मुंबई: वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति को लेकर रिजर्व बैंक की ओर से सकारात्मक संकेत मिले हैं। RBI के ताजा बुलेटिन में प्रकाशित ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ लेख के मुताबिक घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती ने देश के वित्तीय और बाहरी क्षेत्र को काफी हद तक स्थिर बनाए रखा है।
हालांकि, केंद्रीय बैंक ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और मौसम से जुड़ी अनिश्चितताओं को आने वाले समय के लिए प्रमुख जोखिमों में शामिल किया है।
पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल पर दबाव
सितंबर में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई। RBI के अनुसार महंगे तेल से वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। इसका असर भारत में भी महंगाई के मोर्चे पर देखने को मिल सकता है।
वहीं, प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं में सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ने से उनके वित्तीय तंत्र पर दबाव बना है। इसका प्रभाव वैश्विक वित्तीय बाजारों और निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा है।
GDP ग्रोथ के बीच शेयर बाजार में सुस्ती
बाहरी चुनौतियों के बावजूद वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि मजबूत रही। RBI के विश्लेषण के मुताबिक देश की घरेलू आर्थिक बुनियाद बाहरी झटकों का सामना करने में सक्षम बनी हुई है।
हालांकि अगस्त और सितंबर में भारतीय शेयर बाजारों में अपेक्षाकृत सुस्ती रही। भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के कारण निवेशकों का रुख सतर्क रहा। सितंबर में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय बाजार से निकासी की, जबकि अगस्त में उनका निवेश सकारात्मक रहा था।
विदेशी मुद्रा भंडार 765.9 अरब डॉलर पर
देश की बाहरी वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में विदेशी मुद्रा भंडार की अहम भूमिका रही है। RBI बुलेटिन के अनुसार 18 सितंबर 2026 तक भारत का विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर 765.9 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।
जुलाई में नेट FDI भी पिछले पांच वर्षों में किसी एक महीने के उच्चतम स्तर पर रहा। इसके अलावा NRI डिपॉजिट में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सेवाओं के निर्यात और विदेशों से आने वाले रेमिटेंस ने भी चालू खाते की स्थिति को संभालने में मदद की।
बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी
बुलेटिन के मुताबिक अगस्त और सितंबर की शुरुआत में बैंकिंग व्यवस्था में पर्याप्त अतिरिक्त नकदी उपलब्ध रही। बैंकों ने RBI की विशेष विदेशी मुद्रा स्वैप सुविधा का इस्तेमाल किया, जिससे सिस्टम में लिक्विडिटी बनी रही।
हालांकि सितंबर के अंतिम दिनों में एडवांस टैक्स भुगतान के चलते बैंकिंग सिस्टम से कुछ नकदी बाहर गई और लिक्विडिटी की स्थिति संतुलित हुई। इसके बावजूद बैंकों में जमा बढ़ने की गति मजबूत रही और कर्ज की मांग भी बनी रही।
खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर नजर
अर्थव्यवस्था की मजबूती के बीच खाद्य महंगाई से जुड़ी चिंता बनी हुई है। सितंबर में कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई।
चावल और गेहूं के दाम बढ़े, हालांकि चावल की कीमतों में वृद्धि की गति कुछ धीमी हुई। चना, तुअर और मूंग जैसी दालों के साथ सरसों और पाम ऑयल की कीमतों में भी पिछले महीने की तुलना में बढ़ोतरी हुई।
सब्जियों में प्याज के दाम तेजी से बढ़े, जबकि दो महीने की नरमी के बाद टमाटर की कीमत में भी कुछ बढ़ोतरी दर्ज की गई। दूसरी ओर, इसी अवधि में आलू के दाम नीचे आए।
RBI के आकलन से संकेत मिलता है कि घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती फिलहाल वैश्विक अस्थिरता के प्रभाव को सीमित करने में मदद कर रही है, लेकिन कच्चे तेल, खाद्य कीमतों और अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम पर आगे भी नजर रखना जरूरी होगा।
