Friday, September 25, 2026

RINPAS में 20 बेड की बाल-किशोर इंडोर यूनिट, मेडिकल कॉलेजों में यूजी-पीजी सीट बढ़ाने की तैयारी.

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रांची: झारखंड के स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने राज्य की चिकित्सा सुविधाओं और मेडिकल शिक्षा के विस्तार को लेकर कई अहम फैसले लिए हैं। अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को नेपाल हाउस में हुई दो बैठकों में RINPAS में नई उपचार इकाई शुरू करने से लेकर मेडिकल कॉलेजों में सीट और मानव संसाधन बढ़ाने को लेकर दिशा-निर्देश दिए गए।

RINPAS में शुरू होगी 20 बेड की बाल-किशोर यूनिट

RINPAS से संबंधित समीक्षा बैठक में संस्थान की मौजूदा सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और 100 बेड वाले साइकियाट्रिक रेजिडेंशियल शेल्टर होम की स्थिति की जानकारी ली गई।

अपर मुख्य सचिव ने संस्थान में 20 बेड की इंडोर बाल एवं किशोर चिकित्सा इकाई विकसित करने का निर्देश दिया। इसके अलावा डीपीएन कोर्स को फिर से शुरू करने और साइकियाट्रिक नर्सिंग की कक्षाएं संचालित करने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने को कहा गया।

उन्होंने RINPAS में एमडी साइकियाट्रिक पाठ्यक्रम दोबारा शुरू करने की दिशा में भी काम करने का निर्देश दिया। इसके लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य व्यवस्थाएं विकसित करने पर जोर दिया गया।

पदों की समीक्षा और पुनर्गठन पर जोर

बैठक में RINPAS के स्वीकृत और कार्यरत पदों की भी समीक्षा करने को कहा गया। विभाग के अनुसार, संस्थान में विभिन्न क्षेत्रों की जरूरत का नए सिरे से आकलन कर मानव संसाधन का पुनर्गठन किया जाएगा। इसके आधार पर आवश्यक पदों का प्रस्ताव तैयार किया जाना है।

अपर मुख्य सचिव ने बाल चिकित्सा और जेरिएट्रिक क्षेत्र में सुपर स्पेशलिटी स्तर की पढ़ाई शुरू करने की संभावनाओं पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि चिकित्सा शिक्षा और विशेषज्ञ उपचार का दायरा बढ़ने से मरीजों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

बैठक में अपर सचिव शशि प्रकाश सिंह, RINPAS निदेशक डॉ. जयति सिमलाई, सहायक निदेशक मिथिलेश चौधरी समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

मेडिकल कॉलेजों से एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

दूसरी बैठक में राज्य के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में यूजी और पीजी सीटों के विस्तार पर चर्चा हुई। सभी संस्थानों को मौजूदा मानव संसाधन और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

सीटों में संभावित बढ़ोतरी के साथ डॉक्टर, फैकल्टी, नर्सिंग और पैरामेडिकल कर्मचारियों की संख्या में भी बदलाव की जरूरत होगी। इसी के अनुसार पदों के पुनर्गठन की योजना तैयार की जाएगी।

अजय कुमार सिंह ने कहा कि मेडिकल कॉलेजों के विस्तार के लिए भवन और अन्य निर्माण कार्यों के साथ पर्याप्त मानव संसाधन भी जरूरी है। फैकल्टी की कमी होने पर संविदा के आधार पर प्रोफेसरों की नियुक्ति, सेवानिवृत्त विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं लेने तथा दूसरे राज्यों से योग्य शिक्षकों को जोड़ने की संभावनाएं तलाशने को कहा गया है।

तीन साल की कार्ययोजना बनाने का निर्देश

सभी मेडिकल कॉलेजों को अगले तीन वर्षों को ध्यान में रखते हुए विस्तार की कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया। एसएनएमएमसीएच धनबाद की ओर से वर्ष 2030 तक की योजना प्रस्तुत की गई, जिसमें यूजी की 250 और पीजी की 200 सीट बढ़ाने का प्रस्तावित लक्ष्य बताया गया।

दुमका, हजारीबाग, पलामू समेत अन्य मेडिकल कॉलेजों की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों को यूजी में 200 और पीजी में 150 सीट तक विस्तार की संभावनाओं पर विचार करने तथा इसके लिए जरूरी फैकल्टी, पैरामेडिकल स्टाफ और आधारभूत ढांचे का आकलन करने को कहा गया।

बोकारो और चाईबासा मेडिकल कॉलेज पर भी चर्चा

बैठक में बोकारो और चाईबासा में निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति की जानकारी ली गई। अधिकारियों ने बताया कि दोनों संस्थानों के भवन अगले वर्ष तक तैयार होने की संभावना है।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि यदि समय पर पर्याप्त फैकल्टी और अन्य संसाधन उपलब्ध हो जाते हैं तथा निर्धारित मानकों को पूरा कर लिया जाता है, तो अगले वर्ष से इन दोनों मेडिकल कॉलेजों में पढ़ाई शुरू कराने की दिशा में प्रयास किया जा सकता है।

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