धनबाद: सीएसआईआर-सिंफर लेडीज क्लब की ओर से आदिवासी महिलाओं को पोषण, स्वास्थ्य और स्वरोजगार से जोड़ने की पहल की जा रही है। इसके तहत महिलाओं को मिलेट यानी मोटे अनाजों के पोषण संबंधी फायदे बताए जा रहे हैं और रागी, बाजरा, ज्वार समेत स्थानीय खाद्य सामग्री से अलग-अलग उत्पाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को अपने दैनिक भोजन में पौष्टिक खाद्य पदार्थों को शामिल करने के लिए जागरूक करने के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों से आय के अवसर तलाशने के लिए प्रोत्साहित करना है।
मिलेट से पारंपरिक भोजन के आगे बढ़ने की कोशिश
रागी, बाजरा, ज्वार, मक्का और तिल जैसे अनाज ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं। सिंफर लेडीज क्लब अब इन्हीं पारंपरिक खाद्य पदार्थों को आधुनिक खाद्य उत्पादों से जोड़ने का प्रयास कर रहा है।
क्लब की अध्यक्ष मीरा मिश्रा के अनुसार, महिलाएं परिवार की जिम्मेदारियों को प्राथमिकता देती हैं, लेकिन कई बार अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पातीं। इसी को देखते हुए उन्हें संतुलित और पौष्टिक भोजन की जानकारी देने के साथ मिलेट्स के इस्तेमाल के तरीके सिखाए जा रहे हैं।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को रागी, बाजरा और ज्वार के अलावा महुआ और मुरिंगा जैसे स्थानीय उत्पादों से लड्डू, कुकीज, बिस्किट और केक बनाने के तरीके बताए गए। वहीं, चीनी के विकल्प के तौर पर खजूर, किशमिश और शहद जैसे प्राकृतिक विकल्पों के इस्तेमाल की जानकारी भी दी गई।
पोषण के साथ बाजार की संभावनाओं पर जानकारी
मिलेट उत्पाद प्रशिक्षक और क्लब की सचिव नंदिता सिंह ने बताया कि इन खाद्य सामग्रियों में से कई महिलाओं के आसपास आसानी से उपलब्ध हैं। इसलिए इन्हें भोजन में शामिल करने के साथ छोटे स्तर पर खाद्य उत्पाद तैयार कर स्वरोजगार की दिशा में भी कदम बढ़ाया जा सकता है।
क्लीनिकल न्यूट्रिशनिस्ट मनीषा मीनू ने भी स्थानीय खाद्य पदार्थों को संतुलित आहार का हिस्सा बनाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, रागी, बाजरा और अन्य स्थानीय सामग्री के पोषण संबंधी गुणों की जानकारी मिलने से महिलाएं इन्हें अपने और परिवार के भोजन में बेहतर तरीके से शामिल कर सकती हैं।
घर से शुरू हो सकता है छोटा कारोबार
सिंफर लेडीज क्लब की इस पहल में स्वास्थ्य के साथ आर्थिक आत्मनिर्भरता को भी महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाया गया है। महिलाओं को बताया जा रहा है कि मिलेट आधारित खाद्य सामग्री तैयार कर स्थानीय स्तर पर इसकी बिक्री की जा सकती है।
रागी से केक, तिल से लड्डू और दूसरे मोटे अनाजों से विभिन्न खाद्य उत्पाद तैयार कर छोटे स्तर पर कारोबार शुरू किया जा सकता है। इसके लिए बड़े निवेश के बजाय स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कच्चे माल और घरेलू संसाधनों से शुरुआत करने की संभावनाओं पर जोर दिया गया।
नंदिता सिंह ने बताया कि वह अलग-अलग संस्थानों और क्षेत्रों में मिलेट उत्पादों की ट्रेनिंग दे चुकी हैं। उनका उद्देश्य है कि अधिक से अधिक महिलाएं इस क्षेत्र की जानकारी हासिल कर अपने लिए रोजगार का विकल्प तैयार कर सकें।
बैंकिंग सहायता की भी जानकारी
कार्यक्रम में एसबीआई की ओर से भी महिलाओं को बैंकिंग सेवाओं और स्वरोजगार के लिए उपलब्ध वित्तीय सहायता की जानकारी देने की बात कही गई। एसबीआई के डीजीएम प्रफुल्ल कुमार झा ने कहा कि महिलाओं को बैंकिंग संबंधी किसी भी सहायता की जरूरत होने पर सहयोग उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने सामाजिक दायित्व के तहत आगे भी इस तरह की पहलों में सहयोग की बात कही।
पारंपरिक संसाधनों को नए अवसर से जोड़ने की पहल
प्रशिक्षण में शामिल महिलाओं ने बताया कि उनके आसपास मिलेट और कई स्थानीय खाद्य सामग्री पहले से उपलब्ध हैं, लेकिन उनसे अलग-अलग उत्पाद तैयार करने की जानकारी नहीं थी। प्रशिक्षण के बाद उन्हें यह समझने का अवसर मिला कि पारंपरिक खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल पोषण के साथ आय के सा
