Tuesday, November 3, 2026

बिहार में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना होगी बंद? सम्राट चौधरी की अपील के बाद बढ़ी चर्चा

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Bihar News | 3 नवंबर 2026: बिहार में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट मुफ्त बिजली देने वाली योजना को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने आर्थिक रूप से संपन्न और आयकर देने वाले लोगों से बिजली सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की है। इसके बाद सवाल उठने लगे हैं कि क्या सरकार भविष्य में इस योजना को बंद करने या इसके दायरे में बदलाव करने की तैयारी कर रही है?

हालांकि, फिलहाल योजना को बंद करने का कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री की अपील का आधार बिजली सब्सिडी पर सरकार का बढ़ता वित्तीय खर्च बताया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने संपन्न उपभोक्ताओं से क्या कहा?

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि बिहार सरकार बिजली उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए बड़े स्तर पर सब्सिडी दे रही है। उनके अनुसार, राज्य में करीब 1.92 करोड़ बिजली कनेक्शनों को 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली का लाभ मिल रहा है।

उन्होंने खास तौर पर आयकरदाताओं और आर्थिक रूप से सक्षम परिवारों से इस सुविधा का स्वेच्छा से परित्याग करने का अनुरोध किया। मुख्यमंत्री का कहना है कि सब्सिडी छोड़ने से सरकार के संसाधनों की बचत होगी और उस राशि का इस्तेमाल शिक्षा तथा विकास कार्यों में किया जा सकेगा।

बिजली सब्सिडी के लिए 23,165 करोड़ रुपये का प्रावधान

बिहार सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत 23,165 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। इसमें 18,005 करोड़ रुपये एनटीपीसी और 5,160 करोड़ रुपये बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी को उपलब्ध कराने की व्यवस्था बताई गई है।

इस हिसाब से सरकार की ओर से बिजली क्षेत्र को दी जाने वाली सहायता का औसत मासिक आकार करीब 1,930 करोड़ रुपये बैठता है। यह राशि केवल घरेलू उपभोक्ताओं के बिल में मिलने वाली छूट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था से जुड़ी सहायता भी इसमें शामिल है।

अगस्त 2025 से लागू है 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना

बिहार सरकार ने 18 जुलाई 2025 को घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को हर महीने 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली देने का फैसला किया था। यह व्यवस्था 1 अगस्त 2025 से लागू हुई।

इसके तहत घरेलू उपभोक्ताओं को मासिक खपत के पहले 125 यूनिट पर 100 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है। यदि किसी परिवार की बिजली खपत 125 यूनिट से अधिक होती है, तो अतिरिक्त यूनिट का भुगतान लागू दरों के अनुसार करना पड़ता है।

योजना की घोषणा के समय करीब 1.87 करोड़ घरेलू उपभोक्ताओं को लाभ मिलने का अनुमान लगाया गया था।

पिछले वर्षों में लगातार बढ़ा सब्सिडी का खर्च

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिहार में बिजली सब्सिडी का वित्तीय आकार पिछले कुछ वर्षों में बढ़ा है।

  • 2023-24: करीब 13,114 करोड़ रुपये।
  • 2024-25: करीब 15,343 करोड़ रुपये।
  • 2025-26: शुरुआती प्रावधान 15,995 करोड़ रुपये था। बाद में 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के लिए 3,797 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि स्वीकृत हुई। इससे कुल प्रावधान लगभग 19,792 करोड़ रुपये हो गया।
  • 2026-27: मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के लिए 23,165 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि बिजली क्षेत्र में सरकारी सहायता का बजट बढ़ा है। इसी पृष्ठभूमि में सरकार संपन्न उपभोक्ताओं से सब्सिडी छोड़ने की अपील कर रही है।

क्या आयकर देने वाले सभी लोग छोड़ेंगे सब्सिडी?

मुख्यमंत्री की अपील के बाद एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि आर्थिक रूप से सक्षम उपभोक्ता किसे माना जाएगा। क्या केवल आयकर देने वाले परिवार इस श्रेणी में आएंगे या बड़े व्यवसायियों, अधिक आय वाले पेशेवरों और संपन्न परिवारों को भी इसमें शामिल किया जाएगा?

