Kesaria vidhan sabha Seat 2025 कृषि कार्यों के लिए अब भी संसाधन का अभाव है। जहां तक नलकूप की बात है तो ज्यादातर या तो बंद हैं या बेकार पड़े हैं। विद्यालयों में शिक्षा व्यवस्था बेहतर हुई है लेकिन उच्च शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। इसके लिए शिक्षार्थियों को अब भी बाहर ही जाना पड़ा है। इससे लड़कियों को बहुत परेशानी होती है।
मोतिहारी : पूर्वी चंपारण कभी वामपंथ का गढ़ रहे केसरिया विधानसभा क्षेत्र ने कमोबेश सभी दलों को मौका दिया है। यहां से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के अलावा कांग्रेस, जनता पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल एवं जनता दल यूनाइटेड को प्रतिनिधित्व का अवसर मिला है। यहां से सर्वाधिक चार बार निर्वाचित होने का रिकार्ड भाकपा के पितांबर सिंह के नाम है।
वर्ष 2020 के विधानसभा चुनाव में जनता दल यूनाइटेड के प्रत्याशी के रूप में शालिनी मिश्र ने जीत दर्ज की थी। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी राष्ट्रीय जनता दल के उम्मीदवार संतोष कुशवाहा को हराया था। शालिनी मिश्र ने अपना राजनीतिक सफर भाकपा के साथ शुरू किया था, लेकिन बाद में जदयू का दामन थाम लिया।
केसरिया विधानसभा क्षेत्र मूल रूप से कृषि पर आधारित है। कृषि कार्यों के लिए संसाधनों का आज भी अभाव है। ज्यादातर नलकूप बंद या बेकार पड़े हैं। नहरों की स्थिति बदहाल है। विधानसभा क्षेत्र के दक्षिणी हिस्से से होकर गंडक नदी गुजरती है। बरसात में बाढ़ और कटाव क्षेत्र की नियती बन गई है।
विद्यालयों में बेहतर शिक्षा व्यवस्था है, लेकिन उच्च शिक्षा का कोई विकल्प नहीं है। लंबे समय से इन समस्याओं से यहां के लोग जूझ रहे हैं। क्षेत्र की सड़कें तो बेहतर हैं। बिजली की स्थिति भी काफी हद तक ठीक है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार की आवश्यकता है। पंचायत स्तर पर स्थापित स्वास्थ्य उपकेंद्र महज दिखावा है।
काम जो हुए
- दस से ज्यादा आरसीसी पुल का निर्माण।
- डेढ़ दर्जन से ज्यादा उप स्वास्थ्य केंद्रों का निर्माण।
- आधा दर्जन से ज्यादा हाईस्कूलों में वर्ग कक्ष का निर्माण।
- आधा दर्जन से ज्यादा कब्रिस्तानों की घेराबंदी।
- सौ से भी ज्यादा पीसीसी सड़कों का निर्माण।
- कढ़ान में नदी के कटाव से बचाव को बांध का निर्माण।
- बौद्ध स्तूप तक पहुंच पथ का निर्माण एवं सुंदरीकरण।
- केसरिया, खजुरिया एवं सरोतर मठ में चहारदीवारी का निर्माण।
- पर्यटकों के लिए पर्यटक भवन एवं पहुंच पथ का निर्माण।
- आधा दर्जन से ज्यादा हाईस्कूलों में दो मंजिला भवन।
- एक दर्जन से ज्यादा सामुदायिक भवनों का निर्माण।
- बस और आटो स्टैंड का निर्माण।
कार्य जो नहीं हो सके
- नहरों का जीर्णोद्धार।
- बंद पड़े नलकूप।
- नलकूपों से जुड़े नालों का निर्माण नहीं।
- सरकारी डिग्री कालेज की स्थापना नहीं।
विधानसभा क्षेत्र : एक नजर में
| कुल मतदाता | 2,89,041 |
| पुरुष | 1,55,474 |
| महिला | 1,33,549 |
| थर्ड जेंडर |
क्या कहते हैं लोग :
बिहार में विकास हो रहा है, इससे इन्कार तो नहीं किया जा सकता। इसका लाभ केसरिया को भी मिला है, लेकिन शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी व्यवस्था अब भी अपेक्षित स्तर की नहीं है। इसमें सुधार की आवश्यकता है। शिक्षा और स्वास्थ्य बुनियादी जरूरतें हैं।
मो. मुस्ताक, प्रद्युमन छपरा
गंडक के तटवर्ती गांव आज भी प्रकृति की मार झेल रहे हैं। कटाव के कारण गांव के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। बरसात में बाढ़ और उसके बाद कटाव से लोग परेशान हैं। गांव का संपर्क पथ भी आवागमन लायक नहीं है।
जयंत कुमार, ढेकहां


