Sunday, October 18, 2026

बिहार में बालू की आपूर्ति बढ़ाने की तैयारी, 6 जिलों में नए घाटों की पहचान; 452 घाटों की नीलामी बाकी.

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पटना। बिहार में निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से खान एवं भूतत्व विभाग ने नए बालू घाटों से खनन शुरू कराने की तैयारी तेज कर दी है। इसके तहत भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, पटना, गया और जमुई में नए घाटों की संभावनाएं तलाशी जा रही हैं। इसके साथ ही पहले से चिह्नित लेकिन अब तक नीलाम नहीं हुए घाटों की बंदोबस्ती प्रक्रिया में भी तेजी लाने पर जोर दिया जा रहा है।

सरकार का उद्देश्य आम लोगों के साथ-साथ सरकारी निर्माण परियोजनाओं के लिए भी बालू की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है। विभाग नए घाटों से खनन शुरू कराने और लंबित नीलामी की प्रक्रिया पूरी करने की दिशा में काम कर रहा है।

इन छह जिलों में नए बालू घाटों की तलाश

खान एवं भूतत्व विभाग भोजपुर, अरवल, औरंगाबाद, पटना, गया और जमुई में नए बालू घाटों की पहचान कर वहां खनन की संभावनाओं का आकलन कर रहा है। योजना के तहत उपयुक्त घाटों से बालू निकालने की संभावना तलाशी जाएगी।

यदि इन स्थानों पर खनन शुरू होता है, तो राज्य में बालू की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे घर बनाने और अन्य निर्माण कार्यों के लिए बालू की आपूर्ति बेहतर करने की उम्मीद है।

हालांकि, नए घाटों से खनन कब शुरू होगा और इससे कुल आपूर्ति में कितनी वृद्धि होगी, इसकी स्पष्ट समयसीमा उपलब्ध जानकारी में नहीं दी गई है।

452 बालू घाटों की नीलामी अभी बाकी

विभाग का ध्यान उन बालू घाटों पर भी है, जिनकी पहचान पहले ही की जा चुकी है, लेकिन उनकी नीलामी या बंदोबस्ती अब तक पूरी नहीं हुई है। संबंधित प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए जिलाधिकारियों को आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

उपलब्ध विभागीय जानकारी के मुताबिक, बिहार में पीले बालू के 466 और उजले बालू के 541 घाट चिह्नित हैं। इनमें से करीब 452 घाटों की नीलामी लंबित बताई गई है।

इन घाटों की बंदोबस्ती पूरी होने से खनन गतिविधियों का दायरा बढ़ाने और बालू की आपूर्ति में सुधार लाने में सहायता मिल सकती है।

निर्माण कार्यों के लिए बालू की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर

बालू निर्माण क्षेत्र की महत्वपूर्ण जरूरतों में शामिल है। इसकी पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने पर निजी भवन निर्माण से लेकर सरकारी परियोजनाओं तक पर असर पड़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग नए घाटों से खनन की योजना और लंबित घाटों की नीलामी, दोनों पर काम कर रहा है।

सरकार की कोशिश है कि अधिक घाटों को खनन प्रक्रिया से जोड़कर बाजार में बालू की उपलब्धता बेहतर की जाए। इससे निर्माण कार्यों के लिए आपूर्ति संबंधी समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है।

नए घाट और लंबित नीलामी से क्या बदलेगा?

विभाग की योजना के दो प्रमुख हिस्से हैं—छह जिलों में नए बालू घाटों की पहचान और पहले से चिह्नित घाटों की बंदोबस्ती को गति देना। इन दोनों प्रक्रियाओं के आगे बढ़ने से राज्य में बालू खनन की क्षमता बढ़ने की संभावना है।

हालांकि, बालू की कीमतों पर इसका कितना असर पड़ेगा, यह खनन शुरू होने, नीलामी पूरी होने, परिवहन व्यवस्था और बाजार में वास्तविक आपूर्ति जैसे कारकों पर निर्भर करेगा। फिलहाल विभाग का प्रमुख लक्ष्य बालू की उपलब्धता बढ़ाना और निर्माण कार्यों के लिए इसकी कमी की आशंका को कम करना है।

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