28 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
भागलपुर: तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) में वेतन कटौती के विरोध में शिक्षकेत्तर कर्मचारियों का आंदोलन तेज हो गया है। बुधवार को कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय मुख्यालय, पीजी विभागों और विभिन्न कॉलेजों में प्रदर्शन करते हुए तालाबंदी की। कर्मचारी महासंघ ने घोषणा की है कि मांगें पूरी नहीं होने पर 31 अक्टूबर 2026 तक हड़ताल जारी रहेगी। इस वजह से शैक्षणिक और प्रशासनिक कामकाज प्रभावित हुआ है।
वेतन कटौती के खिलाफ कर्मचारियों ने की तालाबंदी
बिहार राज्य विश्वविद्यालय शिक्षकेत्तर कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारियों ने प्रक्षेत्रीय मंत्री सुशील मंडल के नेतृत्व में सुबह करीब 10:30 बजे बंद की शुरुआत की। प्रदर्शनकारियों ने बीएन कॉलेज, टीएनबी कॉलेज और पीजी के जूलॉजी, बॉटनी, केमिस्ट्री तथा फिजिक्स विभाग सहित विश्वविद्यालय मुख्यालय के विभिन्न संस्थानों को बंद कराया।
इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासनिक भवन की अलग-अलग शाखाओं में भी तालाबंदी की गई। प्रदर्शन के दौरान कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और प्रभारी कुलपति के प्रति विरोध जताया।
31 अक्टूबर तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान
कर्मचारी नेता सुशील मंडल के अनुसार, जब तक उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि मांगों की अनदेखी होने पर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।
महासंघ की ओर से विरोध प्रदर्शन के अलग-अलग तरीके अपनाने की भी बात कही गई है। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि वेतन में कटौती के कारण करीब 100 कर्मचारियों के सामने आर्थिक परेशानी खड़ी हो गई है। उनका दावा है कि कुछ कर्मचारी अपने बच्चों की स्कूल फीस तक जमा करने में कठिनाई महसूस कर रहे हैं।
वेतन कटौती वापस लेने समेत पांच मांगें
कर्मचारी महासंघ की प्रमुख मांगों में वेतन कटौती को वापस लेना और प्रोन्नति से जुड़े मामलों का समाधान शामिल है। संगठन ने कुल पांच प्रमुख मांगें रखे जाने की बात कही है।
कर्मचारियों का कहना है कि उनकी समस्याओं का समाधान होने तक आंदोलन जारी रहेगा। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से इन मांगों पर क्या निर्णय लिया गया है, इसकी आधिकारिक जानकारी उपलब्ध कराई गई खबर में नहीं दी गई है।
छात्रों और अभिभावकों को हुई परेशानी
विश्वविद्यालय और कॉलेजों में तालाबंदी के कारण प्रमाणपत्र और डिग्री लेने पहुंचे विद्यार्थियों को बिना काम कराए लौटना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंगेर से प्रोविजनल सर्टिफिकेट लेने आए अंकित कुमार और सौरभ कुमार को भी निराश होकर वापस जाना पड़ा।
वहीं, कहलगांव से डिग्री लेने पहुंचीं श्वेता कुमारी, प्रज्ञा कुमारी और जिया कुमारी को भी विश्वविद्यालय में काम नहीं होने के कारण परेशानी उठानी पड़ी। विद्यार्थियों को दोबारा आने के लिए कहा गया।
कॉलेजों और पीजी विभागों में पढ़ाई प्रभावित
हड़ताल और तालाबंदी का असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ा। कॉलेजों और पीजी विभागों में कक्षाएं प्रभावित हुईं। सुबह पढ़ाई के लिए पहुंचे कई विद्यार्थियों को वापस लौटना पड़ा।
प्रशासनिक कामकाज बाधित होने से प्रमाणपत्र और अन्य विश्वविद्यालय संबंधी कार्यों के लिए आने वाले छात्रों की परेशानी बढ़ गई है। यदि हड़ताल निर्धारित अवधि तक जारी रहती है, तो विद्यार्थियों को अपने जरूरी काम के लिए विश्वविद्यालय जाने से पहले स्थिति की जानकारी लेनी चाहिए।
आगे क्या होगा?
फिलहाल कर्मचारी महासंघ ने 31 अक्टूबर तक आंदोलन जारी रखने की बात कही है। अब सभी की नजर विश्वविद्यालय प्रशासन की प्रतिक्रिया और कर्मचारियों की मांगों पर होने वाली कार्रवाई पर है। यदि दोनों पक्षों के बीच समाधान निकलता है, तो कामकाज सामान्य होने की उम्मीद है।
BHARATSUPERFASTNEWS की अपील: विश्वविद्यालय जाने से पहले छात्र-छात्राएं संबंधित कॉलेज या विभाग से संपर्क कर लें, ताकि अनावश्यक परेशानी से बचा जा सके।
