्श गौशाला की स्थापना की जाएगी। डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग गौशालाओं को ग्रामीण विकास और इको टूरिज्म का केंद्र बनाने के लिए कार्य कर रहा है। गौशालाओं के प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने और पशु स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने पर बल दिया गया है। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय सहायता और नवाचार आधारित आय सृजन मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा
पटना। C इसके लिए डेयरी मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग ने व्यापक कार्य योजना तैयार कर गौशालाओं को ग्रामीण विकास एवं पशुधन संवर्धन के साथ-साथ इको टूरिज्म का केंद्र बनाने के लिए काम करने जा रहा है। यह निर्णय सोमवार को राज्य में गौशालाओं के सुदृढ़ीकरण के लिए बामेती में हुई बैठक में लिया गया।
विभाग की अपर मुख्य सचिव एन विजयलक्ष्मी ने कहा कि गौशालाओं के प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तकनीकी समाधान अपनाना समय की आवश्यकता है। इससे न केवल पशुओं का कल्याण होगा बल्कि लोगों को रोजगार भी मिलेगा।
वहीं, पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह ने गौशालाओं में पशु स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और क्षमता निर्माण पर बल दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल रिकार्ड प्रणाली लागू करने से पारदर्शिता बढ़ेगी और पशुओं की देखभाल बेहतर ढंग से हो सकेगी। गौशालाओं के सुदृढ़ प्रबंधन, दीर्घकालिक विकास एवं अत्मनिर्भर बनाने के लिए विस्तृत चर्चा हुई।
गौशालाएं केवल आश्रय स्थल न होकर उत्पादकता और स्थायित्व का केंद्र बनें, इसके लिए मजबूत आधारभूत संरचना जैसे – स्वच्छ जल आपूर्ति, पर्याप्त चारा, सुरक्षित आश्रय और आधुनिक पशु चिकित्सा सुविधाएं विकासित करने पर जोर दिया गया।
साथ ही बिहार गौशाला विनियमन अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन पर भी विचार किया गया। बैठक में कहा गया कि, विभाग प्रबंधन समितियों का गठन, पारदर्शी अभिलेख रख-रखाव और स्वास्थ्य मानकों का पालन आदि सुनिश्चित करेगा। सात ही, गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए वित्तीय सहायता योजनाओं, अनुदान, सब्सिडी और नवाचार आधारित आय सृजन मॉडल जैसे जैविक खाद, बायोगैस एवं गौ आधारित रोजगारपरक उत्पादों को बढ़ावा दिया जाएगा।
बैठक में सभी गौशालाओं के अध्यक्ष-सह-अनुमण्डल पदाधिकारी, गौशालाओं के सचिव, पशुपालन निदेशालय के सभी क्षेत्रीय निदेशक एवं सभी जिलों के जिला पशुपालन सम्मिलित हुए।


