रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को लेकर राज्य सरकार ने झारखंड हाईकोर्ट में अपना पक्ष रखा है। सरकार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि यदि चयन प्रक्रिया में व्यापक स्तर पर अनियमितता साबित होती है और दोषी तथा निर्दोष अभ्यर्थियों को अलग-अलग पहचानना संभव नहीं हो, तो पूरी चयन प्रक्रिया को रद्द किया जा सकता है।
सरकार ने यह भी तर्क दिया है कि किसी अभ्यर्थी को चयनित होने या नियुक्ति पत्र मिल जाने मात्र से पद पर बने रहने का स्थायी अधिकार हासिल नहीं हो जाता। हालांकि, इस मामले में हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार की नियुक्तियां रद्द करने वाली अधिसूचना के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा रखी है। मामले पर अंतिम निर्णय अभी बाकी है।
सरकार ने परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं का दिया हवाला
राज्य सरकार के कार्मिक विभाग की ओर से दाखिल शपथपत्र में परीक्षा संचालन, एजेंसियों और डाटा प्रोसेसिंग से संबंधित कई कथित अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। सरकार का कहना है कि जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल उठे हैं।
सरकार ने अपने जवाब में यह भी कहा कि यदि पूरी परीक्षा प्रणाली प्रभावित हो और केवल कुछ अभ्यर्थियों को अलग कर निष्पक्ष तरीके से चयन प्रक्रिया को बचाना संभव न हो, तो पूरी प्रक्रिया को रद्द करने का प्रशासनिक निर्णय लिया जा सकता है। सरकार ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का भी हवाला दिया है।
79 अभ्यर्थियों की याचिका के जवाब में दाखिल हुआ हलफनामा
सरकार का यह जवाब आकांक्षा मिंज समेत 79 याचिकाकर्ताओं की ओर से दाखिल याचिका के संदर्भ में सामने आया है। याचिकाकर्ताओं ने नियुक्तियों को रद्द करने के सरकारी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
सरकार ने अदालत के समक्ष यह तर्क रखा कि परीक्षा में व्यापक गड़बड़ी की स्थिति में प्रशासनिक सेवा की चयन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और निष्पक्ष परीक्षा में शामिल अभ्यर्थियों के हितों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
जांच में कई गिरफ्तारियां, अभ्यर्थियों से पूछताछ
JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षा अनियमितताओं की जांच CID कर रही है। हाल के दिनों में एजेंसी ने कई लोगों को गिरफ्तार किया है। 16 सितंबर की CID कार्रवाई में JPSC मामले में दो और JSSC-CGL मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने की जानकारी सामने आई थी। जांच एजेंसी इन मामलों में अभ्यर्थियों को कथित अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों की पड़ताल कर रही है।
JPSC मामले की जांच में परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसियों और कुछ आरोपियों के बीच कथित संबंधों की भी पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से अभ्यर्थियों को राहत
इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण बात यह है कि हाईकोर्ट ने फिलहाल सरकार की ओर से 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा समेत संबंधित भर्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचना के क्रियान्वयन पर रोक लगा रखी है। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान सरकार से विस्तृत जवाब भी मांगा था।
18 सितंबर की सुनवाई के बाद अदालत ने निर्दोष अभ्यर्थियों को जांच के दौरान परेशानी से बचाने के लिए सेवानिवृत्त जज जस्टिस गौतम कुमार चौधरी को ऑब्जर्वर नियुक्त किया है। अगली सुनवाई 7 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
फिलहाल सरकार और याचिकाकर्ताओं के तर्क अदालत के समक्ष हैं। नियुक्तियां रद्द करने के सरकारी फैसले की अंतिम वैधता पर हाईकोर्ट का निर्णय अभी आना बाकी है।
