नई दिल्ली, 8 अक्टूबर 2026: महंगाई और रुपये पर बढ़ते दबाव के बीच रिजर्व बैंक की दिसंबर में होने वाली मौद्रिक नीति बैठक पर बाजार की नजरें टिक गई हैं। SBI Research की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि RBI दिसंबर में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट यानी 0.50 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। ऐसा होने पर रेपो रेट 5.50 प्रतिशत से बढ़कर 6 प्रतिशत हो जाएगा।
हालांकि, यह अभी RBI का घोषित फैसला नहीं है। वास्तविक निर्णय उस समय की महंगाई, वैश्विक परिस्थितियों और घरेलू आर्थिक आंकड़ों को देखते हुए लिया जाएगा।
अक्टूबर में ही बढ़ाई गई थी रेपो रेट
RBI ने अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा में रेपो रेट को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50 प्रतिशत किया था। SBI Research का मानना है कि इस फैसले से केंद्रीय बैंक के रुख में सख्ती के संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, आगे ब्याज दरों को लेकर RBI के सामने महंगाई के आंकड़ों के आधार पर फैसला लेने की चुनौती रहेगी।
नवंबर में महंगाई बढ़ने का अनुमान
SBI Research ने अनुमान जताया है कि नवंबर में देश की महंगाई दर 6.8 प्रतिशत के स्तर तक पहुंच सकती है। यदि महंगाई का दबाव अनुमान के मुताबिक बढ़ता है तो दिसंबर की बैठक में RBI की ओर से बड़ी दर वृद्धि की संभावना बन सकती है।
हालांकि, दिसंबर में वास्तविक फैसला महंगाई की स्थिति और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों समेत कई कारकों पर निर्भर करेगा।
रुपये पर भी दबाव, विदेशी निवेश की चिंता
रिपोर्ट में डॉलर की मजबूती के बीच रुपये पर बने दबाव का भी उल्लेख किया गया है। सितंबर में विदेशी निवेशकों ने भारतीय डेट मार्केट से करीब 2.1 अरब डॉलर की रकम निकाली।
रुपये और विदेशी पूंजी के दबाव से निपटने के लिए SBI Research ने कुछ नीतिगत सुझाव भी दिए हैं।
SBI Research के प्रमुख सुझाव
- तीन साल से अधिक अवधि के विदेशी निवेश के लिए LTCG टैक्स ढांचे में बदलाव पर विचार।
- निर्यात से प्राप्त विदेशी मुद्रा को भारत वापस लाने की समय सीमा 9 महीने से घटाकर 6 महीने करने का सुझाव।
- बाजार में नकदी के प्रबंधन के लिए CRR में बदलाव के बजाय OMO का इस्तेमाल करने की सलाह।
अगर रेपो रेट बढ़ा तो आपकी EMI पर क्या असर होगा?
रेपो रेट में बढ़ोतरी होने पर बैंकों की फंडिंग लागत बढ़ सकती है। इसका असर उन कर्जदारों पर पड़ सकता है जिनके लोन की ब्याज दरें रेपो रेट जैसे बाहरी बेंचमार्क से जुड़ी हैं। ऐसे मामलों में होम लोन, ऑटो लोन या अन्य फ्लोटिंग रेट लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है।
वहीं, फिक्स्ड रेट लोन पर तत्काल असर अलग हो सकता है। इसलिए किसी भी संभावित दर वृद्धि का व्यक्तिगत असर आपके लोन के प्रकार, बकाया राशि, ब्याज दर और रीसेट नियमों पर निर्भर करेगा।
GDP ग्रोथ पर RBI का भरोसा कायम
SBI Research की रिपोर्ट में ब्याज दरों को लेकर चिंता के बीच आर्थिक वृद्धि के मोर्चे पर सकारात्मक अनुमान का भी उल्लेख है। RBI ने FY27 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 7.1 प्रतिशत रखा है, जबकि सालाना महंगाई दर 5.2 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया गया है।
अब दिसंबर की मौद्रिक नीति बैठक में RBI महंगाई, रुपये, विदेशी निवेश और आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों को देखते हुए क्या रुख अपनाता है, इस पर बाजार और कर्ज लेने वालों दोनों की नजर रहेगी।
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