नई दिल्ली | 22 अक्टूबर 2026
Technology News: टेलीकॉम क्षेत्र में नए आविष्कारों और स्वदेशी तकनीकों को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने Telecommunications (Regulatory Sandbox) Rules, 2026 को अधिसूचित किया है। इन नियमों के जरिए स्टार्टअप, कंपनियों और शोधकर्ताओं को नई टेलीकॉम तकनीकों, सेवाओं और कारोबारी मॉडलों का नियंत्रित परिस्थितियों में परीक्षण करने का अवसर मिलेगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य नई तकनीकों को विकसित करने और उनका व्यावहारिक परीक्षण करने की प्रक्रिया को आसान बनाना है। प्रस्तावित परीक्षण व्यवस्था के तहत पात्र आवेदकों को निर्धारित शर्तों के अधीन कुछ नियामकीय प्रावधानों से छूट मिल सकती है।
क्या है रेगुलेटरी सैंडबॉक्स?
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स ऐसी नियंत्रित व्यवस्था है, जिसमें किसी नई तकनीक या सेवा को सीमित दायरे में वास्तविक परिस्थितियों के करीब परखा जाता है। इससे तकनीक विकसित करने वाली कंपनियों और शोधकर्ताओं को बड़े स्तर पर लॉन्च करने से पहले उसकी उपयोगिता और संभावित चुनौतियों को समझने में मदद मिलती है।
टेलीकॉम क्षेत्र में इसका इस्तेमाल नई संचार तकनीकों, डिजिटल सेवाओं और भविष्य की नेटवर्क प्रणालियों के परीक्षण के लिए किया जा सकता है। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलने के साथ तकनीकी समाधानों की व्यवहारिकता जांचने में मदद मिलने की उम्मीद है।
शुरुआती परीक्षण अवधि 24 महीने
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नए नियमों के तहत किसी परियोजना के परीक्षण के लिए शुरुआती अवधि 24 महीने यानी दो साल निर्धारित की गई है। जरूरत पड़ने पर अवधि को 12-12 महीने के लिए बढ़ाने का प्रावधान बताया गया है।
इसके लिए संबंधित आवेदक को मौजूदा अवधि समाप्त होने से कम से कम 30 दिन पहले विस्तार के लिए आवेदन करना होगा। हालांकि, अवधि बढ़ाने की मंजूरी संबंधित नियमों और सक्षम प्राधिकारी के निर्णय पर निर्भर करेगी।
आवेदन प्रक्रिया के लिए 10,000 रुपये की गैर-वापसी योग्य प्रोसेसिंग फीस निर्धारित किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
ग्राहकों की सहमति और सुरक्षा पर जोर
यदि किसी तकनीक का परीक्षण आम उपयोगकर्ताओं के साथ किया जाता है, तो उन्हें यह स्पष्ट रूप से बताना होगा कि सेवा परीक्षण के चरण में है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, परीक्षण में शामिल होने वाले उपयोगकर्ताओं की लिखित सहमति लेना भी अनिवार्य होगा।
इसके अतिरिक्त, परीक्षण में भाग लेने वाले उपयोगकर्ताओं से इसके लिए शुल्क नहीं लिया जा सकेगा। सैंडबॉक्स के तहत परीक्षण की जा रही तकनीक को परीक्षण अवधि के दौरान व्यावसायिक रूप से बेचने पर भी रोक का उल्लेख किया गया है।
इन प्रावधानों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि नई तकनीकों के परीक्षण के दौरान उपयोगकर्ताओं को प्रक्रिया की स्पष्ट जानकारी मिले और उनकी सहमति का सम्मान किया जाए।
डिजिटल पोर्टल से करना होगा आवेदन
नए ढांचे के तहत आवेदन प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी किए जाने की जानकारी दी गई है। आवेदकों को संबंधित पोर्टल पर आवेदन के साथ आवश्यक दस्तावेज और तकनीकी विवरण जमा करने होंगे।
इनमें पहले किए गए प्रयोगशाला परीक्षणों की रिपोर्ट और उन नियामकीय प्रावधानों का विवरण शामिल हो सकता है, जिनसे आवेदक निर्धारित शर्तों के तहत छूट चाहता है।
परीक्षण पूरा होने के बाद भी कंपनियों को डेटा, कार्ययोजना और उपयोगकर्ताओं की सहमति से जुड़े रिकॉर्ड कम से कम एक वर्ष तक सुरक्षित रखने होंगे, ऐसा उपलब्ध विवरण में बताया गया है।
स्टार्टअप और शोधकर्ताओं को क्या होगा फायदा?
रेगुलेटरी सैंडबॉक्स व्यवस्था से नई टेलीकॉम तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप, कंपनियों और शोधकर्ताओं को अपने समाधानों को नियंत्रित परिस्थितियों में परखने का अवसर मिल सकता है।
इससे तकनीकी खामियों की पहचान, नई सेवाओं के विकास और स्वदेशी नवाचार को प्रोत्साहन मिलने की संभावना है। हालांकि, किसी तकनीक को बड़े स्तर पर लागू करने से पहले उसे संबंधित कानूनी, तकनीकी और सुरक्षा मानकों का पालन करना होगा।
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