पटना | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
पटना हाईकोर्ट ने नाबालिग बच्ची के अधिकारों, सुरक्षा और भविष्य से जुड़े एक मामले में गंभीर रुख अपनाया है। अदालत के सामने आरोप लगाया गया कि बच्ची को उसकी मां की चाय की दुकान पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए हाईकोर्ट ने दरभंगा के फैमिली कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश को दो सप्ताह के भीतर पूरे प्रकरण की गहन और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश दिया है।
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की खंडपीठ ने कहा कि जांच में यदि बच्ची से श्रम कराए जाने या उसकी उपेक्षा किए जाने की पुष्टि होती है, तो उसके संरक्षण और सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
दरभंगा फैमिली कोर्ट को दो सप्ताह की समय-सीमा
हाईकोर्ट ने दरभंगा फैमिली कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह दो सप्ताह के अंदर यह पता लगाए कि बच्ची से वास्तव में चाय की दुकान पर काम कराया जा रहा है या नहीं। अदालत ने जांच को निष्पक्ष और विस्तृत तरीके से पूरा करने पर जोर दिया है।
खंडपीठ के मुताबिक, बच्ची की सुरक्षा और कल्याण सर्वोपरि है। यदि जांच में उसके साथ उपेक्षा या किसी तरह की असुरक्षा सामने आती है, तो फैमिली कोर्ट को बिना अनावश्यक देरी के उसके हित में उचित आदेश पारित करने होंगे।
पिता ने बेटी के अधिकारों को लेकर दायर की याचिका
यह मामला दरभंगा के रहने वाले दीपक (बदला हुआ नाम) की याचिका से जुड़ा है। उन्होंने अपनी नाबालिग बेटी के अधिकारों और सुरक्षित भविष्य को लेकर पटना हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
याचिकाकर्ता पिता का आरोप है कि बच्ची की मां पहले से पारित अदालती आदेशों का पालन नहीं कर रही हैं और मामले की सुनवाई में भी अपेक्षित सहयोग नहीं दे रही हैं। पिता की ओर से अदालत को बताया गया कि बच्ची को पढ़ाई के माहौल से दूर रखकर चाय की दुकान पर काम करने के लिए विवश किया जा रहा है।
हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि के लिए हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट से जांच कराने को कहा है।
गार्जियनशिप केस की रोजाना होगी सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले में अनावश्यक देरी रोकने के लिए गार्जियनशिप केस की सुनवाई दिन-प्रतिदिन करने का निर्देश दिया है। अदालत का उद्देश्य तीन महीने के भीतर मामले से जुड़ी अनिश्चितता दूर कर बच्ची के हित में उचित निर्णय की दिशा में आगे बढ़ना है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बच्ची के संरक्षण और भविष्य से जुड़े सवालों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई होनी चाहिए।
राज्य सरकार ने सुरक्षा और देखभाल का भरोसा दिया
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से भी बच्ची की सुरक्षा और उचित देखभाल सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता जताई गई। सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया कि बच्ची को आवश्यक संरक्षण और देखभाल मिलनी चाहिए।
हाईकोर्ट ने भी स्पष्ट किया कि किसी नाबालिग के अधिकारों, शिक्षा, सुरक्षा और कल्याण से समझौता नहीं किया जा सकता। अब दरभंगा फैमिली कोर्ट की जांच और आगे की सुनवाई से यह तय होगा कि बच्ची की मौजूदा स्थिति क्या है और उसके सर्वोत्तम हित में कौन-से कदम जरूरी हैं।
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