Friday, October 9, 2026

बिहार के संजय कुमार ने अंतरिक्ष में भेजा 502 ग्राम का कैमरा ‘मीरा’, खेती और आपदा प्रबंधन में आएगा काम.

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समस्तीपुर, 9 अक्टूबर 2026: बिहार के समस्तीपुर जिले के युवा इंजीनियर संजय कुमार ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उनके नेतृत्व में हैदराबाद की डीपटेक कंपनी ईओएन स्पेस लैब्स ने महज 502 ग्राम वजन वाला मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा ‘मीरा’ विकसित किया है। इस कैमरे को अंतरिक्ष में भेजा गया है। इससे पृथ्वी की तस्वीरें और महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाने में मदद मिलेगी। प्राप्त डेटा का उपयोग खेती, पर्यावरण संरक्षण और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

502 ग्राम का कैमरा नौ स्पेक्ट्रल बैंड में करेगा काम

‘मीरा’ कैमरे को अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के ट्रांसपोर्टर-18 अभियान के जरिए पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया गया है। इसे टेकमी2 स्पेस के एमओआइ-1ए कक्षीय उपग्रह के साथ जोड़ा गया है।

इस कैमरे को कम वजन और अधिक कार्यक्षमता को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसका प्रकाशीय तंत्र अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों और प्रक्षेपण के दौरान होने वाले तेज कंपन को सहने के लिए तैयार किया गया है।

कैमरे की प्रमुख विशेषता यह है कि यह नौ अलग-अलग स्पेक्ट्रल बैंड के माध्यम से पृथ्वी से संबंधित तस्वीरें और आंकड़े जुटा सकता है। मल्टीस्पेक्ट्रल तकनीक की मदद से जमीन और वनस्पति की ऐसी विशेषताओं का अध्ययन किया जा सकता है, जिन्हें सामान्य तस्वीरों से समझना मुश्किल होता है।

खेती और पर्यावरण की निगरानी में मिलेगी मदद

‘मीरा’ कैमरे से प्राप्त डेटा का इस्तेमाल कृषि क्षेत्र में फसलों की स्थिति का आकलन करने और भूमि की नमी से संबंधित जानकारी जुटाने में किया जा सकता है। इससे कृषि निगरानी और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में सहायता मिल सकती है।

इसके अलावा, इस तकनीक का उपयोग प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, जंगलों में होने वाले बदलावों के अध्ययन और पर्यावरण संबंधी जानकारी जुटाने में भी किया जा सकता है।

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में भी कैमरे से प्राप्त तस्वीरें उपयोगी साबित हो सकती हैं। इनके जरिए आपदा प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करने और प्रभावित क्षेत्रों से संबंधित जरूरी जानकारी जुटाने में मदद मिल सकती है।

भारतीय नौसेना के लिए भी आधुनिक तकनीक पर काम

संजय कुमार और उनकी टीम भारतीय नौसेना के लिए भी आधुनिक निगरानी उपकरण विकसित करने पर काम कर रही है। उनकी कंपनी को आईआईटी मद्रास ने भारत इनोवेट्स-2026 के लिए चुना था। इसके तहत संजय कुमार ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय डीपटेक और एयरोस्पेस तकनीक का प्रतिनिधित्व किया।

आईआईटी मद्रास से हासिल की उच्च शिक्षा

समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी में पले-बढ़े संजय कुमार के पिता शिव बचन मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में कार्यरत थे। संजय ने अपनी शुरुआती शिक्षा समस्तीपुर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल से प्राप्त की। उन्होंने वर्ष 2006 में माध्यमिक और 2008 में उच्चतर माध्यमिक परीक्षा पास की। इसके बाद उन्होंने कोटा में आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी की।

संजय ने तिरुवनंतपुरम स्थित भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान से एवियोनिक्स में बीटेक किया। इसके बाद आईआईटी मद्रास से प्रकाशिकी एवं प्रकाश तकनीक में परास्नातक की डिग्री हासिल की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने उन्नत प्रकाशिकी और इमेजिंग तकनीक के क्षेत्र में काम किया। उन्होंने एलवी प्रसाद नेत्र संस्थान और अमेरिका के रोचेस्टर चिकित्सा केंद्र से जुड़े संस्थानों में आठ वर्षों से अधिक समय तक अनुकूली प्रकाशिकी के क्षेत्र में शोध किया।

2022 में स्थापित की ईओएन स्पेस लैब्स

वर्ष 2022 में संजय कुमार ने उज्जैन के पुनीत बदेका और मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर हैदराबाद में ईओएन स्पेस लैब्स की स्थापना की। वह कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रूप में प्रकाशीय तंत्र के डिजाइन और विकास की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

समस्तीपुर से निकलकर अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले संजय कुमार की उपलब्धि तकनीकी नवाचार और स्वदेशी विशेषज्ञता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। ‘मीरा’ जैसे हल्के कैमरे भविष्य में पृथ्वी की निगरानी और विभिन्न क्षेत्रों के लिए उपयोगी डेटा जुटाने में योगदान दे सकते हैं।

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