Dhanbad News, 6 November 2026: शिक्षा विभाग में कथित अनियमितताओं, शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति में गड़बड़ी के आरोपों को लेकर निरसा विधायक अरूप चटर्जी की ओर से जिला समाहरणालय परिसर में जारी अनिश्चितकालीन अनशन शुक्रवार देर शाम समाप्त हो गया। उपायुक्त आदित्य रंजन की ओर से लिखित आश्वासन मिलने के बाद विधायक ने आंदोलन वापस लेने का फैसला किया।
प्रशासन की ओर से दिए गए पत्र में दो महीने के भीतर शिक्षकों की ट्रांसफर-पोस्टिंग से संबंधित पूरी रिपोर्ट सार्वजनिक करने और कथित अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच कराने की बात कही गई है। इसके बाद जिला शिक्षा अधीक्षक (DSE) और जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने विधायक को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।
शिक्षकों की तैनाती में असमानता का उठाया मुद्दा
विधायक अरूप चटर्जी का मुख्य मुद्दा शिक्षकों की कथित मनमानी प्रतिनियुक्ति और ग्रामीण तथा शहरी स्कूलों के बीच शिक्षकों की तैनाती में असमानता था। उनका आरोप था कि शहरी क्षेत्र के कुछ स्कूलों में जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात हैं, जबकि ग्रामीण विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। इससे ग्रामीण इलाकों में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
विधायक ने पूर्व जिला शिक्षा अधीक्षक के कार्यकाल में शिक्षकों की पोस्टिंग और प्रतिनियुक्ति में बड़े पैमाने पर अनियमितता होने का आरोप लगाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की थी।
आंदोलन को मिला राजनीतिक और सामाजिक समर्थन
अरूप चटर्जी के आंदोलन को विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। गुरुवार को झामुमो विधायक मथुरा महतो धरना स्थल पर पहुंचे और आंदोलन का समर्थन किया। वहीं, शुक्रवार को माले कार्यकर्ताओं ने जुलूस निकालकर शिक्षा विभाग में कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।
मौखिक आश्वासन से संतुष्ट नहीं थे विधायक
अनशन के दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने विधायक को मनाने की कई कोशिशें कीं और मौखिक आश्वासन भी दिए। हालांकि, विधायक ने स्पष्ट किया था कि जब तक उपायुक्त की ओर से समयबद्ध जांच और रिपोर्ट सार्वजनिक करने का लिखित आश्वासन नहीं मिलेगा, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
अंततः प्रशासन की ओर से लिखित पत्र मिलने के बाद विधायक ने अपना अनशन समाप्त कर दिया। अब दो महीने के भीतर रिपोर्ट सार्वजनिक करने और जांच कराने के आश्वासन पर आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।
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