Saturday, September 26, 2026

झारखंड में SIR को लेकर सियासत तेज, शिल्पी नेहा तिर्की ने प्रक्रिया रद्द करने की मांग की.

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रांची: झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राज्य सरकार की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने मौजूदा प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इसे रद्द करने और नए सिरे से प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। उनका कहना है कि व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के मतदाताओं को परेशानी न हो और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी रहे।

SIR को लेकर मंत्रियों के अलग-अलग आरोप

शिल्पी नेहा तिर्की ने SIR की वर्तमान व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रक्रिया को समाप्त कर अधिक सरल और पारदर्शी तरीके से दोबारा शुरू करने की मांग रखी है।

इसी मुद्दे पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर राजनीतिक आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि झारखंड में SIR लागू नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर भाजपा के पक्ष में काम करने का आरोप भी लगाया और SIR को लेकर आंदोलन तेज करने की बात कही।

हालांकि, ये नेताओं की राजनीतिक टिप्पणियां और आरोप हैं। चुनाव आयोग इससे पहले विपक्ष की ओर से लगाए गए“वोट चोरी” जैसे आरोपों को खारिज कर चुका है और आरोप लगाने वालों से प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा है।

जून से चल रही है झारखंड में प्रक्रिया

झारखंड में SIR की प्रक्रिया 30 जून 2026 से शुरू हुई थी। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) ने घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया। इसके बाद 5 अगस्त को ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी की गई।

ड्राफ्ट सूची पर दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की प्रक्रिया के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित करने का कार्यक्रम है। ऐसे में राज्य में SIR की प्रक्रिया अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है।

देश में पहले भी हुए हैं मतदाता सूची के पुनरीक्षण

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड में मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े पुराने पुनरीक्षण का विवरण पहले आम चुनाव 1951-52 से मिलता है। आयोग के रिकॉर्ड में 1951-52, 1957, 1962 और इसके बाद के चुनावों से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

मौजूदा SIR को लंबे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर मतदाता सूची के पुनरीक्षण की प्रक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। आयोग ने 2025-26 के दौरान इसे अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ाया है।

ज्ञानेश कुमार को लेकर पहले भी हुआ विवाद

SIR को लेकर चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर राजनीतिक दलों के बीच मतभेद सामने आते रहे हैं। बिहार में 2025 के SIR के दौरान विपक्षी दलों ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाए थे।

ज्ञानेश कुमार ने इन आरोपों को खारिज करते हुए राहुल गांधी से वोट चोरी के दावों के समर्थन में शपथपत्र के साथ प्रमाण देने को कहा था। यह विवाद 2026 में भी राजनीतिक चर्चा का हिस्सा बना रहा। अप्रैल 2026 में विपक्षी सांसदों की ओर से ज्ञानेश कुमार को हटाने के लिए नोटिस दिए जाने की बात सामने आई थी, हालांकि लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने इसे स्वीकार नहीं किया।

दो चुनाव आयुक्तों की आपत्ति की रिपोर्ट पर भी चर्चा

सितंबर 2026 में सामने आई एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने करीब 10 महीनों के दौरान आयोग के कई फैसलों पर आपत्ति जताई थी। इनमें SIR से जुड़े कुछ फैसले भी शामिल बताए गए।

चुनाव आयोग ने इस पर कहा कि संस्थान के भीतर अलग-अलग राय होना सामान्य प्रक्रिया है। आयोग के अनुसार SIR से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णय पूर्ण आयोग की सहमति से लिए गए हैं।

झारखंड में प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की मांग

शिल्पी नेहा तिर्की ने मांग की है कि झारखंड में चल रही SIR प्रक्रिया को रद्द कर ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जो सभी वर्गों के मतदाताओं के लिए आसान और समान रूप से सुलभ हो। उन्होंने प्रक्रिया से जुड़े सवालों का समाधान होने तक इस पर पुनर्विचार की बात कही है।

SIR को लेकर झारखंड में सत्तापक्ष और विपक्ष के नेताओं के अलग-अलग बयान सामने आ रहे हैं। ऐसे में मतदाता सूची के पुनरीक्षण का मुद्दा राज्य में राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है।

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