पटना, 11 अक्टूबर 2026: बिहार में हवाई कनेक्टिविटी बढ़ाने की दिशा में दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने की तैयारी की जा रही है। सारण जिले के सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में प्रस्तावित इन एयरपोर्ट के लिए कुल 7,373 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। सरकार की योजना शुरुआती चरण में जमीन मालिकों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की है।
इन परियोजनाओं के लिए जमीन की पहचान, संबंधित रैयतों के विवरण और सलाहकार एजेंसी के चयन की प्रक्रिया अहम होगी। हालांकि, फिलहाल एयरपोर्ट निर्माण शुरू होने या इनके चालू होने की तारीख सामने नहीं आई है।
सोनपुर एयरपोर्ट के लिए 4,228 एकड़ जमीन चिह्नित
सारण जिले में प्रस्तावित सोनपुर ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए करीब 4,228 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। इसमें सोनपुर और दरियापुर अंचल के लगभग 26 मौजा शामिल हैं।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परियोजना से करीब 14,224 रैयत और उनकी जमाबंदियां जुड़ी हैं। जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए पहले सलाहकार एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके बाद जमीन खरीदने से संबंधित आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
भागलपुर-मुंगेर में अजगैबीनाथ धाम एयरपोर्ट की योजना
भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में प्रस्तावित अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए लगभग 3,145 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। परियोजना के दायरे में करीब 14 मौजा और लगभग 12 हजार रैयतों की जमीन आने की जानकारी दी गई है।
इस परियोजना से जुड़े प्रमुख अंचलों में भागलपुर सदर, सुल्तानगंज, मुंगेर सदर, तारापुर और बरियारपुर शामिल हैं। जमीन की उपलब्धता और उससे संबंधित विवरणों को स्पष्ट करने के लिए सर्वेक्षण की प्रक्रिया महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
पहले सहमति से जमीन खरीदने की कोशिश
दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए सरकार की प्राथमिकता जमीन मालिकों से आपसी सहमति के आधार पर जमीन खरीदने की होगी। इसके लिए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2020 के तहत प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी है।
यदि सहमति से जमीन खरीदने में कठिनाई आती है या अन्य आवश्यक परिस्थितियां बनती हैं, तो भूमि अधिग्रहण कानून के तहत आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
जमीन की कीमत तय करने में समिति की भूमिका
जमीन की कीमत निर्धारित करने का काम संबंधित रैयती भूमि क्रय समितियों और सक्षम प्राधिकार के दायरे में रहेगा। सलाहकार एजेंसी की भूमिका प्रक्रिया में सहायता करने और जमीन खरीद से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाने तक सीमित होगी।
चिह्नित क्षेत्र में खेती की जमीन के साथ आबादी वाले हिस्से, बाग-बगीचे और अन्य संरचनाएं भी शामिल बताई गई हैं। कुछ स्थानों पर दियारा क्षेत्र भी है। ऐसे में जमीन की प्रकृति, स्वामित्व और अन्य संबंधित विवरणों का सत्यापन जरूरी होगा।
पहले सलाहकार एजेंसी का चयन, फिर आगे बढ़ेगी प्रक्रिया
दोनों प्रस्तावित एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले सलाहकार एजेंसी का चयन किया जाएगा। इसके बाद जमीन की खरीद और उससे संबंधित अन्य औपचारिकताएं पूरी करने की दिशा में काम होगा।
फिलहाल परियोजनाएं जमीन जुटाने की तैयारी के चरण में हैं। निर्माण कार्य कब शुरू होगा और एयरपोर्ट कब तक चालू होंगे, इस संबंध में अभी कोई निश्चित समयसीमा सामने नहीं आई है।
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