रामगढ़ | 2 नवंबर 2026 | Bharat Superfast News
Ramgarh Road Development: झारखंड गठन के बाद पिछले 25 वर्षों में रामगढ़ जिले के सड़क नेटवर्क में कई बदलाव हुए हैं। कभी गड्ढों और कच्ची-पक्की सड़कों के कारण मुश्किल भरा सफर अब फोरलेन हाईवे, बाईपास और ग्रामीण सड़कों के विस्तार के साथ पहले से बेहतर हुआ है। राष्ट्रीय राजमार्गों के उन्नयन से लेकर दूरदराज के गांवों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने तक कई परियोजनाओं ने जिले की कनेक्टिविटी को नई दिशा दी है। अब आगामी वर्षों में सड़क नेटवर्क को और आधुनिक बनाने तथा गांवों को हाईवे, रेलवे स्टेशन और मंडियों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
झारखंड गठन के बाद रामगढ़ में बदला सड़क नेटवर्क
15 नवंबर 2000 को झारखंड राज्य के गठन के समय रामगढ़, हजारीबाग जिले का हिस्सा था। उस दौर में ग्रामीण इलाकों में धूल भरी और गड्ढों वाली सड़कें आम थीं। रांची-पटना मार्ग पर भी पुराने राष्ट्रीय राजमार्ग-33 की स्थिति बेहतर नहीं थी।
12 सितंबर 2007 को रामगढ़ अलग जिला बना। इसके बाद जिले में सड़क संपर्क को बेहतर बनाने की दिशा में कई परियोजनाओं पर काम हुआ। राष्ट्रीय राजमार्ग-20, जो पहले एनएच-33 के नाम से जाना जाता था, और एनएच-23 जिले के प्रमुख सड़क मार्गों में शामिल रहे हैं।
फोरलेन सड़क बनने से रांची का सफर हुआ आसान
सड़क विकास में एक महत्वपूर्ण पड़ाव वर्ष 2015 में आया, जब हजारीबाग-रांची के बीच लगभग 73.8 किलोमीटर लंबे फोरलेन मार्ग का निर्माण हुआ। इस परियोजना में रामगढ़ और कुजू बाईपास भी शामिल थे।
इस मार्ग के बनने से रांची और रामगढ़ के बीच यात्रा का समय घटने में मदद मिली। खबर के मुताबिक, पहले जहां इस सफर में करीब दो घंटे लगते थे, वहीं बाद में यह समय घटकर लगभग एक घंटे रह गया।
बेहतर सड़क संपर्क से यात्रियों के साथ-साथ व्यावसायिक गतिविधियों और माल परिवहन को भी सुविधा मिली।
पटेल चौक पर यातायात और सुरक्षा सुधारने के प्रयास
रांची-पटना मार्ग पर पटेल चौक जैसे दुर्घटना संभावित स्थानों पर यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए भी काम किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, यहां करीब 24.14 करोड़ रुपये की लागत से छह लेन का अंडरपास बनाया गया है। इसका उद्देश्य यातायात को सुचारु बनाना और हादसों की आशंका कम करना है।
इसके अलावा, कुजू के कोरिया घाटी क्षेत्र से पटेल चौक तक पुराने एनएच-33 के लगभग 14 किलोमीटर लंबे दो लेन मार्ग को करीब 277 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन में बदलने का काम किया जा रहा है।
वहीं, पटेल चौक से सांडी तक लगभग 13 किलोमीटर सड़क को करीब 274 करोड़ रुपये की लागत से फोरलेन बनाने का प्रस्ताव है। इस परियोजना के पूरा होने पर संबंधित क्षेत्र में सड़क संपर्क और यातायात क्षमता बेहतर हो सकती है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना से गांवों को मिला संपर्क
रामगढ़ जिले में सड़क विकास का एक बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने से संबंधित है। खबर के अनुसार, वर्ष 2000 के आसपास जिले के 40 प्रतिशत से अधिक गांव बरसात के दौरान संपर्क से कट जाते थे।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पतरातू, मांडू, दुलमी, गोला और चितरपुर के दूरस्थ गांवों तथा टोलों को बारहमासी सड़कों से जोड़ने की दिशा में काम हुआ।
नयामोड़-चितरपुर-सांडी-रजरप्पा मार्ग जैसी सड़कों ने खनन क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान बनाने में भूमिका निभाई है। ग्रामीण सड़कों का विस्तार स्थानीय लोगों के आवागमन, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के लिए भी उपयोगी साबित हो सकता है।