उपलब्ध आयकर आंकड़ों के मुताबिक, वित्तीय वर्ष 2024-25 में बिहार से करीब 25.13 लाख लोगों ने आयकर रिटर्न दाखिल किया था। इनमें लगभग 18.79 लाख रिटर्न में शून्य कर देनदारी दर्ज थी। इस आधार पर करीब 6.34 लाख लोगों पर कर देनदारी होने का अनुमान लगाया गया है।

हालांकि, आयकर रिटर्न दाखिल करना और वास्तव में कर भुगतान करना अलग-अलग बातें हैं। इसी तरह, किसी व्यक्ति की कर देनदारी के आधार पर पूरे परिवार की आर्थिक स्थिति का आकलन करना भी आसान नहीं है।

LPG सब्सिडी छोड़ने की मुहिम का दिया जा रहा उदाहरण

केंद्र सरकार ने वर्ष 2015 में आर्थिक रूप से सक्षम एलपीजी उपभोक्ताओं से गैस सब्सिडी स्वेच्छा से छोड़ने की अपील की थी। इस अभियान को ‘Give It Up’ नाम दिया गया था।

इसका उद्देश्य संपन्न परिवारों को सब्सिडी छोड़ने के लिए प्रेरित करना था, ताकि सरकारी संसाधनों का उपयोग जरूरतमंद लोगों के लिए किया जा सके। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2025 तक देशभर में करीब 1.15 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता अपनी गैस सब्सिडी छोड़ चुके थे।

बिहार में भी इस अभियान के तहत लाखों उपभोक्ताओं ने सब्सिडी छोड़ी थी। अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिजली सब्सिडी के मामले में भी इसी तरह की स्वैच्छिक पहल की अपील की है।

अर्थशास्त्री बोले- इससे सीमित वित्तीय राहत मिल सकती है

अर्थशास्त्री डॉ. विद्यार्थी विकास के मुताबिक, बिजली सब्सिडी पर सरकार का खर्च काफी अधिक है। उनका आकलन है कि यदि आयकर देने वाले उपभोक्ता सब्सिडी छोड़ भी देते हैं, तो सरकार को करीब 45 से 50 करोड़ रुपये की ही राहत मिल सकती है।

उनके अनुसार, 23 हजार करोड़ रुपये से अधिक के कुल सब्सिडी प्रावधान के मुकाबले यह बचत बहुत कम होगी। उन्होंने आशंका जताई कि सरकार भविष्य में सब्सिडी के बोझ को कम करने के लिए धीरे-धीरे दूसरे कदम भी उठा सकती है।

यह अर्थशास्त्री का आकलन है, सरकार की घोषित नीति या योजना बंद करने का आधिकारिक संकेत नहीं।

RJD ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल

मुख्यमंत्री की अपील पर राष्ट्रीय जनता दल ने सवाल उठाए हैं। पार्टी प्रवक्ता एजाज अहमद ने आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान मुफ्त बिजली का वादा करके लोगों का समर्थन हासिल किया गया और अब सब्सिडी खत्म करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि सरकार की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है और स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने की अपील भविष्य में योजना को समाप्त करने की भूमिका तैयार कर सकती है।

BJP ने मुख्यमंत्री की अपील का किया समर्थन

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता प्रदीप दुबे ने मुख्यमंत्री की अपील को सकारात्मक पहल बताया। उन्होंने केंद्र सरकार के एलपीजी सब्सिडी छोड़ने के अभियान का उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार के संपन्न उपभोक्ता भी राज्य के विकास के लिए बिजली सब्सिडी छोड़ने में सहयोग कर सकते हैं।

उनका मानना है कि इस तरह बचने वाले सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल विकास कार्यों में किया जा सकेगा।

राजनीतिक विश्लेषक ने जरूरतमंदों को राहत जारी रहने की जताई उम्मीद

वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक सुनील पांडे ने कहा कि बिजली सब्सिडी से सरकार पर वित्तीय दबाव पड़ता है। उनके मुताबिक, संपन्न लोगों से सब्सिडी छोड़ने की अपील को विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

उन्होंने उम्मीद जताई कि जिन परिवारों को वास्तव में इस आर्थिक सहायता की जरूरत है, उनकी सब्सिडी जारी रहनी चाहिए। हालांकि, योजना के भविष्य को लेकर अंतिम निर्णय सरकार की नीति और आधिकारिक घोषणाओं से ही स्पष्ट होगा।

तो क्या बंद हो जाएगी 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना?

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना बंद होने की पुष्टि नहीं होती है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केवल आर्थिक रूप से सक्षम और आयकर देने वाले उपभोक्ताओं से स्वेच्छा से सब्सिडी छोड़ने का अनुरोध किया है।

सरकार की ओर से योजना समाप्त करने, सभी उपभोक्ताओं को इससे बाहर करने या पात्रता की नई शर्तें लागू करने की कोई आधिकारिक घोषणा इस खबर में नहीं दी गई है।

इसलिए फिलहाल उपभोक्ताओं को योजना बंद होने की खबरों को लेकर भ्रमित होने की जरूरत नहीं है। योजना में किसी बदलाव की स्थिति में सरकार की आधिकारिक अधिसूचना ही निर्णायक होगी।

Bharat Superfast News | Bihar Desk

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