जमशेदपुर: लौहनगरी जमशेदपुर नवंबर में राष्ट्रीय स्तर के सामाजिक, सांस्कृतिक और वैचारिक आयोजन की मेजबानी करेगी। गोलमुरी स्थित आदिवासी हो समाज भवन में रविवार को हुई बैठक में ‘नेशनल हो यूथ मीट-2026’ के आयोजन की घोषणा की गई। दो दिवसीय राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का आयोजन 28 और 29 नवंबर को सिदगोड़ा स्थित बिरसा मुंडा टाउन हॉल में किया जाएगा।
आदिवासी हो समाज युवा महासभा के केंद्रीय उपाध्यक्ष सुरा बिरुली की अध्यक्षता में हुई बैठक में सम्मेलन की तैयारियों और कार्यक्रम की रूपरेखा पर चर्चा की गई। बैठक में रवि सावैयां, अजय बिरुली, समीर कालुंडिया, सोना हांसदा, लक्ष्मी पुरती, मनोज हेंब्रम, निरल हेंब्रम, आरके केराई, साधु बानरा, गीता गोडसोरा, मुन्ना गागराई, सन्नी बारी, मनीष बानरा, लाडू देवगम, शिल्पा सुंडी, राजीव सोय, सीता कंडयोंग, सिकंदर जोंको, बर्लिन बोदरा और बीरसिंह हेंब्रम समेत अन्य लोग मौजूद रहे।
युवा महिलाओं के हाथों में होगी आयोजन की जिम्मेदारी
इस बार सम्मेलन में युवा महिलाओं की नेतृत्वकारी भूमिका पर विशेष जोर दिया गया है। आयोजन समिति के अनुसार, कार्यक्रम की प्रमुख जिम्मेदारियां जेन-जी और मिलेनियल्स वर्ग की युवा महिलाओं को दी गई हैं।
सुरा बिरुली ने कहा कि इस पहल का उद्देश्य हो समाज में महिला नेतृत्व को बढ़ावा देना और युवाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक भागीदारी का अवसर देना है।
ओपन स्टेज पर युवा रखेंगे अपनी बात
नेशनल हो यूथ मीट में देशभर से हो समाज के ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के युवा हिस्सा लेंगे। इसके अलावा डॉक्टर, इंजीनियर, प्रोफेसर, साहित्यकार, न्यायिक क्षेत्र से जुड़े लोग, बुद्धिजीवी और सेवानिवृत्त अधिकारी भी सम्मेलन में शामिल होंगे।
महासभा के जिला उपाध्यक्ष रवि सावैयां के अनुसार, सम्मेलन को युवाओं के संवाद और विचार-विमर्श के मंच के रूप में तैयार किया जा रहा है। यहां ‘ओपन स्टेज’ की व्यवस्था होगी, जहां युवा समाज के वर्तमान मुद्दों और भविष्य की दिशा पर अपने विचार रख सकेंगे।
आयोजन समिति का गठन
सम्मेलन के संचालन के लिए आयोजन समिति का गठन किया गया है। इसमें सुष्मिता बिरुवा को अध्यक्ष, निकिता सोय को उपाध्यक्ष, शांति सिदू को महासचिव, वीणा दिग्गी और रोशनी बोईपाई को सचिव तथा सरस्वती सावैयां को कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है।
रोजगार से लेकर भाषा और संस्कृति तक पर होगी चर्चा
सम्मेलन में युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। इनमें रोजगार, स्किल डेवलपमेंट, व्यापार और स्टार्टअप के अवसर प्रमुख हैं। इसके अलावा मानकी-मुंडा व्यवस्था और ग्राम व्यवस्था को वर्तमान समय में मजबूत बनाने, पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रति जागरूकता तथा इसके क्रियान्वयन जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होगा।
हो भाषा को मान्यता, आदिवासी समाज में महिलाओं की भागीदारी और सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण जैसे विषय भी सम्मेलन के एजेंडे में शामिल हैं। आयोजकों के अनुसार, दो दिवसीय आयोजन के दौरान युवाओं को इन मुद्दों पर संवाद और अपने विचार साझा करने का अवसर मिलेगा।
