बैंकिंग, ईमेल, सोशल मीडिया और ऑनलाइन सब्सक्रिप्शन से जुड़े खातों का भविष्य तय करना जरूरी, छोटी-सी तैयारी से परिवार को भविष्य की परेशानी से बचाया जा सकता है
टेक डेस्क | 3 नवंबर 2026: आज के डिजिटल दौर में किसी व्यक्ति की संपत्ति केवल जमीन, मकान, बैंक बैलेंस और गहनों तक सीमित नहीं रह गई है। ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट, ऑनलाइन बैंकिंग, डिजिटल सब्सक्रिप्शन, ई-कॉमर्स प्रोफाइल और क्लाउड में मौजूद निजी दस्तावेज भी व्यक्ति की डिजिटल संपत्ति का हिस्सा हैं। लेकिन किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद इन खातों का क्या होगा? परिवार के सदस्य इन्हें कैसे संभालेंगे और किन खातों को बंद करना जरूरी होगा? ऐसे सवालों पर अधिकतर लोग पहले से ध्यान नहीं देते।
डिजिटल खातों के प्रबंधन की योजना नहीं होने पर परिवार को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इसलिए समय रहते ऑनलाइन खातों की जानकारी, जरूरी निर्देश और सुरक्षित पहुंच की व्यवस्था करना महत्वपूर्ण है।
वसीयत में डिजिटल संपत्ति का जिक्र भी जरूरी
एक अध्ययन में 60 वर्ष से अधिक उम्र के 21 अमेरिकी वयस्कों से बातचीत कर यह समझने की कोशिश की गई कि वे अपनी मृत्यु के बाद ऑनलाइन खातों के प्रबंधन को लेकर कितने तैयार हैं।
अध्ययन में शामिल कई लोगों ने अपनी भौतिक संपत्ति और पैसों के बंटवारे के लिए वसीयत बनवा रखी थी। वे चाहते थे कि उनके परिवार को उनकी संपत्ति तक आसानी से पहुंच मिले। हालांकि, ईमेल, सोशल मीडिया, ऑनलाइन बिल भुगतान और दूसरी डिजिटल सेवाओं के लिए उन्होंने कोई स्पष्ट व्यवस्था नहीं बनाई थी।
कुछ लोगों को लगता था कि पासवर्ड की जानकारी परिजनों को दे देना ही पर्याप्त होगा। लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक, डिजिटल खातों का हस्तांतरण इससे कहीं अधिक जटिल हो सकता है।
पासवर्ड की सूची बनाएं, लेकिन उसे सुरक्षित रखें
ऑनलाइन खातों के प्रबंधन में सबसे बड़ी चुनौती पासवर्ड की जानकारी उपलब्ध कराना है। अध्ययन में शामिल अधिकतर बुजुर्ग अपने पासवर्ड कागज या डिजिटल फाइल में सुरक्षित रखते थे। कुछ ने यह जानकारी भरोसेमंद परिजनों के साथ भी साझा की थी।
हालांकि, बार-बार पासवर्ड बदलने के कारण पुरानी सूची अपडेट नहीं रह पाती। ऐसे में परिवार के सदस्यों को सही पासवर्ड खोजने में परेशानी हो सकती है।
इस समस्या से बचने के लिए पासवर्ड मैनेजर का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें अलग-अलग खातों के पासवर्ड सुरक्षित तरीके से रखे जा सकते हैं। कुछ पासवर्ड मैनेजर में आपातकालीन पहुंच की सुविधा भी होती है, जिसके तहत निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने पर नामित व्यक्ति को खाते की जानकारी मिल सकती है।
मास्टर पासवर्ड को भी सुरक्षित स्थान पर रखने और उस तक पहुंच के बारे में भरोसेमंद व्यक्ति को जानकारी देने की व्यवस्था की जा सकती है। हालांकि, पासवर्ड या संवेदनशील जानकारी असुरक्षित तरीके से साझा नहीं करनी चाहिए।
टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन बन सकता है बड़ी चुनौती
केवल पासवर्ड होने से हर ऑनलाइन खाते तक पहुंच मिलना जरूरी नहीं है। कई सेवाओं में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन यानी दो-स्तरीय प्रमाणीकरण लागू होता है। इसमें पासवर्ड के अलावा मोबाइल फोन या ईमेल पर भेजा गया अतिरिक्त कोड भी मांगा जाता है।
ऐसी स्थिति में व्यक्ति की मृत्यु के बाद यदि उसका मोबाइल नंबर बंद हो जाए या ईमेल तक पहुंच नहीं रहे, तो परिवार के लिए दूसरे खातों को संभालना मुश्किल हो सकता है।
