हजारीबाग: हाथी मानव द्वंद का इतिहास बहुत पुराना है. बदलते समय ने इस संघर्ष को और भी जटिल और चुनौतीपूर्ण बना दिया है. बढ़ती इंसानों की आबादी और हाथी के रास्ते में घर निर्माण, अंधाधुन जंगल की कटाई, जंगल से जल स्रोत खत्म होने और भोजन की कमी ने हाथियों को और भी आक्रामक बना दिया है. हाथी गांव के साथ शहर में भी प्रवेश कर रहे हैं, जिसे देखते हुए वन विभाग ने हाथी से बचाव के लिए इंटेलिजेंस का सहारा लिया है और एक ऐप बनाया है, जो हाथी की मूवमेंट के बारे में लोगों को जानकारी देगा.
गांव में घुसते ही हाथी मचाते हैं तबाही
दरअसल, पूरे झारखंड में सालभर हाथियों का आतंक बना रहता है. हाथी ग्रामीण क्षेत्र के साथ-साथ शहरी इलाकों में भी प्रवेश कर रहे हैं. कई बार हाथियों की मूवमेंट की वजह से उनकी जान भी चली जाती है. पिछले 2 साल के आंकड़ों को देखा जाए तो दर्जनों लोगों की मौत हाथी हमले में हो चुकी है. हाथी अक्सर जंगल से निकलकर गांवों तक पहुंच जाते हैं. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि जंगल में उन्हें पर्याप्त भोजन और पानी नहीं मिल पाता है. ऐसे में वे गांवों में प्रवेश करते हैं और रास्ते में आने वाली फसलों, घरों और सामान को नुकसान पहुंचाते हैं.
हमर हाथी एप से पता चलेगा हाथियों का लोकेशन
हाथियों के इस बढ़ते खतरे से लोगों को बचाने के लिए झारखंड सरकार और वन विभाग ने हमर हाथी 2.0 एप बनाया है. यह एप हाथियों के लोकेशन की जानकारी देता है और यह भी बताता है कि हाथी किस दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. इसके अलावा, अगर हाथी आसपास हैं तो एप, मोबाइल पर कॉल और नोटिफिकेशन के जरिए लोगों को सतर्क कर देता है.
यह एप्लीकेशन 20 किलोमीटर के दायरे में हाथियों की मौजूदगी की जानकारी दे देता है जबकि 5 किलोमीटर के अंदर हाथियों के आने पर एप से ऑटोमैटिक फोन कॉल जाता है, जिससे लोग समय रहते सतर्क हो सके और नुकसान से बच सके. एप से जुड़ा अलार्म सिस्टम लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है. इससे हाथियों के गांव के करीब आते ही अलार्म बजने लगेगा और ग्रामीणों को तुरंत सूचना मिल जाएगी. इस एप में और भी कई फीचर्स जोड़े गए हैं, जिससे जंगलों के करीब गांवों में रहने वाले लोगों को काफी फायदा मिलेगा: मौन प्रकाश, डीएफओ, पूर्वी वन प्रक्षेत्र
इंसानों ने छीना हाथियों का खाना पानी
वन्य जीवों पर शोध करने वाले मुरारी सिंह बताते हैं कि आज इस तरह से हाथी आक्रामक हो रहे हैं, इसकी पीछे का कारण मानव स्वभाव है. मानव ने हरे भरे जंगल काटे हैं. जंगल में हाथियों का भोजन कम हो गया है. जल स्रोत भी कम हो गए हैं. यही वजह है कि हाथी ग्रामीण क्षेत्रों में प्रवेश कर रहे हैं. हाथियों से बचाव के लिए यह एप्लीकेशन मददगार साबित हो सकता है, इससे भी अधिक जरूरी है कि जल और जंगल की रक्षा की जाए.

एप के माध्यम से जागरूक हो रहे हैं ग्रामीण
हमर हाथी एप 2.0 को लेकर ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है. वन विभाग कर्मी गांव-गांव जाकर ग्रामीणों के मोबाइल में यह एप इंस्टॉल करवा रहे हैं. हमर हाथी 2.0 एप हाथी और मानव संघर्ष को कम करने में मददगार साबित होगा.


