Tuesday, May 5, 2026

बिहार के 50 लाख शहरी घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए अगले वित्तीय वर्ष में बिजली बिल हल्का होने जा रहा है

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बिहार के 50 लाख शहरी घरेलू और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए अगले वित्तीय वर्ष में बिजली बिल हल्का होने जा रहा है. बिजली कंपनी ने ऐसा प्रस्ताव आयोग को भेजा है, जिसे लागू किया गया तो हर महीने की जेब ढीली होने का तनाव काफी हद तक कम हो सकता है.

राज्य की बिजली वितरण कंपनी ने बड़ा फैसला लेते हुए बिहार विद्युत विनियामक आयोग को एक ऐसा प्रस्ताव सौंपा है, जिसके बाद बिजली की मौजूदा दो-स्तरीय दरों को खत्म कर एक स्लैब लागू किया जा सकता है. इस फैसले का सीधा लाभ 25 लाख शहरी घरेलू उपभोक्ताओं और करीब 25 लाख वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को मिलेगा. प्रस्ताव लागू होने के बाद शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए प्रति यूनिट बिजली 1.40 रुपये सस्ती हो जाएगी, वहीं वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को भी कम दर पर बिजली मिल सकेगी.

क्या बदलेगा प्रस्ताव लागू होने पर

साउथ बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी के जीएम (राजस्व) अरविंद कुमार ने बताया कि मौजूदा समय में शहरी क्षेत्रों में घरेलू उपभोक्ताओं के लिए दो खपत-स्तर लागू हैं. पहले 100 यूनिट तक बिजली की दर अलग होती है और इसके बाद 125 यूनिट तक बढ़ने पर दर अधिक हो जाती है. स्मार्ट प्रीपेड मीटर से कटने वाली राशि भी इन्हीं स्लैबों के आधार पर बदलती रहती है, जिससे उपभोक्ता अक्सर कन्फ्यूजन में रहते हैं.

अब प्रस्ताव है कि 125 यूनिट से अधिक खपत होने पर भी बिजली एक समान दर 4.12 रुपये प्रति यूनिट पर मिले, जबकि अभी यही खपत 5.52 रुपये प्रति यूनिट की दर से मिलती है. यानी उपभोक्ताओं को हर यूनिट पर 1.40 रुपये की सीधी बचत होगी.प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के लिए भी राहत का रास्ता खुल रहा है. प्रस्ताव के मुताबिक 25 लाख वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को 5.67 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराई जाएगी.

कब लागू होगा नया टैरिफ

कंपनी ने आयोग से आग्रह किया है कि यह नई दरें 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2027 तक लागू की जाएं. इसके लिए आयोग प्रमंडल स्तर पर जनसुनवाई करेगा, ताकि उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों की प्रतिक्रिया भी ली जा सके. जनसुनवाई के बाद आयोग अंतिम आदेश जारी करेगा.

क्यों आसान होगा स्मार्ट प्रीपेड मीटर का हिसाब

कंपनी के अधिकारियों का कहना है कि अभी दो दरों के कारण स्मार्ट प्रीपेड मीटर में हर यूनिट की कटौती बदलती रहती है, जिससे उपभोक्ताओं को समझने में परेशानी होती है. एक स्लैब लागू होने के बाद यह समस्या खत्म हो जाएगी और उपभोक्ता आसानी से अपनी खपत और बैलेंस का अनुमान लगा सकेंगे.

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिली, तो नया स्लैब न सिर्फ शहरी घरों की मासिक बचत बढ़ाएगा, बल्कि पूरे बिलिंग सिस्टम को सरल बनाएगा. बिजली कंपनी का दावा है कि इससे उपभोक्ताओं की ‘क्लियर बिलिंग’ की समस्या काफी हद तक खत्म होगी और भुगतान का दबाव भी कम होगा.

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