भारतमाला परियोजना के तहत बनेगा फोरलेन एक्सप्रेसवे
रामगढ़ की कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए भारतमाला परियोजना के तहत ओरमांझी से गोला होते हुए बोकारो जिले के जैनामोड़ तक लगभग 60 किलोमीटर लंबे फोरलेन एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जा रहा है।
रिपोर्ट में इस परियोजना की लागत करीब 2,224 करोड़ रुपये बताई गई है। इसमें हाथियों की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए पांच अंडरपास या फ्लाईओवर बनाए जाने का भी उल्लेख है।
परियोजना से रांची, रामगढ़ और बोकारो के बीच संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है। इससे औद्योगिक और खनन क्षेत्रों में माल परिवहन को भी सुविधा मिल सकती है।
अगले 25 वर्षों की योजना में स्मार्ट कनेक्टिविटी पर जोर
आने वाले वर्षों में सड़क निर्माण के साथ आधुनिक तकनीक और बेहतर यातायात प्रबंधन पर ध्यान देने की योजना है। केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण यानी पीएमजीएसवाई-4 को मंजूरी दी थी।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस योजना के तहत वर्ष 2011 की जनगणना के आधार पर पात्र ग्रामीण बस्तियों को सड़क संपर्क उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा गया है। खबर में रामगढ़ के कुछ दूरस्थ और प्रभावित क्षेत्रों के टोलों को भी इस योजना के दायरे में शामिल किए जाने की संभावना का उल्लेख है।
हालांकि, संबंधित बस्तियों की पात्रता और परियोजनाओं की वास्तविक स्थिति की पुष्टि आधिकारिक सूची से किया जाना आवश्यक है।
राष्ट्रीय राजमार्गों और शहर की सड़कों को आधुनिक बनाने की योजना
भविष्य की योजनाओं में राष्ट्रीय राजमार्गों की क्षमता बढ़ाने, बेहतर यातायात प्रबंधन और लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास पर जोर दिया जा रहा है। खबर में एनएच-20 और एनएच-23 को छह लेन तथा एक्सेस-कंट्रोल्ड मार्गों के रूप में विकसित करने की योजना का भी उल्लेख है।
रामगढ़ शहर में थाना चौक, नेहरू रोड और छावनी क्षेत्र की सड़कों का चौड़ीकरण करने तथा नो-पार्किंग जोन विकसित करने जैसे उपायों पर भी ध्यान दिया जाना है। इन प्रयासों का उद्देश्य शहर में जाम की समस्या कम करना और वाहनों की आवाजाही को अधिक व्यवस्थित बनाना है।
ड्रोन सर्वे और ग्रीन रोड तकनीक से रखरखाव की तैयारी
सड़क नेटवर्क के रखरखाव और निगरानी में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल की भी योजना बताई गई है। इसमें ड्रोन सर्वे और ग्रीन रोड तकनीक के उपयोग के साथ महिला स्वयं सहायता समूहों की भागीदारी से सड़क रखरखाव को बढ़ावा देने का विचार शामिल है।
भविष्य की परिकल्पना गांवों से हाईवे तक पहुंच को आसान बनाने की है। खबर में ‘गांव से हाईवे तक 30 मिनट’ के मॉडल का उल्लेख किया गया है। हालांकि, इसे हासिल करने के लिए सड़क परियोजनाओं की समयबद्ध पूर्ति, नियमित रखरखाव और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप योजना बनाना महत्वपूर्ण होगा।
रामगढ़ के विकास में सड़क संपर्क की अहम भूमिका
पिछले 25 वर्षों में रामगढ़ में राष्ट्रीय राजमार्गों, बाईपास और ग्रामीण सड़कों के विस्तार से आवागमन की सुविधाओं में बदलाव आया है। अब आगे की चुनौती मौजूदा सड़क नेटवर्क को बेहतर बनाए रखने, निर्माणाधीन परियोजनाओं को समय पर पूरा करने और दूरस्थ गांवों तक सुरक्षित तथा सुविधाजनक संपर्क पहुंचाने की है।
यदि प्रस्तावित योजनाएं निर्धारित समय और मानकों के अनुरूप पूरी होती हैं, तो रामगढ़ में ग्रामीण आवागमन, औद्योगिक गतिविधियों और क्षेत्रीय संपर्क को और मजबूती मिल सकती है।
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