हेल्थ डेस्क | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
ओमेगा-3 फैटी एसिड को अक्सर दिमाग की सेहत, याददाश्त और एकाग्रता के लिए फायदेमंद बताया जाता है। खासकर DHA को मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना और सामान्य कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी वजह से बाजार में मिलने वाले फिश ऑयल और ओमेगा-3 सप्लीमेंट को याददाश्त बढ़ाने तथा अल्जाइमर जैसी बीमारी से बचाव के उपाय के रूप में प्रचारित किया जाता है। लेकिन क्या इन दावों को वैज्ञानिक अध्ययन का समर्थन मिलता है? हालिया शोध के नतीजे इस बारे में एक अलग तस्वीर पेश करते हैं।
अध्ययन में क्या सामने आया?
अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के केक स्कूल ऑफ मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने 55 से 80 वर्ष की उम्र के 365 लोगों पर दो साल तक अध्ययन किया। इन प्रतिभागियों में अल्जाइमर रोग का जोखिम अधिक था।
अध्ययन के दौरान एक समूह को प्रतिदिन 2,000 मिलीग्राम DHA सप्लीमेंट दिया गया, जबकि दूसरे समूह को प्लेसबो दिया गया। प्लेसबो ऐसी गोली होती है, जिसमें सक्रिय चिकित्सीय घटक नहीं होता।
शोध के अनुसार, DHA सप्लीमेंट लेने वाले प्रतिभागियों के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी में DHA का स्तर बढ़ा। हालांकि, याददाश्त, सोचने-समझने की क्षमता और मस्तिष्क के सिकुड़ने की प्रक्रिया पर इसका कोई महत्वपूर्ण लाभ सामने नहीं आया। दोनों समूहों के नतीजों में इन पहलुओं पर खास अंतर नहीं पाया गया।
इसका अर्थ है कि शरीर में DHA का स्तर बढ़ना अपने आप में याददाश्त बेहतर होने या अल्जाइमर से बचाव की गारंटी नहीं है।
क्या ओमेगा-3 सप्लीमेंट अल्जाइमर का खतरा घटाते हैं?
इस अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि अधिक मात्रा में DHA सप्लीमेंट लेने से दो साल की अवधि में प्रतिभागियों की याददाश्त या संज्ञानात्मक क्षमता में स्पष्ट सुधार नहीं हुआ। इसलिए केवल फिश ऑयल कैप्सूल के भरोसे अल्जाइमर से बचाव की उम्मीद करना उचित नहीं है।
हालांकि, इस अध्ययन के आधार पर यह निष्कर्ष भी नहीं निकालना चाहिए कि ओमेगा-3 का शरीर में कोई महत्व नहीं है। DHA मस्तिष्क की कोशिकाओं के लिए जरूरी फैटी एसिड है, लेकिन सप्लीमेंट के रूप में इसकी अतिरिक्त मात्रा लेने से हर व्यक्ति को याददाश्त संबंधी लाभ मिलेगा, इसका ठोस प्रमाण नहीं है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं?
पी.डी. हिंदुजा हॉस्पिटल एंड मेडिकल रिसर्च सेंटर के कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कौस्तुभ महाजन के मुताबिक, DHA मस्तिष्क की कोशिकाओं की संरचना और कार्यप्रणाली के लिए महत्वपूर्ण है। लेकिन किसी पोषक तत्व का शरीर के लिए जरूरी होना और उसे सप्लीमेंट के रूप में लेने से याददाश्त में सुधार होना दो अलग-अलग बातें हैं।
उनके अनुसार, मस्तिष्क का कामकाज कई कारकों पर निर्भर करता है। इनमें रक्त प्रवाह, मेटाबॉलिज्म, नींद और शारीरिक गतिविधियां भी शामिल हैं।
वहीं, फोर्टिस हॉस्पिटल, कल्याण के न्यूरोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. राकेश लाला का कहना है कि ओमेगा-3 सप्लीमेंट को याददाश्त और एकाग्रता से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन इन्हें लगातार याददाश्त बेहतर करने या डिमेंशिया रोकने का प्रमाणित उपाय मानने के लिए पर्याप्त ठोस साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं।
मस्तिष्क की सेहत के लिए किन आदतों पर दें ध्यान?
विशेषज्ञों के मुताबिक, दिमाग की सेहत बनाए रखने के लिए किसी एक सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय समग्र जीवनशैली पर ध्यान देना जरूरी है।
1. संतुलित खान-पान: मछली, अखरोट, चिया सीड्स और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ ओमेगा-3 के स्रोत हैं। संतुलित आहार में विभिन्न पोषक तत्वों को शामिल करना उपयोगी है।
2. नियमित शारीरिक गतिविधि: अपनी उम्र और स्वास्थ्य के अनुकूल नियमित व्यायाम शरीर के साथ-साथ मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।
3. पर्याप्त नींद: अच्छी नींद मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली और याददाश्त से जुड़ी प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती है।
4. दूसरी बीमारियों पर नियंत्रण: हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियों का उचित इलाज और नियमित निगरानी भी मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
विशेषज्ञ संतुलित खान-पान और नियमित गतिविधियों के साथ समग्र स्वास्थ्य पर ध्यान देने की सलाह देते हैं। मेडिटेरेनियन डाइट जैसे खान-पान के तरीकों पर भी मस्तिष्क और हृदय स्वास्थ्य के संदर्भ में अध्ययन किए गए हैं।
बिना डॉक्टर की सलाह के सप्लीमेंट लेना क्यों हो सकता है नुकसानदेह?
ओमेगा-3 सप्लीमेंट हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होते। इनका अधिक सेवन कुछ लोगों में पेट खराब होना, सीने में जलन और दस्त जैसी समस्याएं पैदा कर सकता है।
डॉ. राकेश लाला के अनुसार, खून पतला करने वाली दवाएं लेने वाले लोगों को ओमेगा-3 सप्लीमेंट के इस्तेमाल में विशेष सावधानी रखनी चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए किसी भी सप्लीमेंट को शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। केवल विज्ञापन या दूसरों के अनुभव के आधार पर इसकी खुराक तय नहीं करनी चाहिए।
याददाश्त में बदलाव हो तो कारण की जांच कराएं
याददाश्त में कमी को हमेशा बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा मानना सही नहीं है। तनाव, नींद की कमी और दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी याददाश्त तथा एकाग्रता को प्रभावित कर सकती हैं।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार याददाश्त में बदलाव, ध्यान लगाने में परेशानी या सोचने-समझने में कठिनाई महसूस हो रही है, तो योग्य डॉक्टर से परामर्श करना चाहिए। सही कारण की पहचान के बाद ही उचित उपचार या देखभाल तय की जा सकती है।
निष्कर्ष: ओमेगा-3 फैटी एसिड शरीर और मस्तिष्क के लिए महत्वपूर्ण हैं, लेकिन उपलब्ध अध्ययन के आधार पर DHA सप्लीमेंट को अल्जाइमर से बचाव या याददाश्त बढ़ाने का निश्चित उपाय नहीं माना जा सकता। संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य समस्याओं का उचित प्रबंधन मस्तिष्क की सेहत के लिए अहम हैं।
Bharat Superfast News
