पटना। बिहार सरकार ने हीमोफीलिया से जूझ रहे मरीजों के उपचार को लेकर अहम कदम उठाया है। स्वास्थ्य विभाग ने ‘मुख्यमंत्री हीमोफीलिया योजना’ को प्रशासनिक मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत मरीजों को उपचार में इस्तेमाल होने वाली नन-फैक्टर दवा उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।
योजना को मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष के माध्यम से लागू किया जाएगा। सरकार का उद्देश्य हीमोफीलिया मरीजों को जरूरी दवाएं उपलब्ध कराकर उनके उपचार को अधिक सुलभ बनाना है।
पहले वर्ष में 26.34 करोड़ रुपये खर्च होंगे
योजना के तहत हीमोफीलिया के इलाज में इस्तेमाल होने वाली एमिसिज़ुमैब (Emicizumab) दवा की खरीद की जाएगी। इसके लिए पहले साल 26 करोड़ 33 लाख 63 हजार 490 रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, योजना के जरिए जरूरतमंद मरीजों तक आवश्यक उपचार सुविधा पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।
मरीजों को उपचार में राहत मिलने की उम्मीद
स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने कहा कि हीमोफीलिया मरीजों को जरूरी दवा उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। सरकार की कोशिश है कि उपचार के दौरान मरीजों को आवश्यक दवाओं की उपलब्धता को लेकर परेशानी न हो।
नन-फैक्टर दवा उपलब्ध कराने पर जोर
‘मुख्यमंत्री हीमोफीलिया योजना’ के तहत खास तौर पर नन-फैक्टर दवा की उपलब्धता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की जा रही है। इससे राज्य में हीमोफीलिया के इलाज की सुविधाओं को मजबूत करने और मरीजों को आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।
स्वास्थ्य विभाग की इस पहल के तहत दवा खरीद और योजना के क्रियान्वयन से जुड़ी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है।
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