Monday, September 21, 2026

बिहार में Farmer ID को लेकर किसानों की चिंता, कम जमीन दर्ज होने से खाद और राशन पर उठ रहे सवाल.

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पटना: बिहार में Farmer ID और Farmer Registry को लेकर किसानों के बीच कई तरह की चिंताएं सामने आ रही हैं। कुछ किसानों का कहना है कि उनके नाम पर जितनी जमीन दर्ज है, डिजिटल रिकॉर्ड में उसी के आधार पर कृषि सुविधाओं का विवरण तय होने से उन्हें परेशानी हो रही है। वहीं, कुछ मामलों में भूमि रिकॉर्ड और राशन कार्ड से जुड़े सत्यापन को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

बिहार कृषि विभाग किसान पंजीकरण और कृषि योजनाओं को डिजिटल व्यवस्था से जोड़ रहा है। विभाग के आधिकारिक पोर्टल के मुताबिक किसान पंजीकरण के जरिए कृषि योजनाओं का लाभ लेने की व्यवस्था है और भूमि संबंधी दस्तावेजों का अद्यतन होना महत्वपूर्ण है।

54 लाख से ज्यादा किसानों की Farmer ID

रिपोर्ट के अनुसार राज्य में करीब 54 लाख 5734 किसानों की Farmer ID बन चुकी है। दूसरी ओर प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि के लाभुक किसानों की संख्या इससे काफी अधिक बतायी जा रही है। यही अंतर कृषि विभाग के सामने Farmer Registry का दायरा बढ़ाने की चुनौती को दिखाता है।

हाल के दिनों में जिलों में भी Farmer ID बनाने की प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। दरभंगा में जिला प्रशासन ने 15 अक्टूबर तक शेष किसानों की Farmer ID बनाने का लक्ष्य तय किया है।

जमीन कम दर्ज होने पर खाद को लेकर किसानों की चिंता

किसानों की प्रमुख चिंता जमीन के डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ी है। कई किसानों के नाम पर उनकी वास्तविक खेती की तुलना में कम जमीन दर्ज है। कुछ किसान पुश्तैनी जमीन पर खेती कर रहे हैं, लेकिन जमाबंदी अभी भी पूर्वजों के नाम पर है।

ऐसे किसानों का कहना है कि यदि कृषि व्यवस्था में दर्ज भूमि का ही इस्तेमाल किया जाता है, तो वास्तविक खेती के मुकाबले उन्हें कृषि इनपुट हासिल करने में परेशानी हो सकती है।

बिहार में खाद वितरण को भी डिजिटल व्यवस्था से जोड़ा जा रहा है। हाल में अलग-अलग जिलों में मोबाइल से उर्वरक बुकिंग और QR कोड के जरिए वितरण की व्यवस्था शुरू की गई है।

पुश्तैनी जमीन का रिकॉर्ड बड़ी समस्या

गांवों में ऐसे किसानों की संख्या कम नहीं है, जो परिवार की पुरानी जमीन पर खेती करते हैं, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में जमीन उनके पिता, दादा या अन्य पूर्वजों के नाम दर्ज है। इसके अलावा बटाई पर खेती करने वाले किसानों के पास अपनी जमीन का पूरा रिकॉर्ड नहीं होता।

बिहार कृषि विभाग के पोर्टल पर रैयत और गैर-रैयत दोनों तरह के किसानों के पंजीकरण की व्यवस्था बतायी गई है। वहीं, अलग-अलग कृषि योजनाओं के लिए अद्यतन LPC, रसीद, जमाबंदी या निर्धारित भूमि संबंधी दस्तावेजों की जरूरत पड़ सकती है।

जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त कराने पर जोर

भूमि रिकॉर्ड को सही कराने के लिए बिहार सरकार के राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से ऑनलाइन जमाबंदी और परिमार्जन की व्यवस्था उपलब्ध है। किसान अपने भूमि रिकॉर्ड की जानकारी ऑनलाइन देख सकते हैं और रिकॉर्ड में सुधार के लिए निर्धारित प्रक्रिया अपना सकते हैं।

कृषि विभाग भी किसानों के पंजीकरण विवरण में सुधार की सुविधा देता है। विभाग के अनुसार कुछ जानकारियों में किसान स्वयं या वसुधा केंद्र की मदद से संशोधन कर सकते हैं, जबकि अन्य विवरणों में सुधार के लिए संबंधित कृषि अधिकारियों से संपर्क करना होता है।

राशन कार्ड को लेकर भी सामने आया मामला

खगड़िया के अलौली प्रखंड के शुभा गांव की सिंधु देवी का मामला भूमि रिकॉर्ड और राशन कार्ड के बीच जुड़े सत्यापन को लेकर सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार उनके नाम पर 2.5 एकड़ जमीन दर्ज होने के बाद राशन कार्ड से संबंधित कार्रवाई हुई। उन्होंने इस मामले में शिकायत भी की।

हालांकि, किसी व्यक्ति का राशन कार्ड केवल Farmer ID बनने के कारण स्वतः रद्द होता है, ऐसा सामान्य नियम आधिकारिक स्रोतों से इस रिपोर्ट में स्थापित नहीं होता। राशन कार्ड की पात्रता और सत्यापन अलग प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत होते हैं।

आगे बढ़ सकती है Farmer ID की भूमिका

Farmer Registry का उद्देश्य किसानों के डिजिटल रिकॉर्ड को कृषि योजनाओं और सेवाओं से जोड़ना है। बिहार कृषि विभाग के अनुसार पंजीकृत किसान कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए इस डिजिटल व्यवस्था का इस्तेमाल कर सकते हैं।

ऐसे में किसानों के लिए अपनी जमीन, जमाबंदी और पंजीकरण संबंधी जानकारी सही रखना महत्वपूर्ण होता जा रहा है। भूमि रिकॉर्ड में गलती या अधूरी जानकारी होने पर किसान को संबंधित राजस्व और कृषि अधिकारियों के माध्यम से उसे दुरुस्त कराने की जरूरत पड़ सकती है।

फिलहाल किसानों की चिंता मुख्य रूप से यही है कि डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज भूमि और वास्तविक खेती की स्थिति में अंतर होने पर उन्हें कृषि सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी न हो। सरकार के सामने Farmer Registry का विस्तार करने के साथ इन रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं को दूर करने की चुनौती भी है।

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