गिरिडीह: गिरिडीह कॉलेज में कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच और प्राचार्य को हटाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का आंदोलन लगातार जारी है। पिछले सात दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं और विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. चंद्र भूषण शर्मा के बीच गुरुवार को हुई बातचीत भी किसी समाधान तक नहीं पहुंच सकी।
कुलपति ने आंदोलनकारी छात्रों से जांच पूरी होने तक करीब दो सप्ताह का समय देने और भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील की। हालांकि, ABVP नेताओं ने इसे स्वीकार नहीं किया और प्राचार्य को पद से हटाने की मांग पर कायम रहे।
प्राचार्य को हटाने पर नहीं बनी सहमति
छात्र नेताओं का कहना है कि निष्पक्ष जांच के लिए प्राचार्य को पहले जिम्मेदारी से अलग किया जाना चाहिए। वहीं कुलपति ने प्राचार्य को तत्काल हटाने से इनकार करते हुए कहा कि किसी के खिलाफ कार्रवाई जांच पूरी होने के बाद ही की जा सकती है।
वार्ता के दौरान ABVP कार्यकर्ताओं ने कुलपति पर राजनीतिक दबाव में काम करने का आरोप भी लगाया। कुलपति ने इन आरोपों को खारिज किया और कहा कि जांच प्रक्रिया किसी दबाव में नहीं चल रही है।
कुलपति बोले- 14 दिन में स्पष्ट होगी स्थिति
डॉ. चंद्र भूषण शर्मा के अनुसार, जांच को लेकर तीन समितियां गठित की गई हैं। इनमें से दो समितियों के सदस्य गिरिडीह पहुंचकर अपनी रिपोर्ट सौंप चुके हैं। इसके अलावा राज्यपाल की ओर से भी एक जांच समिति गठित किए जाने की बात उन्होंने कही।
कुलपति ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि छुट्टी के दिनों में भी जांच का काम जारी रखा जा सकता है, ताकि निर्धारित समय के भीतर स्थिति स्पष्ट हो सके।
दस्तावेजों को लेकर भी उठे सवाल
कुलपति ने बताया कि जांच के दौरान एक कार्यक्रम से संबंधित उपस्थिति और हस्ताक्षर को लेकर सवाल सामने आए हैं। हालांकि उनका कहना है कि केवल किसी दस्तावेज या आरोप के आधार पर बिना पूरी जांच किए किसी व्यक्ति को दोषी नहीं ठहराया जा सकता।
छात्रों की ओर से यह आशंका जताई जा रही है कि प्राचार्य जांच से जुड़े साक्ष्यों को प्रभावित कर सकते हैं। इस पर कुलपति ने कहा कि जांच प्रक्रिया में प्राचार्य को संबंधित प्रक्रिया से अलग रखा जा रहा है।
कुलपति ने राजनीतिक दबाव के आरोपों से किया इनकार
राजनीतिक दबाव के आरोपों पर कुलपति डॉ. चंद्र भूषण शर्मा ने स्पष्ट किया कि उन्हें किसी मंत्री, अधिकारी या राजभवन की ओर से कोई फोन नहीं आया है। उन्होंने कहा कि वह किसी बाहरी दबाव में काम नहीं कर रहे हैं और विश्वविद्यालय के कुलपति के तौर पर उनका मुख्य ध्यान छात्रों के हित पर है।
दूसरी ओर ABVP नेता रौशन सिंह और गिरिडीह के उप प्रमुख कुमार सौरव ने कहा कि कुलपति के साथ बातचीत विफल रही है। छात्र नेताओं ने संकेत दिया कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा।
