Monday, May 4, 2026

अशोक लेलैंड ने बिहार में इलेक्ट्रिक बस निर्माण के लिए उत्पादन इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है।

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 अशोक लेलैंड बिहार में एक महत्वपूर्ण निवेश करने जा रहा है। उद्योग वार्ता के दौरान कंपनी ने राज्य में कई अन्य क्षेत्रों में भी बड़े निवेश का प्रस्ताव रखा है। इस निवेश से बिहार के औद्योगिक विकास और अर्थव्यवस्था पर सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना है। यह कदम राज्य में रोजगार के अवसर भी पैदा कर सकता है

पटना।  अशोक लेलैंड ने बिहार में इलेक्ट्रिक बस निर्माण (Electric Bus Manufacturing) के लिए उत्पादन इकाई स्थापित करने का प्रस्ताव दिया है। मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में गुरुवार को उद्योग वार्ता कार्यक्रम में इस आशय का प्रस्ताव आया।

वहीं 32 निवेशकों ने इस कार्यक्रम में सहभागिता की। ”उद्योग वार्ता” इस मायने में विशेष रूप से महत्वपूर्ण रही क्योंकि इसमें बिहारी निवेशकों की संख्या अधिक थी। यशपाल साचर (वाईस प्रेसिडेंट, अशोक लेलैंड) ने इलेक्ट्रिक बस के लिए मैन्यूफैक्चरिंग यूनिट लगाने का प्रस्ताव रखा।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि बिहार में परिचालित ”पिंक बस” को देखते हुए महिलाओं के लिए ड्राइविंग स्कूल की स्थापना की जा सकती है। बिपिन कुमार झा (निदेशक, रोबोटिक्स प्रोग्राम और कोलोरेक्टल सर्जरी, सवेरा कैंसर एंड मल्टीस्पेशलिटी हास्पिटल) ने रोबोटिक्स सर्जरी की अहमियत को रेखांकित करते हुए इसमें निवेश करने और सरकार के साथ मिलकर काम करने की इच्छा व्यक्त की।

सिद्धार्थ लधानी (निदेशक, कोका कोला एसएलएमजी) ने बिहार सरकार के साथ सहयोग करने की इच्छा ज़ाहिर की और अपने प्रस्तावित उद्योग की रूपरेखा पर चर्चा की। निवेशकों ने सरकार से आयात-निर्यात प्रक्रियाओं में भी सहयोग की मांग की।


इन क्षेत्रों में निवेश प्रस्तावों पर चर्चा

  • दूग्ध उत्पादन एवं संबंधित उत्पाद उद्योग
  • बिहार फिल्म सिटी की स्थापना में निवेश
  • बिजली संबंधित उत्पादों की मैनुफैक्चरिंग यूनिट
  • फर्निचर, एजुकेशनल इंस्टीच्यूट, और हास्पिटल सेक्टर
  • लेदर के सामान का निर्माण एवं निर्यात
  • गन्ना उद्योग का विस्तार

नीत‍ियों में संशोधन भी कर सकती है सरकार 

मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने सभी निवेशकों को आश्वासन दिया कि ”उद्योग वार्ता” राज्य सरकार को अच्छे और गंभीर निवेशकों के साथ सीधे काम करने का अवसर प्रदान करेगी और सरकार की ओर से उन्हें हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी।

बिहार के समग्र विकास के लिए राज्य सरकार द्वारा कई योजनाएं संचालित की जा रही हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि निवेश को बढ़ावा देने के लिए किसी भी प्रकार की नई नीति लानी पड़ेगी या पुरानी नीतियों में संशोधन की आवश्यकता होगी, तो राज्य सरकार बिना किसी विलंब के वह करेगी।

जिन निवेशकों को ज़मीन की आवश्यकता थी या अन्य दिक्कतें आ रही थीं, उनके मामलों को मुख्य सचिव ने गंभीरता से सुना और तत्काल संबंधित विभागों को कार्रवाई के लिए निदेश दिए। बैठक में उद्योग विभाग के सचिव, कुंदन कुमार, निदेशक, मुकुल कुमार गुप्ता, ऊर्जा विभाग के सचिव, मनोज कुमार सिंह, और गन्ना कमिश्नर, अनिल कुमार झा भी उपस्थित रहे।

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