इसलिए पहले से यह पहचानना जरूरी है कि किन खातों और उपकरणों के माध्यम से दूसरे ऑनलाइन खातों तक पहुंच मिलती है। परिवार के लिए स्पष्ट निर्देश तैयार किए जा सकते हैं कि आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने तक संबंधित मोबाइल नंबर और ईमेल खाते को कैसे संभालना है।
Google और Facebook में भी उपलब्ध हैं विशेष सुविधाएं
कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म उपयोगकर्ताओं को यह विकल्प देते हैं कि वे अपनी मृत्यु के बाद अपने खाते या डेटा के प्रबंधन के लिए किसी भरोसेमंद व्यक्ति को पहले से नामित कर सकें।
गूगल और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर ऐसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इनके माध्यम से उपयोगकर्ता अपनी पसंद के अनुसार कुछ डिजिटल जानकारी के प्रबंधन की व्यवस्था कर सकते हैं।
हालांकि, हर ऑनलाइन सेवा में यह विकल्प मौजूद नहीं होता। इसलिए जिन प्लेटफॉर्म का नियमित इस्तेमाल किया जाता है, उनकी नीतियों और उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी पहले से लेना बेहतर है।
मृत्यु के बाद भी चलते रह सकते हैं सब्सक्रिप्शन और भुगतान
किसी व्यक्ति की मृत्यु होने के बाद उसके सभी ऑनलाइन खाते अपने आप बंद नहीं होते। कई सेवाओं में खाते सक्रिय रह सकते हैं और उनसे जुड़े भुगतान भी जारी रह सकते हैं।
उदाहरण के लिए, वीडियो और म्यूजिक स्ट्रीमिंग सेवाओं की मासिक फीस, डिजिटल अखबारों की सदस्यता और दूसरी ऑनलाइन सेवाओं के ऑटो-पेमेंट परिवार की जानकारी के बिना कटते रह सकते हैं।
इसके अलावा, निष्क्रिय पड़े ऑनलाइन खातों का साइबर अपराधी गलत इस्तेमाल भी कर सकते हैं। पहचान की चोरी, स्पैम और धोखाधड़ी जैसी आशंकाएं बनी रहती हैं।
इसलिए प्रत्येक खाते के सामने स्पष्ट निर्देश दर्ज करना उपयोगी होगा कि उसे बंद करना है, जारी रखना है या उससे जुड़ी कोई अन्य प्रक्रिया पूरी करनी है।
डिजिटल संपत्ति सुरक्षित रखने के लिए अपनाएं ये उपाय
डिजिटल खातों का बेहतर प्रबंधन करने के लिए कुछ जरूरी कदम पहले से उठाए जा सकते हैं:
- सभी खातों की सूची बनाएं: ईमेल, सोशल मीडिया, बैंकिंग, ऑनलाइन शॉपिंग और सब्सक्रिप्शन सेवाओं की जानकारी व्यवस्थित रखें।
- पासवर्ड सुरक्षित रखें: पासवर्ड मैनेजर का उपयोग करें और उसकी आपातकालीन सुविधा की जानकारी लें।
- भरोसेमंद व्यक्ति नामित करें: जहां सुविधा उपलब्ध हो, वहां मृत्यु के बाद खाते या डेटा के प्रबंधन के लिए किसी व्यक्ति को चुनें।
- दो-स्तरीय सुरक्षा पर ध्यान दें: उन मोबाइल नंबरों और ईमेल खातों की पहचान करें, जिनसे अन्य खातों का सत्यापन होता है।
- खातों के बारे में निर्देश लिखें: स्पष्ट करें कि किन खातों को बंद करना है और किनका डेटा सुरक्षित रखना है।
- निष्क्रिय खाते बंद करें: जिन डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल नहीं करते, उनकी सदस्यता और खाते समय-समय पर जांचें।
पहले से तैयारी करने से परिवार को मिलेगी राहत
डिजिटल संपत्ति की योजना बनाना केवल तकनीकी काम नहीं, बल्कि परिवार के भविष्य को ध्यान में रखते हुए उठाया गया जरूरी कदम है। समय रहते खातों की सूची, सुरक्षित पासवर्ड व्यवस्था और जरूरी निर्देश तैयार करने से उत्तराधिकारियों को अनावश्यक परेशानियों से बचाया जा सकता है।
इससे यह भी सुनिश्चित करने में मदद मिलती है कि व्यक्ति की डिजिटल पहचान, निजी डेटा और ऑनलाइन संपत्ति का प्रबंधन उसकी इच्छाओं और संबंधित प्लेटफॉर्म के नियमों के अनुरूप हो।
Bharat Superfast News | Technology Desk
