Bhagalpur News, 6 November 2026: बिहार के भागलपुर की 14 वर्षीय काव्या चौबे ने अभिनय की दुनिया में अपनी प्रतिभा से पहचान बनाई है। काव्या ने वर्ष 2024 में बनी फिल्म ‘डॉक्टर बेटियां’ में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भागलपुर में ही शूट हुई इस फिल्म को देश-विदेश की हजारों फिल्मों के बीच टॉप-100 में जगह मिली है। फिल्म को उत्तर प्रदेश सरकार के पर्यटन विभाग से भी प्रोत्साहन मिला है। इस उपलब्धि से काव्या और उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
गरीब बच्ची के डॉक्टर बनने के सपने पर आधारित है फिल्म
फिल्म ‘डॉक्टर बेटियां’ की कहानी एक गरीब परिवार की बच्ची के संघर्ष और डॉक्टर बनने के सपने के इर्द-गिर्द घूमती है। बच्ची के पास सीमित संसाधन हैं और पारिवारिक सहारा भी नहीं है। इसके बावजूद वह पढ़ाई जारी रखकर अपने लक्ष्य तक पहुंचना चाहती है।
कहानी में दिखाया गया है कि अंग्रेजी नहीं आने के कारण बच्ची को स्कूल में दाखिला लेने में परेशानी होती है। वह हार मानने के बजाय दोस्तों की मदद से अंग्रेजी सीखती है और अपनी कमजोरी दूर करने का प्रयास करती है। आखिरकार उसे स्कूल में प्रवेश मिल जाता है।
फिल्म में मां के साये के बिना बच्ची के संघर्ष और भावनात्मक चुनौतियों को भी दिखाया गया है। कहानी यह संदेश देती है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद शिक्षा, मेहनत और सहयोग से आगे बढ़ने का रास्ता बनाया जा सकता है।
डांस कार्यक्रम में निर्देशक ने पहचानी प्रतिभा
काव्या भागलपुर के माउंट एसएससी की छात्रा हैं। अभिनय की दुनिया में उनका सफर एक डांस कार्यक्रम से शुरू हुआ। काव्या के मुताबिक, वह शुरुआत में डांस करने गई थीं। इसी दौरान फिल्म के निर्देशक ने उनके हाव-भाव और अभिनय क्षमता को देखा और पसंद किया।
इसके बाद निर्देशक ने उनकी बड़ी बहन से बातचीत की और उन्हें फिल्म में काम करने का अवसर मिला। इस तरह काव्या को पहली बार बड़े पर्दे पर अभिनय करने का मौका मिला।
कैमरे के सामने संवाद बोलना था चुनौतीपूर्ण
काव्या के लिए फिल्म की शूटिंग एक नया अनुभव था। डांस कार्यक्रमों के कारण उन्हें कैमरे की थोड़ी जानकारी थी, लेकिन कैमरे के सामने संवाद बोलना आसान नहीं था।
काव्या बताती हैं कि शुरुआत में उन्हें डर लगता था कि वह संवाद ठीक से बोल पाएंगी या नहीं। लगातार अभ्यास और कोशिश से उन्होंने कैमरे के सामने बोलना सीखा।
शूटिंग के दौरान कुछ दृश्य उनके लिए चुनौतीपूर्ण भी रहे। एक दृश्य में मिट्टी के बर्तन में दूध उबालना था। इसे सही तरीके से फिल्माने के लिए उन्हें कई बार रीटेक देना पड़ा।
फिल्म को मिली पहचान से बढ़ा उत्साह
काव्या को शुरुआत में अंदाजा नहीं था कि फिल्म को इतनी बड़ी पहचान मिलेगी। अब हजारों फिल्मों के बीच ‘डॉक्टर बेटियां’ का टॉप-100 में शामिल होना उनके लिए खास उपलब्धि है।
फिल्म के निर्देशक को भी सम्मानित किया गया है। इस उपलब्धि से फिल्म की पूरी टीम को पहचान मिली है। खास बात यह है कि फिल्म की शूटिंग भागलपुर में हुई, जिससे स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा को भी मंच मिला है।
पर्दे पर डॉक्टर का किरदार, असल जिंदगी में भी यही सपना
काव्या की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि फिल्म में डॉक्टर बनने का सपना देखने वाली बच्ची का किरदार निभाने वाली काव्या वास्तविक जीवन में भी डॉक्टर बनना चाहती हैं।
वह बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखती हैं। फिल्म में काम करने के बाद उनका यह लक्ष्य और मजबूत हुआ है। काव्या का कहना है कि वह भविष्य में उन गरीब और जरूरतमंद लोगों का मुफ्त इलाज करना चाहती हैं, जो आर्थिक परेशानी के कारण बेहतर चिकित्सा सुविधा नहीं ले पाते।
उनका मानना है कि पैसों की कमी के कारण किसी व्यक्ति को इलाज से वंचित नहीं रहना चाहिए।
छोटे शहरों की प्रतिभाओं के लिए काव्या का संदेश
काव्या का मानना है कि भागलपुर जैसे छोटे शहरों में भी प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। जरूरत है तो बस सही अवसर और मार्गदर्शन की। वह दूसरे युवा कलाकारों को सलाह देती हैं कि शुरुआत में असफलता के डर से पीछे नहीं हटना चाहिए। अपने सपनों को पूरा करने के लिए लगातार मेहनत और अभ्यास करते रहना चाहिए।
भागलपुर की इस 14 वर्षीय छात्रा का सफर पढ़ाई, अभिनय और डॉक्टर बनने के सपने का खूबसूरत मेल है। फिल्म ‘डॉक्टर बेटियां’ के जरिए काव्या ने अपनी अभिनय प्रतिभा दिखाई है, वहीं वास्तविक जीवन में जरूरतमंदों की सेवा करने का उनका सपना उन्हें एक अलग पहचान देता है।
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