पंचक काल एक ज्योतिषीय अशुभ अवधि है जिसमें दक्षिण दिशा की यात्रा, निर्माण कार्य और अंतिम संस्कार वर्जित होते हैं. जानिए
हिन्दू धर्म में पंचक काल को एक विशेष खगोलीय अवधि माना जाता है, जो चंद्रमा के धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्रों से होकर गुजरने पर बनती है. यह अवधि लगभग पांच दिनों की होती है और इसे ज्योतिष शास्त्र में अशुभ समय माना जाता है. इस दौरान किए गए कार्यों का प्रभाव पांच गुना बढ़ जाता है, चाहे वह शुभ हो या अशुभ. इसलिए, इस समय में कुछ विशेष कार्यों को करने से बचने की सलाह दी जाती है.
जून 2025 में पंचक काल: तिथियां और समय
दिल्ली के वैदिक ज्योतिष और वास्तु एक्सपर्ट आदित्य झा के अनुसार जून 2025 में पंचक काल की शुरुआत 16 जून, सोमवार को दोपहर 1:10 बजे से होगी और यह 20 जून, शुक्रवार को रात 9:45 बजे समाप्त होगा. चूंकि यह पंचक सोमवार को शुरू हो रहा है, इसे राज पंचक कहा जाता है, जो विशेष रूप से शुभ माना जाता है.
पंचक काल में वर्जित कार्य
- दक्षिण दिशा की यात्रा: दक्षिण दिशा को यमराज की दिशा माना जाता है. इस दिशा में यात्रा करने से मृत्यु का भय रहता है. इसलिए, इस दिशा में यात्रा करने से बचना चाहिए.
- घर की छत डालना या निर्माण कार्य: रेवती नक्षत्र के दौरान घर की छत डालना या निर्माण कार्य करना अशुभ माना जाता है. इससे घर में क्लेश और संकट आने की संभावना रहती है.
- पलंग या चारपाई का निर्माण: पलंग या चारपाई का निर्माण करने से घर में संकट आने की संभावना रहती है.
- शव का अंतिम संस्कार: पंचक काल में शव का अंतिम संस्कार करने से घर में अगले पाँच दिनों के भीतर और भी मृत्यु की संभावना बढ़ जाती है. यदि ऐसी स्थिति आ जाए, तो शव के साथ पाँच पुतले बनाकर उनका भी दाह संस्कार करना चाहिए. यह उपाय पंचक दोष को शांत करने में सहायक होता है.
क्या है राज पंचक?
इस बार पंचक की शुरुआत सोमवार से हो रही है, जिसे ज्योतिष में “राज पंचक” कहा जाता है. राज पंचक को सामान्य पंचक की तुलना में शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस काल में किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है.
राज पंचक: विशेष अवसर और शुभ कार्य
- सरकारी योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों की शुरुआत करना शुभ होता है.
- संपत्ति की खरीद-बिक्री, रजिस्ट्रेशन और अन्य संपत्ति संबंधी कार्यों के लिए यह समय अनुकूल होता है.
- कुछ विशेष स्थितियों में गृह प्रवेश, विवाह, मुंडन आदि जैसे शुभ और मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं, बशर्ते कि पंचक के अन्य विशिष्ट नियमों का उल्लंघन न हो.
पंचक में मृत्यु होने पर क्या करना चाहिए?
पंचक में किसी की मृत्यु होना अशुभ संकेत माना गया है. ऐसी स्थिति में पारंपरिक उपायों को अपनाना आवश्यक समझा जाता है. मान्यता है कि पंचक के दौरान यदि किसी व्यक्ति का निधन हो जाए, तो उसी परिवार में और मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है. इस आशंका को दूर करने के लिए शव के साथ पाँच पुतलों को भी अग्नि दी जाती है, जो कि प्रतीकात्मक सुरक्षा उपाय माने जाते हैं.
पंचक दोष निवारण के उपाय
- नियमित रूप से हनुमान चालीसा या सुंदरकांड का पाठ करने से अशुभ प्रभाव कम होते हैं.
- पंचमुखी दीपक जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.
- ब्राह्मणों को दान देने से पुण्य की प्राप्ति होती है और दोष निवारण होता है.
- गाय को रोटी खिलाने से अशुभ प्रभाव कम होते हैं.


