नालंदा: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर जन सुराज पार्टी के सूत्रधार प्रशांत किशोर लगातार अपने उम्मीदवारों के पक्ष में प्रचार कर रहे हैं। रविवार को बिहार शरीफ के टाउन हॉल में आयोजित ‘शिक्षा संवाद सह शिक्षक समागम’ कार्यक्रम में उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं और आगामी एमएलसी चुनाव को लेकर अपनी बात रखी।
कार्यक्रम के दौरान प्रशांत किशोर ने पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की उम्मीदवार डॉ. दिव्या ज्योति और पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह के समर्थन में वोट की अपील की। उन्होंने शिक्षकों से अपने मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए मतदान करने की बात कही।
शिक्षकों की पुरानी मांगों का किया जिक्र
प्रशांत किशोर ने कहा कि बिहार के शिक्षक लंबे समय से समान काम-समान वेतन, राज्यकर्मी का दर्जा, पेंशन सहित कई मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि किसी वर्ग की समस्याएं लंबे समय से बनी हुई हैं और वह लगातार उन्हीं राजनीतिक दलों को वोट देता रहा है, तो बदलाव कैसे आएगा।
उन्होंने शिक्षकों से जातीय और राजनीतिक समीकरणों से ऊपर उठकर अपने हितों से जुड़े मुद्दों पर विचार करने की अपील की।
NDA और RJD पर भी साधा निशाना
जन सुराज नेता ने पिछले चुनावों का हवाला देते हुए दावा किया कि अलग-अलग राजनीतिक दलों ने शिक्षकों की मांगों को लेकर वादे किए, लेकिन सत्ता में आने के बाद उन वादों को पूरा नहीं किया।
उन्होंने भाजपा और राजद दोनों पर शिक्षकों की अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने का आरोप लगाया। प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षकों को किसी एक नेता पर निर्भर रहने के बजाय सामूहिक राजनीतिक दबाव बनाने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि करीब छह लाख शिक्षकों से जुड़े मुद्दों का समाधान किसी एक एमएलसी के बूते संभव नहीं है और इसके लिए शिक्षकों की एकजुटता जरूरी है।
NDA को हराने पर सातवें वेतनमान का दावा
प्रशांत किशोर ने अपने संबोधन में दावा किया कि यदि नालंदा, नवादा और पटना के शिक्षक एमएलसी चुनाव में एकजुट होकर NDA उम्मीदवारों को हरा देते हैं, तो लोकसभा चुनाव से पहले शिक्षकों को सातवां वेतनमान दिलाने की दिशा में वह काम करेंगे।
उन्होंने कहा कि सातवें वेतनमान को लागू करने के लिए सरकार पर हर साल करीब 5,500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है। उनके मुताबिक सरकार पर राजनीतिक दबाव बनने से ही ऐसी मांगों को आगे बढ़ाया जा सकता है।
उन्होंने शिक्षकों से जाति और धर्म के बजाय वेतनमान, सम्मान, पेंशन और परिवार के भविष्य जैसे मुद्दों को ध्यान में रखकर मतदान करने की अपील की।
अनंत सिंह के समर्थन पर भी दिया जवाब
कार्यक्रम के बाद पत्रकारों ने बाहुबली नेता अनंत सिंह द्वारा जन सुराज प्रत्याशी डॉ. अनुज सिंह को समर्थन दिए जाने को लेकर प्रशांत किशोर से सवाल किया।
जवाब में उन्होंने कहा कि अनंत सिंह जन सुराज का हिस्सा नहीं हैं और पार्टी अपने उम्मीदवारों तथा कार्यकर्ताओं के लिए जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि कोई अन्य राजनीतिक नेता यदि जन सुराज उम्मीदवार का समर्थन करता है, तो इससे पार्टी का उस नेता के साथ राजनीतिक संबंध स्थापित नहीं हो जाता।
प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज धनबल और बाहुबल की राजनीति के बजाय बिहार में बदलाव, शिक्षा और रोजगार के मुद्दों को आगे बढ़ाने का दावा करता है।
नालंदा में प्रशासन से विवाद का भी किया जिक्र
खबर के अनुसार, इससे पहले 18 मई को बिहार बदलाव हस्ताक्षर अभियान के दौरान प्रशांत किशोर नालंदा पहुंचे थे। उस दौरान उनका काफिला मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के पैतृक गांव कल्याण बिगहा की ओर बढ़ रहा था, जिसे प्रशासनिक अधिकारियों ने रोक दिया था।
इस दौरान प्रशांत किशोर और एसडीएम के बीच बहस हुई थी। जन सुराज की ओर से इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किया गया था। प्रशासन की ओर से उस समय कानून-व्यवस्था से जुड़ी आशंका का हवाला दिए जाने की बात सामने आई थी।
एमएलसी चुनाव के बीच प्रशांत किशोर अब शिक्षकों और स्नातकों के बीच अपने उम्मीदवारों के लिए समर्थन जुटाने के साथ जन सुराज को बिहार में नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर पेश कर रहे हैं।
BHARATSUPERFASTNEWS
