जयपुर : विश्व किडनी कैंसर दिवस हर साल जून के तीसरे गुरुवार को मनाया जाता है, जिसका मकसद आमजन को इस जानलेवा रोग के बारे में जागरूक करना है. किडनी कैंसर को ‘साइलेंट किलर’ भी कहा जाता है, क्योंकि इसके लक्षण तब तक स्पष्ट नहीं होते जब तक कैंसर अंतिम चरण में न पहुंच जाए. ऐसे में समय रहते इसकी पहचान करना काफी मुश्किल होता है. किडनी का कैंसर एक गंभीर बीमारी है, जिसमें किडनी की कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं.
- एसएमएस अस्पताल के अतिरिक्त अधीक्षक डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि किडनी हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग है. किडनी शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालती है. ऐसे में किडनी से जुड़ी बीमारियों को लेकर सतर्क रहना जरूरी है. किडनी के कैंसर की बात करें तो देश में कुल कैंसर के मरीजों में तकरीबन 1.4 प्रतिशत किडनी कैंसर के मामले देखने को मिलते हैं. आमतौर पर किडनी के कैंसर की पहचान काफी मुश्किल होती है.
- स्टोन से कैंसर का खतरा : डॉ. मनोज शर्मा का कहना है कि आमतौर पर लोगों को कई बार किडनी में स्टोन की शिकायत होती है. इसे नजरअंदाज करना काफी घातक हो सकता है. किडनी के स्टोन कुछ समय बाद कैंसर में बदल जाते हैं. ऐसे में किडनी के कार्य करने की क्षमता पर हमेशा नजर रखना जरूरी है. इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर का असर भी किडनी पर पड़ता है. यह भी कैंसर का कारण हो सकती है.
- किस कारण होता है किडनी का कैंसर : डॉक्टर मनोज शर्मा का कहना है कि किडनी में कैंसर होने के कई कारण हो सकते हैं. जेनेटिक किडनी के कैंसर का कारण, पेट्रोलियम प्रोडक्ट के संपर्क में आने से, धूम्रपान करने से किडनी के कैंसर का खतरा होता है. इसके अलावा किडनी में बार-बार स्टोन का जमा होना, क्रोनिक किडनी डिजीज के कारण, ब्लड प्रेशर के कारण, एंटीबायोटिक्स और दर्द निवारक दवाओं का लगातार सेवन के कारण भी किडनी का कैंसर होता है.
किस तरह पहचान की जाए : किडनी के कैंसर की बात करें तो इसके लक्षण पहचानना काफी मुश्किल होता है. हालांकि, अगर पेशाब में लगातार ब्लड आए, पेट में लगातार दर्द रहे, अचानक वजन कम हो, भूख कम लगे, बुखार रहे और एनीमिया और रक्तचाप में बदलाव हो तो ये किडनी कैंसर के लक्षण हो सकते हैं.
किस तरह से इलाज संभव : डॉक्टर मनोज शर्मा का कहना है कि आमतौर पर किडनी के अनुसार 60 वर्ष की आयु से अधिक लोगों में देखने को मिलता है, लेकिन कई बार कम उम्र में भी किडनी कैंसर के मामले सामने आते हैं. इलाज की बात की जाए तो लक्षण सामने आने के बाद सोनोग्राफी और CT स्कैन की सहायता मिल जाती है. जरूरत पड़ने पर पेट स्कैन भी किया जाता है. यह देखा जाता है कि क्या कैंसर की कोशिकाएं किडनी के भीतर ही मौजूद हैं या फिर किडनी के आसपास, ताकि इसके अनुसार इलाज किया जा सके.


