चाईबासा, 24 अक्टूबर 2026: स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (SAIL) के अधिकारियों और श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में मजदूरों की कई लंबित समस्याओं पर ठोस समाधान नहीं निकल सका। बैठक मेघाहातुबुरू जनरल ऑफिस के कॉन्फ्रेंस हॉल में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता सेल के निदेशक (खान) विकास मनवाटी ने की।
बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था, कर्मचारियों के आवास, टाउनशिप की सड़कों, लंबित इंसेंटिव और खदानों में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन ले जाने पर प्रतिबंध जैसे मुद्दे उठाए गए। कई मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं होने से श्रमिक प्रतिनिधियों में नाराजगी देखी गई।
समाधान नहीं निकला तो होगा आंदोलन: रामा पांडेय
झारखंड मजदूर संघर्ष संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडेय ने बैठक को असफल बताते हुए प्रबंधन के रवैये पर असंतोष जताया। उन्होंने कहा कि मजदूरों की समस्याओं के समाधान के लिए सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
पांडेय ने चेतावनी दी कि यदि लंबित मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं की गई, तो संयुक्त श्रमिक यूनियनों के साथ मिलकर व्यापक आंदोलन शुरू किया जाएगा। श्रमिक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से लंबित समस्याओं का समाधान अब प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
किरीबुरू सेल अस्पताल की बदहाल व्यवस्था का मुद्दा उठा
बैठक में किरीबुरू सेल अस्पताल की चिकित्सा सुविधाओं पर विशेष चर्चा हुई। यूनियन प्रतिनिधियों ने सर्जन, हड्डी रोग विशेषज्ञ और स्त्री रोग विशेषज्ञ की कमी का मुद्दा उठाया। इसके साथ ही वर्षों से बंद ब्लड बैंक और रेफरल सुविधा से जुड़ी परेशानियों पर भी सवाल किए गए।
खबर के अनुसार, प्रबंधन की ओर से बताया गया कि डॉक्टर यहां आने के इच्छुक नहीं हैं। इस जवाब से श्रमिक प्रतिनिधि संतुष्ट नहीं हुए। उनका कहना था कि कर्मचारियों और उनके परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी है।
जर्जर सड़कें और पुराने आवासों की मरम्मत की मांग
श्रमिक संगठनों ने टाउनशिप की खराब सड़कों और सेल कर्मचारियों के पुराने आवासों की मरम्मत का मामला भी उठाया। निदेशक की ओर से सड़क निर्माण और आवास संबंधी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिए जाने की जानकारी दी गई।
हालांकि, खाली पड़े आवासों को किराये पर उपलब्ध कराने की मांग स्वीकार नहीं की गई। इस मुद्दे पर भी श्रमिक प्रतिनिधियों ने अपनी चिंता जाहिर की।
15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव भुगतान पर नाराजगी
बैठक में कर्मचारियों के करीब 15 वर्षों से लंबित इंसेंटिव और रिवॉर्ड भुगतान का मुद्दा प्रमुखता से उठा। यूनियन प्रतिनिधियों ने भुगतान में देरी पर नाराजगी जताते हुए प्रबंधन से स्पष्ट समयसीमा बताने की मांग की।
लेकिन बैठक में भुगतान की निश्चित तारीख या किसी ठोस निर्णय की घोषणा नहीं हुई। इससे कर्मचारियों की निराशा बनी हुई है।
इसके अलावा, बाहर इलाज कराने के लिए कैशलेस सुविधा और वातानुकूलित शव वाहन उपलब्ध कराने के प्रस्तावों पर प्रबंधन ने विचार करने की बात कही।
खदानों में मोबाइल प्रतिबंध जारी रखने का फैसला
खदानों में ठेका श्रमिकों के मोबाइल फोन ले जाने पर लगे प्रतिबंध का मुद्दा भी बैठक में उठा। श्रमिक प्रतिनिधियों ने इस पर अपनी बात रखी, लेकिन प्रबंधन ने सुरक्षा और शून्य दुर्घटना के लक्ष्य का हवाला देते हुए प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया।
लंबित मांगों पर अब आगे की कार्रवाई पर नजर
बैठक में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के बावजूद इंसेंटिव भुगतान, अस्पताल की सुविधाओं और मोबाइल प्रतिबंध जैसे मुद्दों पर श्रमिक संगठनों को ठोस राहत नहीं मिली। रामा पांडेय की आंदोलन की चेतावनी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रबंधन लंबित मांगों पर क्या कदम उठाता है और श्रमिक संगठनों की आगे की रणनीति क्या रहती है।
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